Sadar Hospital s Conditions Deteriorate Despite Health Department Efforts सदर अस्पताल: पीकू वार्ड के पास जमा बायो वेस्ट से संकट में शिशुओं की जान, Samastipur Hindi News - Hindustan
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सदर अस्पताल: पीकू वार्ड के पास जमा बायो वेस्ट से संकट में शिशुओं की जान

सदर अस्पताल की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। मरीजों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। चिकित्सकों की कमी और साफ-सफाई की अव्यवस्था के कारण मरीज निराश लौट रहे हैं। महिला ओपीडी और बच्चों के लिए अलग ओपीडी की कमी से भी समस्याएं बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सुधार का आश्वासन दिया है।

Fri, 20 March 2026 10:51 PMNewswrap हिन्दुस्तान, समस्तीपुर
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सदर अस्पताल: पीकू वार्ड के पास जमा बायो वेस्ट से संकट में शिशुओं की जान

लाख कोशिशों के बावजूद सदर अस्पताल की हालत सुधर नहीं पा रही है। स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद यहां मरीजों को मूलभूत सुविधाएं तक मिलने में परेशानी हो रही हैं। स्थानीय स्तर पर इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को हर दिन कई तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है। इसे लेकर करीब तीन माह पूर्व भी इस मुद्दा को उठाया गया था। अधिकारियों ने जल्द ही इन समस्याओं के निदान की बात कही थी। बावजूद जो समस्याएं थी उसका दस फीसदी निदान भी नहीं हो सका। सदर अस्पताल में प्रतिदिन करीब एक हजार से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन सुविधा के अभाव में अधिकतर को निराश लौटना पड़ता है।

अस्पताल आने वाले लोगों को अब बीमारियों से निजात नहीं, बल्कि संक्रमण के खतरे से डर लगा रहता है। पीकू वार्ड के पास बायो मेडिकल वेस्ट हफ्तों तक जमा रहता है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से इस पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है। इन्हीं सब मुद्दों को लेकर ‘बोले हिन्दुस्तान’ से संवाद के दौरान लोगों ने इससे होने वाली समस्याओं व उसके समाधान को लेकर अपनी-अपनी बात रखी। साथ ही इसके निदान पर भी चर्चा की गई। फातमा तबसूम ने कहा कि सदर अस्पताल में इस समय केवल सामान्य पुरुष और महिला ओपीडी और इमरजेंसी विभाग ही नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं। हड्डी रोग, सर्जन ओपीडी या तो साप्ताहिक रूप से चल रहे हैं या बिल्कुल भी नहीं। हड्डी ओपीडी नाम मात्र का किसी तरह संचालित होता है, जबकि सर्जन ओपीडी की स्थिति भी ठीक नहीं है।इन विभागों में प्रतिदिन मरीज आते हैं, लेकिन चिकित्सकों की नहीं रहने के कारण उन्हें बिना इलाज के लौटना पड़ता है। मंजू कुमारी कहती है कि महिला ओपीडी की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। महिला चिकित्सक प्राय: 11 बजे के बाद आती हैं और 1-2 घंटे में ही ओपीडी छोड़ देती हैं। ऐसे में सैकड़ों महिलाएं लंबी प्रतीक्षा के बावजूद बिना इलाज के लौट जाती हैं। ग्रामीण इलाकों से आने वाली महिलाओं को अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।लोगों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि अबतक सदर अस्पताल में बेहतर सुविधा में बच्चों के लिए अलग से ओपीडी शुरू नहीं की गई है। गंभीर बच्चों के लिए नवजात देखभाल केंद्र (एसएनसीयू) मौजूद है, लेकिन सामान्य बीमार बच्चों को देखने वाला कोई नहीं है। पूजा, ललिता देवी कहतीं है कि अलग-अलग बीमारियों से पीड़ित इन मरीजों की पीड़ा तब और बढ़ जाती है, जब उन्हें जरूरी सुविधाएं नहीं मिलती हैं। लंबी लाइन में लगकर पर्ची कटवाने और फिर ओपीडी के बाहर बैठकर अपनी बारी आने को घंटों इंतजार करना होता है। यदि डॉक्टर ने देखने और दवा लिखने के साथ कुछ जांच लिख दी तो इनकी समस्या काफी बढ़ जाती है। जांच के लिए मरीजों को अगले दिन फिर आना पड़ता है। दवा लेने के लिए भी उन्हें लोगों की लंबी कतार में खड़ा होकर घंटों इंतजार करना पड़ता है।

बोले जिम्मेदार:--- नये एमसीएच बिल्डिंग का उद्घाटन हो चुका है। भवन में जगह देखकर दवा काउंटर को वहीं शिफ्ट किया जाएगा। अस्पताल में लगभग सभी दवाओं का स्टॉक है। साफ-सफाई को लेकर विशेष ख्याल रखा जा रहा है। अगर कर्मी की लापरवाही से वार्ड में बेड चेंज नहीं किया जा रहा है तो उसपर कारवाई की जाएगी।-डॉ. गिरीश, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल समस्तीपुर

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