stink bug threat hits bihar litchi farmers crops damaged task force formed for protection बिहार के लीची किसानों पर मंडराया नया खतरा, फसल तबाह कर रहा आक्रामक 'स्टिंक बग', बचाव के लिए टास्क फोर्स गठित, Bihar Hindi News - Hindustan
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बिहार के लीची किसानों पर मंडराया नया खतरा, फसल तबाह कर रहा आक्रामक 'स्टिंक बग', बचाव के लिए टास्क फोर्स गठित

Bihar Top News: बिहार में लीची की फसल पर खतरनाक 'लीची स्टिंक बग' का प्रकोप दिखने से किसानों में चिंता है। फसल को बचाने के लिए वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टास्क फोर्स गठित की गई है।

Sat, 16 May 2026 12:14 PMJayendra Pandey हिन्दुस्तान, वरीय संवाददाता, भागलपुर
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बिहार के लीची किसानों पर मंडराया नया खतरा, फसल तबाह कर रहा आक्रामक 'स्टिंक बग', बचाव के लिए टास्क फोर्स गठित

Bihar Top News: बिहार में अपने मीठे स्वाद के लिए मशहूर लीची की खेती करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है। राज्य में लीची की फसल पर एक बेहद खतरनाक और आक्रामक कीट 'लीची स्टिंक बग' का प्रकोप मंडराने लगा है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर के वैज्ञानिकों ने लीची के पेड़ों पर इस जानलेवा कीट के प्रकोप को चिह्नित किया है। इस कीट के हमले से लीची की पूरी फसल के बर्बाद होने की आशंका पैदा हो गई है, जिससे किसानों की टेंशन काफी बढ़ गई है।

बचाव के लिए बनी टास्क फोर्स

किसानों की इस गंभीर समस्या को देखते हुए कृषि विभाग तुरंत अलर्ट मोड में आ गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन लीची, BAU-सबौर और राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को मिलाकर एक 'संयुक्त तकनीकी टास्क फोर्स' का गठन किया गया है। इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य लीची के बागों का वैज्ञानिक सर्विलांस, जियो-रेफरेंस्ड मॉनिटरिंग और समेकित कीट प्रबंधन (IPM) की प्रभावी रणनीतियां विकसित करना है। BAU सबौर के डॉ. तारक नाथ गोस्वामी को इसका अहम सदस्य नामित किया गया है।

रस चूसकर फसल को कर रहा पूरी तरह तबाह

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह 'लीची स्टिंक बग' फसल के लिए बेहद घातक है। इस कीट के निम्फ और ऐडल्ट दोनों ही अवस्थाएं पौधों को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। ये कीट लीची की कोमल शाखाओं, पुष्प गुच्छों और विकसित हो रहे फलों से रस चूसकर उन्हें सुखा देते हैं। इसके हमले से कोमल टहनियां सूखने लगती हैं, पुष्प मंजरियां झुलस जाती हैं, समय से पहले फल टूटकर गिरने लगते हैं और फलों की सतह पर काले धब्बे बन जाते हैं। इससे उपज और गुणवत्ता में भारी कमी आती है।

कहलगांव और सबौर समेत कई इलाकों में सघन निगरानी

BAU के कुलपति के अनुसार, लीची उत्पादन प्रणाली और उसकी निर्यात क्षमता को सुरक्षित रखने के लिए लगातार वैज्ञानिक निगरानी रखी जा रही है। डॉ. एके सिंह और डॉ. किरण कुमारी के मार्गदर्शन में लीची उत्पादक क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है। विशेष रूप से BAU-सबौर परिसर, कहलगांव, पन्नूचक, मामलखा, तिनटंगा, गंगानगर, बुद्धूचक और शांति कॉलोनी जैसे प्रमुख इलाकों में कीट की निगरानी का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है।

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