भ्रष्ट रिशुश्री से साठगांठ में IAS योगेश और अभिलाषा शर्मा पर केस की तैयारी, SVU ने मांगी इजाजत
मालूम हो कि टेंडर घोटाले के आरोपी रिशुश्री से साठगांठ को लेकर इन दो आईएएस अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। साथ ही, इनके अलावे कई अन्य आईएएस अधिकारी भी निशाने पर हैं।

भ्रष्ठ ठेकेदार रिशुश्री से साठगांठ में अब IAS योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दरअसल बिहार में चर्चित टेंडर घोटाला सामने आने के बाद दो आईएएस अधिकारियों योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की इजाजत मांगी गई है। स्पेशल विजलेंस यूनिट (एसवीयू) ने प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी) से प्राप्त दस्तावेजों एवं अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के साथ सरकार के निगरानी विभाग से मार्गदर्शन के लिए अनुरोध किया है। वहीं, विभागीय सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में कोई भी कानूनी कार्रवाई करने के पहले राज्य के महाधिवक्ता से राय मांगी गई है।
मालूम हो कि टेंडर घोटाले के आरोपी रिशुश्री से साठगांठ को लेकर इन दो आईएएस अधिकारियों को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। साथ ही, इनके अलावे कई अन्य आईएएस अधिकारी भी निशाने पर हैं। एसवीयू द्वारा इस मामले में अनुसंधान तेज किया गया है। एसवीयू अपने स्तर से सभी साक्ष्यों को एकत्र कर लेना चाहती है ताकि आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा सके।
एसपी के नेतृत्व में सहरसा पहुंची जांच टीम
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को एसवीयू की विशेष जांच टीम पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में सहरसा पहुंची। वहां जांच अधिकारियों ने सहरसा नगर निगम के कार्यालय में दस्तावेजों की जांच की। मुमुक्षु चौधरी के कार्यकाल के दौरान वहां हुए टेंडर से जुड़े दस्तावेजों के बारे में नगर निगम के अधिकारियों से पूछताछ की। सूत्रों की मानें तो जांच टीम को वहां कई महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिनका उपयोग बतौर साक्ष्य एसवीयू कर सकती है। जांच एजेंसी ईडी से जुड़े दस्तावेजों के अलावा अपने स्तर से भी प्रमाणिक दस्तावेजों को एकत्र कर रही है।
बुडको का ठेका लेने वाली 15 कंपनियां ईडी की रडार पर
बता दें कि सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार मामले में 15 कंपनियां केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रडार पर हैं। जांच एजेंसी को आशंका है कि इन कंपनियों को भ्रष्ट तरीके से ठेके का आवंटन किया गया। ईडी के मुताबिक, इन कंपनियों को नगर विकास एवं आवास विभाग की एजेंसी बुडको (बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम) ने सबसे अधिक काम दिया। इनके अलावा जल संसाधन विभाग और भवन निर्माण विभाग से भी इनको काम मिले। ऐसे में जांच एजेंसी इन कंपनियों के प्रबंधन और शेयर होल्डरों का पता लगा रही है।
रिशु श्री प्रकरण से इन कंपनियों का जुड़ाव : ईडी ने जून 2025 में ही इन कंपनियों को चिह्नित करते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग से इनको मिले ठेकों की रिपोर्ट मांगी थी। इनमें रिलायबल एंटरप्राइजेज और रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां सीधे रिशु श्री से जुड़ी हैं। अन्य कंपनियों को भी रिशु श्री के जरिये ठेके देने की आशंका को देखते हुए ईडी ने 2016 के बाद से इन कंपनियों को मिले सभी ठेका परियोजनाओं का ब्योरा मांगा था। सूत्रों के मुताबिक ईडी इस ब्योरे के आधार पर कंपनियों के मालिक और प्रबंधन को खंगाल रही है।
आरोप है कि इनमें से कुछ कंपनियों के ब्लैक लिस्टेड या डिबार होने के बावजूद भी करोड़ों रुपये के ठेके दिये गए। जांच के मुताबिक इन कंपनियों ने गलत दस्तावेजों के आधार पर टेंडर हासिल किए। बुडको एवं विभाग के तत्कालीन अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। जांच एजेंसी इन सभी कंपनियों के दस्तावेज, पेमेंट रिकॉर्ड और टेंडर प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी का सत्यापन कर रही है। ईडी की मांग पर बुडको ने इससे संबंधित रिपोर्ट भेज दी थी। सूत्रों के मुताबिक इन कंपनियों में से फिलहाल किसी कंपनी से विभाग या बुडको के स्तर पर काम नहीं लिया जा रहा है।




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