Upendra Kushwaha Answer of Parivarvad on Son Deepak Prakash Become Minister in Bihar Government Says Jeher Peena Padta h जहर पीना पड़ता है; बिहार सरकार में बेटे दीपक प्रकाश बने मंत्री तो उपेंद्र कुशवाहा ने दी सफाई, Bihar Hindi News - Hindustan
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जहर पीना पड़ता है; बिहार सरकार में बेटे दीपक प्रकाश बने मंत्री तो उपेंद्र कुशवाहा ने दी सफाई

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सवाल उठाइए, लेकिन जानिए। आज के हमारे निर्णय की जितनी आलोचना हो, लेकिन इसके बिना फिलहाल कोई दूसरा विकल्प फिर से शून्य तक पहुंचा सकता था। भविष्य में जनता का आशीर्वाद कितना मिलेगा, मालूम नहीं।

Fri, 21 Nov 2025 05:38 PMMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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जहर पीना पड़ता है; बिहार सरकार में बेटे दीपक प्रकाश बने मंत्री तो उपेंद्र कुशवाहा ने दी सफाई

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश एनडीए सरकार में मंत्री बने हैं। न तो वे विधायक हैं और न ही एमएलसी, ऐसे में सीधे मंत्रिपद की शपथ लेने के बाद वह चर्चा में आ गए हैं। माना जा रहा है कि उन्हें एमएलसी बनाया जा सकता है। वहीं, परिवारवाद को लेकर भी उपेंद्र कुशवाहा पर निशाना साधा जा रहा है। अब उन्होंने सफाई पेश की है। बेटे को मंत्री बनाए जाए के बाद हो रही आलोचना का रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास की घटनाओं से उन्होंने सीख ली है। समुद्र मंथन से अमृत और जहर दोनों निकलता है। कुछ लोगों को जहर पीना पड़ता है। शुक्रवार को उपेंद्र कुशवाहा ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा है कि अगर आपने हमारे निर्णय को परिवारवाद की श्रेणी में रखा है, तो जरा समझिए मेरी विवशता को।

उन्होंने आगे कहा, ''पार्टी के अस्तित्व व भविष्य को बचाने व बनाए रखने के लिए मेरा यह कदम जरुरी ही नहीं अपरिहार्य था। मैं तमाम कारणों का सार्वजनिक विश्लेषण नहीं कर सकता, लेकिन आप सभी जानते हैं कि पूर्व में पार्टी के विलय जैसा भी अलोकप्रिय और एक तरह से लगभग आत्मघाती निर्णय लेना पड़ा था। जिसकी तीखी आलोचना बिहार भर में हुई। उस वक्त भी बड़े संघर्ष के बाद आप सभी के आशीर्वाद से पार्टी ने सांसद, विधायक सब बनाए। लोग जीते और निकल लिए। झोली खाली की खाली रही। शून्य पर पहूंच गए। पुनः ऐसी स्थिति न आए, सोचना ज़रूरी था।''

'कुछ लोगों को जहर पीना पड़ता है'

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि सवाल उठाइए, लेकिन जानिए। आज के हमारे निर्णय की जितनी आलोचना हो, लेकिन इसके बिना फिलहाल कोई दूसरा विकल्प फिर से शून्य तक पहुंचा सकता था। भविष्य में जनता का आशीर्वाद कितना मिलेगा, मालूम नहीं। परन्तु खुद के स्टेप से शुन्य तक पहुंचने का विकल्प खोलना उचित नहीं था। इतिहास की घटनाओं से यही मैंने सबक ली है। समुद्र मंथन से अमृत और जहर दोनों निकलता है। कुछ लोगों को तो जहर पीना ही पड़ता है। वर्तमान के निर्णय से परिवारवाद का आरोप मेरे उपर लगेगा। यह जानते/समझते हुए भी निर्णय लेना पड़ा, जो मेरे लिए ज़हर पीने के बराबर था। फिर भी मैंने ऐसा निर्णय लिया। पार्टी को बनाए/बचाए रखने की जिद्द को मैंने प्राथमिकता दी।

उन्होंने आगे लिखा कि अपनी लोकप्रियता को कई बार जोखिम में डाले बिना कड़ा/बड़ा निर्णय लेना संभव नहीं होता। सो मैंने लिया। अरे भाई, रही बात दीपक प्रकाश की तो जरा समझिए - विद्यालय की कक्षा में फेल विद्यार्थी नहीं है। मेहनत से पढ़ाई करके कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की डिग्री ली है, पूर्वजों से संस्कार पाया है उसने। इंतजार कीजिए, थोड़ा वक्त दीजिए उसे। अपने को साबित करने का। करके दिखाएगा। अवश्य दिखाएगा। आपकी उम्मीदों और भरोसा पर खरा उतरेगा। वैसे भी किसी भी व्यक्ति की पात्रता का मूल्यांकन उसकी जाति या उसके परिवार से नहीं, उसकी काबिलियत और योग्यता से होना चाहिए।''

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