मौसम की मार और सस्ते दाम से हरी सब्जी की खेती घाटे में
मीरगंज क्षेत्र में हरी सब्जियों की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। खीरा, मिर्च और लौकी की खेती करने वाले किसान मौसम की अनियमितता और मंडियों में गिरते दामों से परेशान हैं। लागत बढ़ने के बावजूद सब्जियों के दाम घट रहे हैं, जिससे कई किसानों के लिए फसल काटना भी मुश्किल हो गया है।

मीरगंज, एक संवाददाता। मीरगंज क्षेत्र में इस बार हरी सब्जियों की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। खासकर खीरा, मिर्च और लौकी की खेती करने वाले किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। बदलते मौसम और मंडियों में गिरते दामों ने उनकी परेशानियां बढ़ा दी हैं। पिछले कुछ दिनों से मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। कभी तेज धूप और गर्मी तो कभी अचानक बारिश ने खीरा, टमाटर, मिर्च, लौकी और भिंडी जैसी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। इसके साथ ही कीटों के बढ़ते प्रकोप से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुए हैं। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बाजार में सब्जियों के दाम गिरते जा रहे हैं।
एक बीघा में खीरा की खेती पर 30 से 40 हजार रुपये तक खर्च आता है, लेकिन इस बार आमदनी लागत तक भी नहीं पहुंच पा रही है। हालात यह हैं कि कई किसानों के लिए फसल तोड़ने और बाजार तक पहुंचाने का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय मंडियों में अधिक आवक के कारण व्यापारी कम कीमत पर ही खरीदारी कर रहे हैं। ऐसे में मौसम और बाजार की दोहरी मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है और उनकी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
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