जल्द संवरेगी मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट की सूरत, निजी कंपनी ने दिखाई दिलचस्पी; PM नरेंद्र मोदी कर चुके हैं वादा
एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारी अश्विनी एस ठाकरे के नेतृत्व में अधिकारियों व कंपनी प्रतिनिधियों की टीम ने पताही हवाई अड्डे का निरीक्षण किया। बताया कि सरकारी रिकार्ड में इसकी जमीन 101 एकड़ है।

बिहार के मुजफ्फरपुर में पताही स्थित हवाई अड्डा को चालू कर विमान सेवा का मुद्दा हर बार चुनाव में जोर शोर से उठता है और फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। पीएम नरेंद्र मोदी भी साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावी भाषण में इसे शुरू करने का आश्वासन दे चुके हैं। एक बार फिर लोगों की उम्मीद जगी है क्योंकि
मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट को फिर से चालू करने में एक निजी कंपनी ने दिलचस्पी दिखायी है। इस सिलिसले में एयरपोर्ट अथॉरिटी और निजी कंपनी के प्रतिनिधियों ने हवाई अड्डे का सर्वे किया है। टीम के साथ परिमापक और विशेषज्ञों का दल भी पहुंचा जिसने हवाई अड्डे की जमीन की मापी के साथ-साथ रनवे और सुरक्षा स्थिति का भी जायजा लिया।
एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारी अश्विनी एस ठाकरे के नेतृत्व में अधिकारियों व कंपनी प्रतिनिधियों की टीम ने पताही हवाई अड्डे का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद बताया कि सरकारी रिकार्ड के अनुसार इसकी जमीन 101 एकड़ है, जबकि इसका रनवे एक किमी लम्बा है। हवाई अड्डे की चहारदीवारी में सुधार की जरूरत है। विशेषज्ञों की टीम ने इस दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोल की स्थापना के संबंध में सुझाव दिया। बताया कि पास में नेपाल सीमा होने के कारण यह रेड जोन में स्थित है, इसलिए इसकी सुरक्षा की जवाबदेही केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों को देना श्रेयष्कर होगा। इसके साथ ही टीम ने हवाई पट्टी के पूरे क्षेत्रफल के विस्तार की संभावना पर भी रिपोर्ट तैयार की, जो एयरपोर्ट अथॉरिटी के माध्यम से मंत्रालय को सौंपी जाएगी।
पताही हवाई अड्डे के लिए 101 एकड़ जमीन का अधिग्रहण 1953 में किया गया। यहां पहली विमान सेवा एयरलाइंस ने 1971 में शुरू की। सबसे पहले पटना-मुजफ्फरपुर-काठमांडू के लिए यहां से हवाई सेवा की शुरुआत हुई। यह प्रयोग असफल होने के बाद बीजू पटनायक की कंपनी कलिंगा एयर ने यहां से अपनी सेवा देनी शुरू की, लेकिन कुछ साल चलने के बाद यह सेवा भी बंद हो गई।
1977 में खुला था फ्लाइंग इंस्टीट्यूट
वर्ष 1977 में वायु सेना के रिटायर अधिकारी सीतामढ़ी के कैप्टन श्रीनिवास व रघुनाथ पांडेय ने यहां फ्लाइंग इंस्टीट्यूट खोला। इस दौरान यहां से पटना के लिए हवाई सेवा शुरू की गई और पायलटों को प्रशिक्षण भी दिया जाने लगा। एक प्रशिक्षु की गलती से एक विमान नारसन झील में गिर गया और यह फ्लाइंग क्लब भी बंद हो गया। इसके बाद इस हवाई पट्टी का इस्तेमाल केवल बाढ़ सहायता कार्य व वीआईपी मूवमेंट में ही होता रहा। इस दौरान स्प्रिट एयरवेज व पवन हंस कंपनी ने भी यहां से हवाई सेवा शुरू करने में दिलचस्पी दिखायी, लेकिन उनकी बात नहीं बनी।




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