Tejashwi dy CM residence case led High Court to cancel lifetime allotment of bungalows to formers CM Rabri Lalu Manjhi राबड़ी का बंगला नहीं बदलता! तेजस्वी यादव के केस से ही हाईकोर्ट ने छीना था सारे पूर्व CM का आवास, Bihar Hindi News - Hindustan
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राबड़ी का बंगला नहीं बदलता! तेजस्वी यादव के केस से ही हाईकोर्ट ने छीना था सारे पूर्व CM का आवास

Rabri Devi Residence: नीतीश कुमार सरकार ने विधान परिषद में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी का आवास बदल दिया है। राबड़ी और लालू को 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करके 39 हार्डिंग रोड जाना होगा।

Wed, 26 Nov 2025 09:20 AMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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राबड़ी का बंगला नहीं बदलता! तेजस्वी यादव के केस से ही हाईकोर्ट ने छीना था सारे पूर्व CM का आवास

नीतीश कुमार की नई सरकार में बिहार में बाकी बदलाव के साथ-साथ प्रमुख नेताओं की आवास व्यवस्था में भी फेरबदल शुरू हो गया है। भवन निर्माण विभाग ने विधान परिषद में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी के मौजूदा आवास 10, सर्कुलर रोड का आवंटन रद्द कर दिया है और उन्हें 39, हार्डिंग रोड पर नया बंगला दिया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास में पूर्व सीएम लालू यादव भी रहते हैं। चुनाव नतीजों के बाद हार को लेकर इसी बंगले में तेजस्वी यादव और रोहिणी आचार्या के बीच लड़ाई हुई थी। नीतीश कैबिनेट में भवन निर्माण विभाग जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विजय कुमार चौधरी को मिला है। चौधरी ने रविवार को विभाग संभालने के बाद अफसरों की एक बैठक ली थी।

राबड़ी देवी का आवास बदलने के आदेश को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने सरकार द्वारा बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है। पार्टी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि यह सरकार में भाजपा के बढ़ते दखल का परिणाम है और उसके कारण ही यह आदेश जारी हुआ है। राबड़ी लंबे समय से इस आवास में रह रही हैं। राबड़ी का यह आवास बतौर पूर्व सीएम उनके पास ही रह सकता था, लेकिन उनके बेटे तेजस्वी यादव द्वारा डिप्टी सीएम आवास को लेकर दायर एक केस की सुनवाई के दौरान पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके जरिए राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को पटना में आवास, सुरक्षा और तमाम सुविधाएं सरकारी खर्च पर दी जा रही थीं।

तेजस्वी यादव का यह केस महागठबंधन की पहली सरकार के बाद का है। सीएम नीतीश कुमार ने 2017 में जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बना ली, तब सरकार ने तेजस्वी को 5, देशरत्न मार्ग का वह बंगला खाली करने कहा, जो उन्हें बतौर डिप्टी सीएम आवंटित हुआ था। तेजस्वी ने उस बंगले की साज-सजावट पर काफी खर्च करवाया था, इसलिए वो विधानसभा में नेता विपक्ष के तौर पर वहीं रहना चाहते थे। तेजस्वी भवन निर्माण विभाग के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए।

हाईकोर्ट में सिंगल जज ने तेजस्वी का याचिका खारिज कर दी तो उन्होंने अपील दायर की। अपील की सुनवाई तत्कालीन चीफ जस्टिस एपी शाही और जस्टिस अंजना मिश्रा की बेंच ने की। कोर्ट के सवालों के जवाब में भवन निर्माण विभाग ने जो दस्तावेज पेश किए, उससे कोर्ट को पता चला कि बिहार के सारे पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बंगला, सुरक्षा, स्टाफ और दूसरी सुविधाओं की एक योजना चल रही है। नीतीश सरकार ने 2010 में कानून बदलकर यह सुविधा सभी पूर्व सीएम को दी थी। इसके तहत राबड़ी देवी, लालू यादव, जीतनराम मांझी, जगन्नाथ मिश्रा और सतीश प्रसाद सिंह को बंगले आवंटित हुए थे।

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने तेजस्वी की अपील तो खारिज की ही, साथ में पूर्व सीएम को आजीवन आवास और अन्य सुविधाओं के मामले को स्वतः संज्ञान लेकर सरकार से जवाब देने कहा। इसी मामले में 19 फरवरी 2019 को कोर्ट ने इस तरह के प्रावधान वाले कानून और सर्कुलर को रद्द करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते आवंटित सरकारी आवास और सुविधाएं वापस लेने का आदेश दिया था। अगर हाईकोर्ट ने यह सुविधा बंद नहीं की होती और राबड़ी को यह आवास बतौर पूर्व सीएम आवंटित रहा होता तो शायद इसमें बदलाव नहीं होता।

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