Wakf Act suddenly flared up in Bihar opposition has its eyes on Muslim dominated seats बिहार में अचानक भड़क उठा वक्फ ऐक्ट का मुद्दा, मुस्लिम बहुल सीटों पर विपक्ष की नजर, Bihar Hindi News - Hindustan
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बिहार में अचानक भड़क उठा वक्फ ऐक्ट का मुद्दा, मुस्लिम बहुल सीटों पर विपक्ष की नजर

सुप्रीम कोर्ट में इस अधिनियम को पहले ही चुनौती दी जा चुकी है और मई में शीर्ष अदालत ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका विरोध अब और तेज हो गया है।

Fri, 4 July 2025 08:37 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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बिहार में अचानक भड़क उठा वक्फ ऐक्ट का मुद्दा, मुस्लिम बहुल सीटों पर विपक्ष की नजर

बिहार में कुछ ही महीनों के बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले यहां वक्फ संसोधन अधिनियम को लेकर मुद्दा गरमाता जा रहा है। विपक्षी दल इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। रविवार को पटना के गांधी मैदान में 'वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025' के खिलाफ एक बड़ी रैली आयोजित की गई। यह रैली इमारत-ए-शरिया द्वारा आयोजित की गई थी, जो कि बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की प्रमुख सामाजिक-शैक्षणिक एवं धार्मिक संस्था है। इस प्रदर्शन का नाम रखा गय “वक्फ बचाओ, दस्तूर बचाओ सम्मेलन”।

सुप्रीम कोर्ट में इस अधिनियम को पहले ही चुनौती दी जा चुकी है और मई में शीर्ष अदालत ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका विरोध अब और तेज हो गया है। इमारत-ए-शरिया के अमीर मौलाना फैसल रहमानी ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों के विरोध के बाद तीन कृषि कानून वापस ले लिए थे, इसलिए यदि व्यापक जनविरोध हुआ तो वक्फ कानून में किए गए संशोधन भी वापस हो सकते हैं।

क्या हैं इमारत-ए-शरिया की आपत्तियां?

>> ‘वक्फ बाय यूज’ की व्यवस्था हटाना: यानी वह जमीन जो वर्षों से धार्मिक या परोपकारी मुस्लिम कार्यों में उपयोग हो रही है, उसे अब वक्फ संपत्ति नहीं माना जाएगा जब तक वह पंजीकृत न हो।

>> गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने की अनुमति।

>> जिला कलेक्टर को यह अधिकार देना कि वह तय कर सके कि कोई वक्फ संपत्ति सरकारी है या नहीं।

>> वक्फ संपत्तियों पर सीमा अधिनियम (Limitation Act) लागू करना, जिससे वक्फ बोर्ड किसी जमीन पर बहुत समय बाद दावा नहीं कर सकेगा, चाहे वह वक्फ संपत्ति हो।

बिहार क्यों बना विरोध का केंद्र?

बिहार की मुस्लिम आबादी 17% से अधिक है। इमारत-ए-शरिया की जड़ें यहां मजबूत हैं। पूर्व प्रमुख मौलाना वली रहमानी के कार्यकाल से ही यहां यह मजबूत है। राज्य में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं और राजद व कांग्रेस जैसे विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। रैली में राजद नेता तेजस्वी यादव मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

इमारत-ए-शरिया बिहार, झारखंड, ओडिशा और बंगाल के जिला स्तर पर आंदोलन को तेज करेगी। उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में समान विचारधारा वाले संगठनों से संपर्क कर रही है। इसके अलावा, नई दिल्ली में एक विशाल राष्ट्रीय स्तर की रैली आयोजित करने की योजना बन रही है।

केंद्र सरकार का क्या है रुख

अप्रैल में केंद्र सरकार ने संकेत दिया था कि वह ‘वक्फ बाय यूज’ और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करने जैसे विवादास्पद प्रावधानों को लागू नहीं करेगी। लेकिन अभी तक इस पर कोई आधिकारिक संशोधन नहीं हुआ है, जिससे असमंजस और विरोध जारी है।

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