महागठबंधन में सीटों पर खींचतान का समय आ गया, 12 जुलाई को तेजस्वी ने बुलाई मीटिंग
बिहार में छह दलों के विपक्षी दलों के महागठबंधन की तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चार बैठक हो चुकी है। तेजस्वी ने पांचवीं बैठक 12 जुलाई को बुलाई है। सीट के दावे करने वाले नेता सीट शेयरिंग पर औपचारिक बात तब शुरू करेंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर छह विपक्षी दलों के महागठबंधन (एमजीबी) में सीट समझौते पर औपचारिक बातचीत 12 जुलाई से शुरू होगी। राजद, कांग्रेस, सीपीआई-माले, सीपीआई, सीपीएम और वीआईपी इस समय महागठबंधन यानी इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं। पशुपति पारस की रालोजपा के इसमें शामिल होने की एक संभावना है। महागठबंधन के कई नेता मीडिया और पार्टी की बैठकों में सीटों की दावेदारी कर रहे हैं, कुछ तो संख्या भी बता रहे हैं, लेकिन गठबंधन के फोरम पर इस पर बातचीत नहीं हो पाई थी।
तेजस्वी यादव के आवास पर 12 जून को महागठबंधन के कोर्डिनेशन कमेटी की चौथी बैठक हुई थी। चौथी बैठक में तय हुआ था कि सभी सहयोगी दल सीटों को लेकर अपनी दावेदारी की सूची पांचवीं बैठक से पहले दे देंगे। 12 जून को एक फॉर्मूला यह तय हुआ कि 2020 के चुनाव में जो सीट 15 हजार से ज्यादा के अंतर से सहयोगी दल हारे थे, वहां पार्टी और कैंडिडेट दोनों को बदला जाएगा।
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महागठबंधन की घोषणा पत्र उप-समिति ने मेनिफेस्टो का प्रारूप तैयार कर लिया है, जिसमें राजद और कांग्रेस की माई बहिन मान योजना, पेंशन वगैरह का वादा शामिल है। 12 जुलाई को कोर्डिनेशन कमेटी की बैठक में घोषणा पत्र के मसौदे पर भी विचार-विमर्श होगा। तेजस्वी की अध्यक्षता वाली कमेटी से मंजूरी के बाद इसे उचित समय पर जारी किया जाएगा।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के राज्य सचिव राम नरेश पांडेय ने पूछने पर बताया कि अभी तक समन्वय समिति की बैठक में सीट शेयरिंग पर बात नहीं हुई है। समिति में अलायंस के बीच बिहार के मसलों और समस्याओं पर साझा प्रयास को लेकर बातें हुई हैं जिसकी झलक बिहार बंद के दौरान दिखी जब वोटर लिस्ट रिवीजन के मसले पर सभी घटक दल एकजुटता के साथ सड़क पर उतरे। उन्होंने कहा कि समिति के अध्यक्ष तेजस्वी महागठबंधन की जरूरत के अनुसार विषयों को रखते हैं और उस पर समिति के सदस्य चर्चा करते हैं। पांडेय ने कहा कि पांचवीं बैठक में सीटों के तालमेल पर बात होगी।
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सीट शेयरिंग की बाचतीत शुरू होने के बाद सबकी नजर विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के सुप्रीमो मुकेश सहनी के बयान और बोली पर टिकी रहेगी, जो 2020 के चुनाव में गठबंधन की पीसी से उठकर भाजपा के पास चले गए थे। सहनी को भाजपा ने अपने कोटे की 11 सीटें देकर एनडीए में शामिल किया था, जिसमें वो खुद तो दो सीट लड़कर हार गए लेकिन पार्टी के चार कैंडिडेट जीत गए थे।
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मुकेश सहनी लगातार 60 सीट और डिप्टी सीएम जैसी बातें कर रहे हैं। सीपीआई-माले भी 45 सीट की बात कर रही है। कांग्रेस 70 सीटों से नीचे जाने को तैयार नहीं है। 2020 में कांग्रेस 70 सीट लड़ी थी लेकिन मात्र 19 जीत पाई। माले 19 सीट लड़ी और 12 जीती। सीपीआई 6 और सीपीएम 4 लड़कर 2-2 विधायक जिता लाई। राजद 144 लड़कर 75 सीटों से जीत गई। पांच दल तब साथ थे जिसमें कांग्रेस के स्ट्राइक रेट ने महागठबंधन को सरकार से दूर कर दिया।
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मुकेश सहनी लौटकर महागठबंधन में आए हैं और लोकसभा चुनाव में भी साथ थे। राजद और कांग्रेस को उनके लिए जगह बनानी होगी। सहनी को छोड़ दें तो बाकी दल महागठबंधन में बने रहेंगे, ये पांच दलों की न्यूनतम समझदारी है। निषाद आरक्षण के नाम पर सहनी किसी के साथ भी बने रह सकते हैं और किसी के भी साथ जा सकते हैं।




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