अयोध्या की तर्ज पर सीतामढ़ी के पुनौराधाम का होगा विकास, संशोधन अध्यादेश का गजट जारी
सीतामढ़ी के पुनौराधाम को अध्योध्या की तर्ज पर विकसित किए जाने को लेकर राज्य सरकार ने बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 में संशोधन किया है। श्रद्धालुओं की भावना और पर्यटन के विकास की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए मौजूदा पुनौराधाम को रामायण सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है।

मां सीता की जन्मस्थली सीतामढ़ी के पुनौराधाम को अध्योध्या की तर्ज पर विकसित किए जाने को लेकर राज्य सरकार ने बिहार हिंदू धार्मिक न्यास अधिनियम 1950 में संशोधन किया है। इस संशोधन को अध्यादेश के माध्यम से तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। अधिनियम में संशोधन के बाद अब राज्य सरकार सीतामढ़ी के पुनौराधाम मंदिर के विकास के लिए योजना बना सकेगी। इसमें इसकी भूमि और सभी परिसंपत्तियों का प्रशासन भी शामिल है। अध्यादेश लागू होने के बाद पुनौराधाम मंदिर की वर्तमान न्यास समिति भंग मानी जायेगी।
विधि विभाग की ओर से जारी अध्यादेश के गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक धार्मिक न्यास अधिनियम की धारा 32 में संशोधन करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि पुनौराधाम मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का धार्मिक व पर्यटन आकर्षण बनाने के लिए अब राज्य सरकार योजना बना सकेगी। इसके लिए वह भूमि और सभी परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर सकेगी। विकास योजना के प्रशासन के लिए प्रतिष्ठित व्यक्तियों की समिति गठित की जायेगी।
न्यास समिति तत्काल प्रभाव से भंग हो गयी है, लेकिन न्यास के विद्यमान महंथ को राज्य सरकार द्वारा गठित की जाने वाली समिति में शामिल किया जायेगा। न्यास के सभी कर्मचारी अनुशासनात्मक कार्रवाई सहित समिति के पूर्ण नियंत्रण के अधीन रहते हुए न्यास की सेवा करते रहेंगे।
मां सीता की जन्मस्थली होने की वजह से सीतामढ़ी के पुनौराधाम का विशेष धार्मिक और पर्यटकीय महत्व है। अयोध्या और पुनौराधाम के बीच सीधा संपर्क है। श्रद्धालुओं की भावना और पर्यटन के विकास की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए मौजूदा पुनौराधाम को रामायण सर्किट के रूप में विकसित किया जा रहा है। बिहार सरकार ने पुनौराधाम को अयोध्या धाम के अनुरूप विकसित करने की योजना बनाई है।




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