खुली सीमा गंभीर चुनौती, नेपाल और बांग्लादेश से घुसना आसान; अमित शाह के दौरे से बड़ी उम्मीदें
बांग्लादेशी-रोहिंग्या, पाकिस्तान समेत अन्य देशों के कट़्टरपंथी विचारधारा वाले सीमा पर खेत, झाड़, नदियों और पगडंडियों के जरिए नेपाल के रास्ते हमारे देश में घुस जाते हैं। सीमा से सटे बिहार के सात जिलों में एक-सा आलम है।

विदेशी घुसपैठ के खात्मे पर मंथन के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बिहार में हैं इस बीच भारत और नेपाल की खुली सीमा की चर्चा जोरों पर है। यह इलाका घुसपैठियों का आसान टारगेट अरसे से बना हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों की तमाम कवायद को ये कहीं न कहीं धता बता ही देते हैं। न सिर्फ बांग्लादेशी-रोहिंग्या बल्कि पाकिस्तान समेत अन्य देशों के कट़्टरपंथी विचारधारा वाले सीमा पर खेत, झाड़, नदियों और पगडंडियों के जरिए बरास्ता नेपाल हमारे देश में घुस जाते हैं। सीमा से लगते बिहार के सभी सात जिलों में एक-सा आलम है। आए दिन घुसपैठिए पकड़ में आते रहते हैं।
इसी साल 1 जनवरी को रक्सौल के मैत्री पुल पर तीन बांग्लादेशियों शाहिनुर रहमान, मो. सबुज और मो. फिरोज को फर्जी भारतीय वीजा के साथ पकड़ा गया। भारतीय नागरिक सरफराज अंसारी इन्हें मदद दे रहा था। इसी साल 10 जनवरी को श्रीलंकाई नागरिक मो. हनिफ केरल निवासी कानोथ रसीद के साथ धरा गया। रक्सौल इमिग्रेशन चेकपोस्ट पर 2025 में अमेरिका, चीन, कनाडा, कोरिया, नाइजीरिया, सूडान और यूएई के 16 विदेशी नागरिक बिना वैध दस्तावेज घुसने की कोशिश करते पकड़े गए। सितंबर 2025 में पकड़े गए 4 सूडानी और एक बोलिवियाई नागरिक के पास उर्दू में लिखे संदिग्ध कोड और मानचित्र मिले।
वर्ष 2013 में इंडियन मुजाहिदीन के सरगना यासीन भटकल और असदुल्ला अख्तर को रक्सौल से दबोचा गया था। 2018 में सिमी के दो सदस्य मो. कुरैशी और मो. अजीज भी इसी क्षेत्र से पकड़े गए। 2025 में यहां से कनाडाई नागरिक हरप्रीत की गिरफ्तारी हुई। सीमावर्ती इलाके के शहरों से लेकर गांव तक में अब सैकड़ों की संख्या में मुहल्ले बस गए हैं जिन्हें पहचानना मुश्किल हो रहा है। पूर्णिया में रिफ्यूजी कॉलोनी, किशनगंज में उस्मान टोला, जहांगीर टोला, अररिया में भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में कई संदिग्ध लोगों के नाम से मुहल्ले गुलजार हो गए हैं। अररिया जिला के बसमतिया गांव निवासी समाजसेवी अशोक कुमार कहते हैं कि नो मैंस लैंड के आस पास लगातार अतिक्रमण हो रहा है। अचानक कई कच्चे घर रातों रात बन जा रहे है। फिर किसी मुहल्ले का नाम दे दिया जाता है।
क्या कहते हैं अधिकारी?
बॉर्डर पर थर्ड कंट्री नागरिक को देखते ही सख्त कार्रवाई की जाती है। हाल के दिनों में अररिया, सुपौल, किशनगंज के इलाकों से लगातार बांग्लादेशी समेत अन्य देशों के नागरिक पकड़े जा रहे हैं। -नीतीश कुमार कुमार उल्लवल, एसएसबी, आईजी, पटना ।
इन रास्तों से आसानी से प्रवेश कर रहें घुसपैठिए
अररिया, सुपौल और किशनगंज जिले के सीमाई इलाकों में स्थित बीओपी के टीम लीडर की मानें तो अररिया के जोगबनी, फुलकाहा और सुपौल के पास खुली सीमा से घुसपैठिए रात के समय प्रवेश करते हैं। रक्सौल, जयनगर और बैरगनिया जैसे चेकपोस्ट के आसपास के नो मैन्स लैंड का उपयोग कर विदेशी नागरिक आसानी से भारतीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं।
पांच साल में नेपाल सीमा से पकड़े गए विदेशी नागरिक
वर्ष गिरफ्तार विदेशी मुख्य देश
2021 30 - 45 नेपाल, चीन, बांग्लादेश, अमेरिका
2022 108 भारत नेपाल की ओर से, चीन, बांग्लादेश
2023 60 - 75 उज्बेकिस्तान, सूडान, म्यांमार, रूस, चीन, अमेरिका
2024 55 - 70 बांग्लादेश, चीन, इराक, पाकिस्तान
2025 16 अमेरिका, कनाडा, चीन, कोरिया, नाइजीरिया, सूडान
2026 05 (अबतक) बांग्लादेश, म्यांमार
वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद जमे हैं
किशनगंज निवासी समाजसेवी रंजन कुमार बताते हैं कि सीमाई इलाकों में लंबे समय से खेती गृहस्थी करने वाले सैकड़ों लोगों का नाम वोटर लिस्ट से इस बार कट गया है। इसके बावजूद अभी तक कहीं नहीं गए हैं। दोबारा वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए प्रयास में जुटे हैं। सुरजापुरी या मैथिली की जगह एक मिश्रित लहजा हावी हो रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई लोग जो पहले खेती-मजदूरी के लिए बाहर गए थे। वे रिश्तेदारों के रूप में नए लोगों को लेकर लौट रहे हैं।




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