बांस और पेड़ों के सहारे बिजली की व्यवस्था, खतरे के साये में जिंदगी
जिले में बिजली कनेक्शन तो उपलब्ध हैं, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण उपभोक्ता परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग बांस और लकड़ी के सहारे तार खींचकर कनेक्शन पहुंचा रहे हैं। सुरक्षा की चिंता और लो वोल्टेज की समस्या भी बनी हुई है। यदि सुधार नहीं हुआ, तो ग्रामीण आंदोलन करने की चेतावनी दे रहे हैं।

जिले में लोगों को बिजली कनेक्शन तो उपलब्ध करा दिया गया है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण उपभोक्ता लगातार परेशान हैं। शहर में व्यस्त रास्तों के ऊपर से बिजली के तार गुजरने के कारण अक्सर लोगों आशंकित रहते हैं। दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र में कई जगहों पर बिजली विभाग ने खंभों के सहारे बिजली के सर्विस वायर दौड़ा दिये हैं। नतीजतन, उपभोक्ता खुद बांस व लकड़ी के सहारे तार खींचकर घरों तक कनेक्शन पहुंचाने को मजबूर हैं। शहर के नये वार्ड में बांस व पेड़ के सहारे बिजली लोगों के घरों तक पहुंची है तो रोसड़ा के मोहिउद्दीननगर पश्चिम व चकथात पूरब पंचायत के मब्बी, चांदचौर, खैरा व गोविंदपुर गांव के मोहल्लों में चार-पांच सौ मीटर तक बिजली तार बांस के सहारे लटकते हुए देखा जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग जब कनेक्शन उपलब्ध कराता है, तो यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि तार को सुरक्षित तरीके से घर तक पहुंचाने की व्यवस्था हो। लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं देता। कृषि कार्य के लिए मिले बिजली कनेक्शन की स्थिति तो और भी बदतर है। खैरा निवासी उपभोक्ता संतोष कुमार ने बताया कि उन्होंने वर्षों पहले कृषि कनेक्शन लिया था, लेकिन आज तक उनके खेतों तक विभाग द्वारा पोल नहीं पहुंचाया गया। मजबूर होकर उन्होंने बांस के सहारे खेतों तक तार खींच रखा है। यह व्यवस्था न केवल असुरक्षित है, बल्कि किसी भी समय गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। खैरा के ग्रामीण अनिल कुमार महतो, अमरजीत, हरिनारायण, रामदेव महतो आदि ने बताया कि गांव में बने आंगनबाड़ी केंद्र की छत से होकर 11 हजार वोल्ट का हाइटेंशन तार गुजर रहा है। इससे बच्चों और ग्रामीणों की सुरक्षा पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। स्थानीय लोग बार-बार आवेदन देकर विभागीय अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक को स्थिति से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुधार नहीं हुआ। इन इलाकों में लो वोल्टेज की समस्या भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि दिन-रात बिजली तो आती है, लेकिन वोल्टेज इतना कम रहता है कि पंखा, कूलर या मोटर पंप तक नहीं चल पाते। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही बिजली विभाग ने पक्के खंभे गाड़कर तार को सुरक्षित ढंग से लगाने की व्यवस्था नहीं की, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे। बिजली विभाग और ठेकेदार कर रहे अनदेखी : लोगों का कहना है कि जब भी इस बारे में विभाग से शिकायत की जाती है तो सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। ग्रामीणों ने बताया कि अधिकारियों से संपर्क करने पर अक्सर कहा जाता है कि कंपनी के ठेकेदार से बात करें। वहीं ठेकेदार का कहना है कि काम विभागीय आदेश से ही होता है, इसके लिए सहायक या कार्यपालक अभियंता से संपर्क किया जाए। इस तरह विभाग और ठेकेदार के बीच फेंकाफेकी का खेल चलता रहता है। इस स्थिति से उपभोक्ता खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
बोले जिममेदार-
बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं के निदान को लेकर गांव-गांव में पहल करने को कहा गया है। उपभोक्ताओं की जो भी समस्याएं हैं, प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन करना है। खासकर किसानों को बेहतर सुविधा मिले इसको लेकर अविलंब उपाय करने को कहा गया है। कई जगहों पर समस्या का समाधान भी हुआ है। वहीं, अन्य जगहों पर कार्य जारी है।
-रोशन कुशवाहा, डीएम
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