'पेंशन पाने वाले लोग कोई आपदा नहीं', तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी को याद दिलाया संविधान का अनुच्छेद 267
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को संविधान का अनुच्छेद 267 याद दिलाते हुए बिहार सरकार द्वारा पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिक फंड से 3662 करोड़ रुपये की निकासी पर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे पर वह लगातार एनडीए सरकार के खिलाफ आक्रामक नजर आ रहे हैं।

बिहार की सम्राट सरकार द्वारा सामाजिक सुरक्षा पेंशन देने के लिए आकस्मिक निधि से 3662 करोड़ रुपये की निकासी पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव हमलावर हैं। अब तेजस्वी ने सम्राट चौधरी को नौसिखिया मुख्यमंत्री बताकर बिहार की वित्तीय स्थिति को बदतर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 267 का हवाला देते हुए सरकार से सवाल किया कि ऐसी क्या विचित्र परिस्थिति पैदा हो गई, जो हर महीने दी जाने वाली पेंशन जैसे सामान्य एवं नियमित खर्च के लिए आकस्मिक निधि का उपयोग करना पड़ रहा है?
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने कहा, 'सरकार में बैठे लोगों को आकस्मिकता निधि के संबंध में सर्वप्रथम संविधान के अनुच्छेद 267 (1) और (2) में दिए गए प्रावधानों को देखना चाहिए। इसके अनुसार, सामान्य और नियमित मामलों में आकस्मिक फंड का इस्तेमाल नहीं करना है। बल्कि राज्य में अचानक आए किसी संकट से निपटने के लिए राज्यपाल इस निधि से अग्रिम राशि को जारी करने की मंजूरी दे सकते हैं।'
पेंशन आकस्मिक फंड से तो दूसरी योजनाओं का पैसा कहां से- तेजस्वी
तेजस्वी ने सम्राट सरकार से सवाल किया है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन जो दशकों से नियमित तरीके से हर महीने लाभार्थियों के खाते में जाती रही है, अब बिना व्यवस्था परिवर्तन ऐसी क्या अलग वित्तीय परिस्थिति पैदा हो गई कि पेंशन देने के लिए आकस्मिक फंड का उपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को सामान्य और नियमित खर्च के लिए भी आकस्मिक निधि का उपयोग करना पड़ रहा है तो फिर विकास कार्यों और अन्य परियोजनाओं के लिए धनराशि कहां से आएगी?
पेंशन धारक आपदा नहीं...
उन्होंने पूछा कि क्या पेंशन कोई आकस्मिक खर्च है? तेजस्वी ने आगे कहा, 'पेंशन धारक और बुजुर्ग एवं माता-बहनें आपदा नहीं हो सकते, जिनके लिए आपको आपदा राशि से भुगतान करना पड़े। सरकार इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की जगह मामले को भ्रमित करने का प्रयास कर ही है। बिहार सरकार द्वारा इसे बजटीय प्रबंधन मात्र बताकर इसके सैद्धांतिक पक्ष और मूल कारण को बताने से बचने की कोशिश की गई है। सरकार की आर्थिक स्थिति दयनीय है इसलिए सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार करने से डर रहे हैं।'
बिहार में 3 से 5 गुना ज्यादा है राजकोषीय घाटा- तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार के वित्तीय हालात पर जो संकेत आ रहे हैं, वो चिंताजनक हैं। उन्होंने इस साल के बजट भाषण का हवाला देते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा 11.8 प्रतिशत के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया था। जबकि राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के तहत राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए। मगर बिहार में 3 से 5 गुना तक अधिक हो रहा है।




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