CAG Report: कई विभागों ने नहीं दि 87 हजार करोड़ खर्च का हिसाब, वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने खोला राज
सबसे अधिक 26 हजार 692 करोड़ का उपयोगिता प्रमाणपत्र शिक्षा विभाग का बकाया है। वहीं, पंचायती राज का 25 हजार 842 करोड़, नगर विकास एवं आवास विभाग का 12 हजार 204 करोड़ का हिसाब देना बाकी है।

भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने 31 मार्च, 2023 तक की अपनी रिपोर्ट में विभिन्न विभागों द्वारा उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा नहीं करने का मामला प्रकाश में लाया है। इसमें साफ कहा गया है कि 31 मार्च, 2023 तक 87 हजार 947 करोड़ का उपयोगित प्रमाणपत्र नहीं मिला है। वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को विधानसभा में भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक (सीएजी) से प्राप्त 31 मार्च 2022 और 31 मार्च 2023 तक के विभिन्न प्रतिवेदन सदन के पटल पर रखा। रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे अधिक 26 हजार 692 करोड़ का उपयोगिता प्रमाणपत्र शिक्षा विभाग का बकाया है। वहीं, पंचायती राज का 25 हजार 842 करोड़, नगर विकास एवं आवास विभाग का 12 हजार 204 करोड़, स्वास्थ्य विभाग का 4994 करोड़, ग्रामीण विकास विभाग का 4233 करोड़, समाज कल्याण विभाग का 3627 करोड़, कृषि विभाग का 2222 करोड़ शामिल है।
31 तक खर्च की गई राशि का हिसाब नहीं दिया तो कार्रवाई
12वीं और 13वीं वित्त आयोग सहित विभिन्न मदों से मिली राशि खर्च का हिसाब 31 जुलाई तक नहीं देने वाले पंचायती राज पदाधिकारियों पर कार्रवाई होगी। इस संबंध में पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव मिहिर सिंह ने गुरुवार को 11 जिलों के डीएम को पत्र भेजा है। इसमें अरवल, बेगूसराय, दरभंगा, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, कैमूर, पटना, शिवहर, सारण और सीतामढ़ी के जिलाधिकारी शामिल हैं। पत्र में कहा गया है कि विभिन्न मदों से दी गई राशि खर्च और बची हुई राशि का हिसाब नहीं दिया जा रहा है। बार-बार निर्देश के बाद भी इन जिलों से रिपोर्ट नहीं मिल रही है।
यहां से रिपोर्ट आने के बाद भी राशि की उपयोगिता प्रमाण पत्र महालेखाकार को उपलब्ध कराना है। महालेखाकार को 2003-4 से 2021-22 तक लगभग 25 हजार करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र दिया जाना है। इन जिलों के डीएम से कहा गया है कि 31 जुलाई तक रिपोर्ट नहीं देने वाले जिला पंचायत पदाधिकारियों और अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण पूछते हुए कार्रवाई करें। इसमें प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी और पंचायत सचिवों से भी स्पष्टीकरण पूछ कर कार्रवाई के लिए कहा है।




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