Love guru professor Matuknath Chaudhary arrives in St Augustine in Trinidad and Tobago to bring his Julie back to Patna जूली को लाने सात समंदर पार पहुंचे लवगुरु मटुकनाथ, बोले- जल्द ही होंगे साथ, Bihar Hindi News - Hindustan
More

जूली को लाने सात समंदर पार पहुंचे लवगुरु मटुकनाथ, बोले- जल्द ही होंगे साथ

लवगुरु मटुकनाथ अपनी जूली को लाने सात समुंदर पार पहुंच गए हैं। जल्द ही वे जूली को लेकर पटना लौटेंगे। प्रो. मटुकनाथ ने 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में बताया कि पिछले दिनों जूली के एक संदेश ने...

Mon, 16 March 2020 09:17 AMMalay Ojha पटना,| चंदन द्विवेदी,
share
जूली को लाने सात समंदर पार पहुंचे लवगुरु मटुकनाथ, बोले- जल्द ही होंगे साथ

लवगुरु मटुकनाथ अपनी जूली को लाने सात समुंदर पार पहुंच गए हैं। जल्द ही वे जूली को लेकर पटना लौटेंगे। प्रो. मटुकनाथ ने 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में बताया कि पिछले दिनों जूली के एक संदेश ने उन्हें त्रिनिदाद एंड टोबैगो के सेंटगस्टीन तक पहुंचा दिया। सात मार्च को वहां पहुंचकर उन्होंने बताया कि वे जल्द ही जूली को लेकर पटना लौटेंगे। जूली पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगी।

लवगुरु ने कहा कि गृहस्थ से होकर ही संन्यास तक का रास्ता जाता है। इसके विपरीत जूली बिना गृहस्थ आश्रम जिए संन्यास की ओर चल पड़ीं। उनके स्वास्थ्य खराब होने की यह सबसे बड़ी वजह रहीं। जूली फिर से गृहस्थ आश्रम में जीवन जीना चाहती हैं और इस वजह से उन्होंने पटना वापस लाने का संदेश भेजा था। 

प्रो. मटुक नाथ ने बताया कि दरअसल जूली का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य खराब चल रहा था। मीडिया में जूली को उनके हाल पर छोड़ने की खबरों का खंडन करते हुए प्रो. मटुकनाथ ने कहा कि उनके प्रति शत्रु भाव रखने वाले लोगों ने ऐसा प्रचारित करने की कोशिश की लेकिन जूली को वापस लाने पर उनका जवाब उन्हें मिल जाएगा। वे अपने शुभचिंतकों को बताना चाहते हैं कि जूली अब चल-फिर रही हैं। खाना-पीना सामान्य हो चुका है और जल्द ही पटना में रहकर स्वास्थ्य लाभ करेंगी। 

जूली के भीतर वैराग्य का भाव 2014 से ही दिखने लगा था, उन्हें छोड़ा नहीं था

यादों के पन्ने पलटते हुए प्रो. मटुकनाथ ने कहा कि जूली को उन्होंने छोड़ा नहीं था बल्कि वे उनकी निजी स्वतंत्रता के समर्थक थे। लवगुरु ने बताया कि जूली के भीतर वैराग्य का भाव 2014 से ही दिखने लगा था। वे भजनों पर नृत्य करती थीं और चिंतन-मनन में लीन रहती थीं। वर्ष 2016 तक वे आध्यात्मिक वातावरण में डूबने के लिए पटना से कभी-कभार वृंदावन, होशियारपुर व बाकी धर्मस्थलों पर जाया करती थीं। वैराग्य की ओर जूली का झुकाव उन्होंने वर्ष 2016 के आरंभ में देखा। उन्होंने जूली को सलाह दी कि वो चाहें तो निश्चिंत भाव से वैराग्य जी सकती हैं। बकौल प्रो. मटुकनाथ, जूली के मानसिक स्वास्थ्य पर वर्ष 2016 के बाद ही असर होना शुरू हुआ। 

पहले संपर्क में रहीं, अचानक फोन आना हो गया था बंद 

जूली पटना से मटुकनाथ का घर छोड़कर ईश्वर में ध्यान लगाने वृंदावन समेत दर्जनों जगहों पर भ्रमण करती रहीं। प्रो. मटुकनाथ ने बताया कि इस बीच वे फोन के जरिए संपर्क में भी रहीं लेकिन अचानक  जूली का फोन आना बंद हो गया। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि वे अस्वस्थ हालत में त्रिनिदाद एंड टोबैगो पहुंच गई हैं। वे किसी को जीवित बुद्ध मानने लगी थीं और उनका अनुसरण करते हुए यहां इस हालत तक पहुंच गईं।  

लेटेस्ट Hindi News और Bihar News के साथ-साथ Patna News, Muzaffarpur News, Bhagalpur News और अन्य बड़े शहरों की ताज़ा खबरें हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।