राजद MLC डॉ. सुनील सिंह की सदस्यता बिहार विधान परिषद में बहाल, नहीं होगा 7 महीने का भुगतान
- सदन में इसकी घोषणा के क्रम में सभापति ने कहा कि हालांकि, उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार डॉ. सुनील सिंह के सदस्यता नही रहने के दौरान की सात माह की अवधि के लिए कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। सभापति ने उम्मीद जतायी कि वे सदन की मर्यादा का मान रखेंगे।

बिहार विधानमंडल की कार्यवाही लगातार जारी है। बुधवार को राष्ट्रीय जनता दल के लिए एक अच्छी खबर आई है। राजद के एमएलसी डॉ. सुनील कुमार सिंह की सदस्यता विधान परिषद में बहाल कर दी गई है। हालांकि, 7 महीने तक सदस्य नहीं रहने के दौरान इस अवधि का कोई भुगतान उन्हें नहीं किया जाएगा। बिहार विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होने पर सभापति अवधेश नारायण सिंह ने राजद के डॉ सुनील कुमार सिंह की सदस्यता पुनः बहाल किये जाने की घोषणा की।
सदन में इसकी घोषणा के क्रम में उन्होंने कहा कि हालांकि, उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार उन्हें सदस्यता नही रहने के दौरान की सात माह की अवधि के लिए कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। सभापति ने उम्मीद जतायी कि वे सदन की मर्यादा का मान रखेंगे।
डॉ. सुनील कुमार सिंह की सदस्यता बहाल किये जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने स्वागत किया। उन्होंने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद और अपनी पार्टी की ओर से इसके लिए सभापति के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता सुनील सिंह ने उच्चतम न्यायालय के उनकी बिहार विधान परिषद की सदस्यता बहाल किए जाने पर खुशी जताई थी और इसे न्याय की जीत करार दिया था। डॉ सुनील सिंह ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर उनकी सदस्यता समाप्त कर दी गई थी, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण था।
उच्चतम न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंगलवार को सुनील सिंह ने कहा, “मैंने सदन में युवाओं, किसानों, गरीबों और वंचितों के मुद्दे उठाए थे। मैंने मुख्यमंत्री को 'पलटू राम' कहा, जो कोई गलत बात नहीं थी, क्योंकि उनके बार-बार राजनीतिक 'यू-टर्न' लेने के कारण गूगल भी उन्हें 'पलटू राम' कहकर पहचानता है।”
राजद नेता ने लगाए थे यह आरोप
राजद नेता ने यह भी आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री की आलोचना करना ही उनकी बर्खास्तगी का कारण बना जबकि राजद के एक अन्य विधान परिषद सदस्य मोहम्मद कारी सोहैब को सिर्फ दो दिनों के लिए निलंबित किया गया, क्योंकि उन्होंने समिति के सामने माफी मांग ली थी।
उल्लेखनीय है कि 13 फरवरी 2024 को सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस के दौरान सुनील सिंह ने मुख्यमंत्री की नकल की और उन्हें 'पलटू राम' कहा। उनके आचारण के लिए आचार समिति ने उन्हें कई बार नोटिस भेजा लेकिन सुनील सिंह ने न माफी मांगी और न ही समिति के समक्ष उपस्थित हुए। इसके बाद उनकी विधान परिषद की सदस्यता समाप्त कर दी गई, जिसे उन्होंने अदालत में चुनौती दी। अब उच्चतम न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनकी सदस्यता बहाल कर दी है।




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