बिहार की धरती से 2500 वर्ष पहले जनतंत्र का जन्म हुआ, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुद्ध और चाणक्य की दी मिसाल
उपराष्ट्रपति ने बिहार में बुद्ध, चाणक्य, आर्यभट्ट और महावीर जैसी कई महान प्रतिभाओं का उदाहरण देते हुए बिहार की भूमि को प्रतिभाओं की जननी बताया। उन्होंने कहा कि यह वह भूमि है, जहां से कई आईएएस और आईपीएस व प्रतिभाशाली दिमाग देश को मिले।

बिहार की भूमि सिर्फ ऐतिहासिक रूप से महान नहीं है, बल्कि यहीं वह भूमि है जहां ज्ञान ने पूरे विश्व को अपनी ओर आकर्षित किया है। बिहार के वैशाली जिले में 2500 वर्ष पहले जनतंत्र का जन्म हुआ। इसी धरती पर सिद्धार्थ को ज्ञान प्राप्त हुआ और वह बुद्ध कहलाए। ये बातें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित चार दिवसीय ‘उन्मेष : अभिव्यक्ति का उत्सव’ कार्यक्रम के समापन के अवसर पर कहीं। वे बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति बनने के बाद बिहार की धरती पर पहली बार आना हुआ है। ऐसी भूमि पर एक साथ 100 से अधिक भाषाओं के चिंतक, लेखक, विद्वान और साहित्यकारों का जुटना अपने आप में गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि हम सभी भाषाओं की बाधाओं को तोड़ते हुए संस्कृति को बढ़ाने के लिए एक साथ 500 से अधिक की संख्या में एकत्रित हुए हैं, इस लक्ष्य को लेकर आगे भी बढ़ना है। उन्होंने इस आयोजन में संस्कृति मंत्रालय, साहित्य अकादमी और बिहार के राज्यपाल और सरकारी महकमे के सहयोग की सराहना की। उपराष्ट्रपि ने हर्ष जताया कि एक बार पुन: नालंदा विवि का विकास हो रहा है।
बिहार की भूमि प्रतिभाओं की जननी है
उपराष्ट्रपति ने बिहार में बुद्ध, चाणक्य, आर्यभट्ट और महावीर जैसी कई महान प्रतिभाओं का उदाहरण देते हुए बिहार की भूमि को प्रतिभाओं की जननी बताया। उन्होंने कहा कि यह वह भूमि है, जहां से कई आईएएस और आईपीएस व प्रतिभाशाली दिमाग देश को मिले। उन्होंने कहा कि मधुबनी कला बताती है कि बिहार कलाओं में कितना समृद्ध है।




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