Weather Impact on Maize Farmers in Purnea Rain and Price Drop Challenges धूप निकलने से लोगों को राहत, खेतों में मक्का निकालने में जुटे किसान, Purnia Hindi News - Hindustan
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धूप निकलने से लोगों को राहत, खेतों में मक्का निकालने में जुटे किसान

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता पूर्णिया में गुरुवार को मौसम शुष्क बना रहा। सुबह से धूप खिलने के कारण लोगों को लगातार हो रही बारिश से राहत मिली।

Thu, 7 May 2026 09:59 PMNewswrap हिन्दुस्तान, पूर्णिया
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धूप निकलने से लोगों को राहत, खेतों में मक्का निकालने में जुटे किसान

पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। पूर्णिया में गुरुवार को मौसम शुष्क बना रहा। सुबह से धूप खिलने के कारण लोगों को लगातार हो रही बारिश से राहत मिली। धूप निकलने से शहर के कई गली-मोहल्लों में जमा पानी सूखने लगा, जिससे लोगों ने राहत महसूस की। बारिश थमने और मौसम साफ होने से किसानों को भी काफी राहत मिली है। किसान खेतों में बारिश से प्रभावित हो रही मक्का फसल की कटाई, तैयारी और सुखाने के कार्य में तेजी से जुट गए हैं। हालांकि कई खेतों में अब भी पानी जमा रहने के कारण किसानों को मक्का निकालने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद किसान फसल बचाने में लगे हुए हैं। दिनभर आसमान में बादल छाए रहने के कारण धूप और छांव का सिलसिला बना रहा। गुरुवार को अधिकतम तापमान 30.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 20.8 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार 8 और 9 मई के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 10 मई से मौसम साफ रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

बारिश और गिरती कीमतों ने बढ़ाई मक्का किसानों की परेशानी

फोटो-07purn03-पूर्णिया पूर्व प्रखंड क्षेत्र में वारिश के पानी में डूबी मक्का की फसलें।

पूर्णिया पूर्व, संवाददाता। पिछले दो सप्ताह से लगातार रुक-रुक कर हो रही तेज हवा और बारिश ने मक्का किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जिस तरह खेत और खलिहानों में मक्का सड़ने लगी है, ठीक उसी तरह किसानों की स्थिति भी दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। पूर्णिया पूर्व प्रखंड क्षेत्र के लगभग सभी पंचायतों में किसान परेशान नजर आ रहे हैं। कहीं खेतों में लगी मक्का की फसल पानी में डूबकर सड़ रही है तो कहीं खलिहानों में रखी मक्का नमी के कारण खराब हो रही है। दूसरी ओर मक्का की कीमतों में आई भारी गिरावट ने किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। मोतीनगर के कृषक घनश्याम मेहता, चांदी कठवा के उज्ज्वल मेहता, गौरा के अरविंद यादव तथा मझुआ के हीरा चौहान और प्रदीप चौहान समेत कई किसानों ने बताया कि इस बार बेमौसम बारिश के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में लगी मक्का की फसल लगातार पानी और नमी के कारण सड़ रही है। वहीं खलिहानों में रखी मक्का भी धूप नहीं मिलने से खराब हो रही है। किसानों ने बताया कि मक्का की कीमतों में भारी गिरावट आने से लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई पर हुए खर्च के बावजूद उचित मूल्य नहीं मिलने से किसान मायूस हैं। किसानों ने सरकार से मक्का खरीद की समुचित व्यवस्था करने तथा प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता देने की मांग की है। बताते चले कि सरकार ने मक्का का समर्थन मूल्य 24 सौ रूपा प्रति क्विंटल किया है। लेकिन किसानो कि मक्का 18 सौ से 19 सौ रूपया प्रति क्विंटल खरीद कि जा रही है।

लगातार बारिश ने मक्का किसानों के अरमानों पर फेरा पानी

फोटो-07purn17-लगातार बारिश के कारण धमदाहा में बर्बाद हुई मक्का फसल।

धमदाहा, एक संवाददाता। पिछले दस दिनों से हर दूसरे दिन तेज हवा के साथ हो रही बारिश ने इलाके के मक्का किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों की सबसे प्रमुख नकदी फसल मक्का यानी पीला सोना बुरी तरह प्रभावित हुई है। खासकर अक्टूबर प्लांट की फसल, जिसकी बुआई 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच की गई थी, सबसे अधिक नुकसान की चपेट में आ गई है। गौरतलब है कि पिछले डेढ़ दशक से इस क्षेत्र में मक्का किसानों की प्रमुख नकदी फसलें रही है और यही फसल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का मुख्य आधार मानी जाती रही है। किसानों ने बताया कि कटाई के बाद खलिहान में सुखाने के लिए रखी गई मक्का लगातार बारिश के कारण भीग गई। इससे न केवल दानों की गुणवत्ता में भारी गिरावट आई है, बल्कि करीब 30 प्रतिशत दाने अंकुरित भी हो गए हैं। मक्का के रंग और गुणवत्ता खराब होने से किसानों को बाजार में उचित मूल्य मिलने की उम्मीद भी कम हो गई है। ऐसे में किसानों के लिए लागत निकालना भी चुनौती बन गया है। बारिश का असर खेतों में खड़ी दूसरी चरण की मक्का फसल पर भी पड़ा है। तेज हवा और पानी के कारण कई खेतों में फसल जमीन पर गिर गई है। किसानों का कहना है कि गिरे हुए पौधों को दोबारा खड़ा कर उपजाऊ बनाना बेहद कठिन काम साबित हो रहा है। अधिक फसल बर्बाद होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। कृषि विभाग फिलहाल 20 मार्च 2026 को आए आंधी-तूफान से हुए नुकसान का आकलन प्राप्त आवेदनों के आधार पर कर रहा है। विभाग 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान वाले किसानों के आवेदनों को अनुमोदित करने की प्रक्रिया में जुटा है। लेकिन इसके बाद लगातार हुई बारिश ने किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। इस संबंध में अवधेश कुमार ने बताया कि हाल के दिनों में हुई बारिश से मक्का फसल के नुकसान का अलग से आकलन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि खलिहान में रखी फसल में पानी लगने से दानों में नमी बढ़ गई है, जिससे गुणवत्ता और रंग प्रभावित होगा तथा अंकुरण होने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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