बिहार की निर्भया के लिए दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, नीट छात्रा मौत की जांच पर उठाए सवाल
पटना के हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा के कथित रेप और हत्याकांड के मामले में दिल्ली के जंतर-मंतर पर रविवार को धरना-प्रदर्शन हुआ। इस दौरान छात्रा के परिजन, कई छात्र संगठन और सामाजिक कराय्कर्ता शामिल हुए।

बिहार के जहानाबाद जिले की 17 वर्षीय नीट छात्रा की पटना में मौत का मामला अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक गूंजने लगा है। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर रविवार को नीट छात्रा के कथित रेप और मर्डर केस के मामले में धरना प्रदर्शन किया गया। इस दौरान छात्र संगठनों के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ताओं समेत कई लोग मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने 'बिहार की निर्भया' के लिए न्याय की मांग की। साथ ही पटना पुलिस, बिहार एसटीएफ की जांच पर भी सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने खुले मंच से एक स्वर में इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि एक जघन्य अपराध बताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस प्रदर्शन में शामिल होने के लिए छात्रा के परिजन के अलावा बिहार के विभिन्न जिले से भी बड़ी संख्या में लोग दिल्ली पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मृतका नाबालिग और पॉक्सो कानून के अंतर्गत संरक्षित थी, इसके बावजूद शुरू से ही मामले को दबाने और भटकाने का सुनियोजित प्रयास किया गया। पटना के हॉस्टल प्रबंधन, निजी अस्पतालों और स्थानीय पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए।
प्रदर्शन के दौरान जांच पर कई सवाल उठाए गए। इनमें प्रमख रूप से मृतका 17 वर्ष की नाबालिग थी, फिर भी एफआईआर में उसकी उम्र 18 वर्ष दर्ज की गई। माता-पिता को समय पर सूचना नहीं दी गई। सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय निजी अस्पतालों में घुमाया गया। अपराध स्थल (छात्रावास) को सील नहीं किया गया। मरने से पहले पीड़िता द्वारा कहा गया वाक्य “मेरे साथ बहुत भयानक हुआ है” को गंभीरता से दर्ज नहीं किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई बाहरी एवं आंतरिक चोटों, शारीरिक हिंसा और जबरन यौन उत्पीड़न की आशंका दर्ज है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में मृतका के वस्त्रों पर वीर्य की उपस्थिति पाई गई, जिससे आत्महत्या की थ्योरी पूरी तरह खारिज हो जाती है। वक्ताओं ने एसआईटी और सीबीआई जांच पर असंतोष व्यक्त किया।
जनदबाव के बाद गठित एसआईटी को अविश्वसनीय बताते हुए कहा गया कि वहीं अधिकारी जांच में शामिल रहे जिनकी भूमिका पहले से संदेह के घेरे में रही है। सीबीआई जांच को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जांच समयबद्ध, स्वतंत्र और सार्वजनिक निगरानी में की जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह मामला केवल एक छात्रा का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता और मिलीभगत को उजागर करता है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि हर बेटी की सुरक्षा और न्याय के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि न्याय में देरी और लीपापोती जारी रही, तो यह आंदोलन देशव्यापी जनआंदोलन का रूप लेगा। जब तक बिहार की निर्भया को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आवाज उठती रहेगी।




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