दर्द: पंपों पर 14 घंटे की ड्यूटी व उपेक्षा के बीच पिस रही कर्मियों की जिंदगी
पेट्रोल पंपकर्मियों को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। लंबे घंटे, आराम की कमी, और स्वास्थ्य समस्याएं सामान्य हैं। उन्हें बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। रात के समय सुरक्षा की कमी के कारण वे अपराधियों का आसान शिकार बनते हैं।

ट्रोल पंप पर तैनात पंपकर्मियों को आमतौर पर नोजलमैन या सेल्समैन कहा जाता है। पेट्रोल-डीजल की बिक्री में इनकी भूमिका बेहद अहम है। खासकर लेकिन इनके काम का स्वरूप और परिस्थितियां ऐसी हैं, जो अक्सर किसी के भी ध्यान में नहीं आतीं। इन कर्मियों की मेहनत, उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव और उनकी जीवनशैली को लेकर पेट्रोल पंप पर तैनात कर्मियों की समस्याओं का निदान जरूरी है। उनकी स्थिति में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। इनमें से कुछ कर्मचारी नियमित होते हैं, जबकि अधिकांश को दिहाड़ी पर काम करने के लिए नियुक्त किया जाता है। वे न केवल पेट्रोल या डीजल भरते हैं, बल्कि ग्राहकों से संबंधित अन्य कार्य भी करते हैं।
इन कर्मियों के काम के घंटों की लंबी शिफ्ट होती है और उनका कार्य स्थल सड़क के किनारे होता है, जहां मौसम के अनुसार उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इन कर्मचारियों का काम बहुत कठिन है। सर्दी, गर्मी, और बारिश में उनका काम चल रहा होता है। उन्हें आराम करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता है और कई बार उनका स्वास्थ्य भी खराब हो जाता है। इसलिए साप्ताहिक अवकाश मिलना चाहिए। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी भी देखी जाती है।काम ज्यादा और आराम कम : पेट्रोल पंपकर्मियों का कहना है कि उनका ज्यादातर समय खड़े होकर काम करने में जाता है। अधिकतर पंपों पर उन्हें आराम करने का मौका बहुत कम मिलता है। इससे न केवल उनका शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। वे अक्सर 12-14 घंटे तक काम करते हैं और सप्ताह में एक दिन की छुट्टी भी उन्हें नहीं मिलती है। पेट्रोल पंप पर काम करने के दौरान गर्मी, सर्दी और बारिश का असर सीधे कर्मचारियों पर पड़ता है। गर्मी में जहां एक ओर अधिक काम करने से पसीने की समस्या होती है, वहीं सर्दियों में ठंड के कारण उनका शारीरिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। बारिश में तो काम करना और भी कठिन हो जाता है क्योकि पानी में भींगेते हुए काम करना उनकी सेहत पर भारी पड़ता है। कर्मियों का कहना है कि लगातार खड़े रहकर काम करने से पैरों में सूजन, कमर दर्द, और अन्य शारीरिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव भी एक बड़ी समस्या है। इन्हें बीमा जैसी सुविधा भी नहीं मिलती है। पेट्रोल पंप कर्मियों को सप्ताह में कम से कम एक दिन का अवकाश मिलना चाहिए। इससे उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। साथ ही वह अपने परिवार के साथ भी समय बीता कर मानसिक तनाव की स्थिति में भी नहीं पड़ेंगे। इसके अलावा पेट्रोल पंपों पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही सभी पेट्रोल पंपों पर आराम करने के लिए एक रेस्ट रूम या विश्राम कक्ष की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके अलावा पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों के साथ विवाद होना आम बात है। लेकिन वे कुछ नहीं कह सकते क्योंकि उन्हें अपनी नौकरी बचानी होती है। ग्राहक कभी पेट्रोल की मात्रा को लेकर तो कभी कीमतों को लेकर असंतुष्ट रहते हैं। ऐसे में नोजलमैनों को इन विवादों का सामना करना पड़ता है और कभी-कभी यह उनके मानसिक तनाव का कारण बनता है। इसके अलावा पंपों पर काम करते वक्त अक्सर ग्राहकों का व्यवहार भी आक्रामक हो सकता है, जिससे कर्मचारियों को मानसिक पीड़ा होती है। सुरक्षा के लिहाज से पेट्रोल पंप कर्मियों को भी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई बार पंपों पर पर्याप्त सुरक्षा उपायों की कमी होती है। रात के समय पेट्रोल पंप अपराधियों और लुटेरों के सबसे आसान टारगेट बन जाते हैं। अकेले या सीमित स्टाफ के साथ काम करने वाले कर्मचारी अक्सर बदमाशों और लुटेरों के हमले का शिकार बनते हैं। पेट्रोल पंप कर्मचारियों की जान हर समय खतरे में बनी रहती है। इस गंभीर समस्या के बावजूद पेट्रोल पंपों की सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस उपाय नहीं किए गए हैं, जिससे कर्मचारियों में भय और असुरक्षा की भावना बनी रहती है।
बोले जिम्मेदार-
सभी पेट्रोल पंप पर शिकायत रजिस्टर रखना अनिवार्य है। इसकी जांच हर माह की जाती है। पंप पर कार्यरत कर्मी या ग्राहक अपनी शिकायत इसमें लिख सकते हैं। पंप पर काम कर रहे कर्मी को अगर कोई शिकायत है तो इसकी लिखित सूचना वो कार्यालय अवधि में दे सकते हैं।
-दिलीप कुमार, सदर, एसडीओ
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