70 हजार करोड़ का घोटाला नहीं हुआ, बिहार सरकार ने CAG रिपोर्ट को सामान्य प्रक्रिया बताया
बिहार सरकार ने साल 2023-24 की सीएजी रिपोर्ट में 70 हजार करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब दिया है। वित्त विभाग ने इसे घोटाला या धांधली मानने से इनकार कर दिया और कहा कि यह सामान्य प्रक्रिया है।

बिहार सरकार ने नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (सीएजी) यानी कैग की रिपोर्ट में 70 हजार करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र को लेकर चल रही आशंकाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने इसे घोटाला मानने से इनकार कर दिया है। वित्त विभाग के प्रधान सचिव आनंद किशोर ने मंगलवार को प्रेस वार्ता में कहा कि यह कोई गबन या वित्तीय गड़बड़ी का मामला नहीं है। यह अकाउंटिंग की सामान्य प्रक्रिया है जो सभी राज्यों में लागू होती है।
विभाग के अनुसार बिहार विधान मंडल में पिछले दिनों प्रस्तुत हुई इस रिपोर्ट को अब पब्लिक अकाउंट कमिटी को भेजा जाएगा। इस कमेटी के समक्ष वित्त सहित संबंधित विभागों के लोग अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद अंतिम प्रतिवेदन सरकार के समक्ष पेश किया जाएगा और सरकार उस पर एक्शन लेगी।
प्रधान सचिव ने बताया कि पिछले पांच सालों में इस बार सबसे कम राशि का यूसी बिल लंबित है। लंबित बिल के मुकाबले हर साल इसका निष्पादन भी किया जाता है। 2022-23 में 1,09,093 करोड़ के यूसी बिल का समायोजन किया गया। सीएजी रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद भी अब तक 51750 करोड़ रुपये के यूसी बिल का समायोजन किया जा चुका है।
बता दें कि डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने हालिया मॉनसून सत्र में वित्तीय वर्ष 2023-24 की सीएजी रिपोर्ट को विधानसभा में पेश किया था। इसमें बिहार के महालेखाकार ने कहा था कि 70877 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) समय पर नहीं आया, इससे सरकारी फंड को उस योजना पर खर्च किया गया या नहीं, यह कहना मुश्किल है।




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