Nitish supported Wakf bill after JDU 5 suggestions accepted says Muslim leaders जेडीयू के 5 सुझाव माने तब नीतीश ने वक्फ बिल पर समर्थन दिया, मुस्लिम नेताओं ने संभाला मोर्चा, Bihar Hindi News - Hindustan
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जेडीयू के 5 सुझाव माने तब नीतीश ने वक्फ बिल पर समर्थन दिया, मुस्लिम नेताओं ने संभाला मोर्चा

जेडीयू के मुस्लिम नेताओं ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वक्फ बिल पर समर्थन के बाद पार्टी में बगावत की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। हालांकि, इस पीसी में कुछ नेता बीच में ही उठकर चले गए।

Sat, 5 April 2025 02:32 PMJayesh Jetawat हिन्दुस्तान, पटना
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जेडीयू के 5 सुझाव माने तब नीतीश ने वक्फ बिल पर समर्थन दिया, मुस्लिम नेताओं ने संभाला मोर्चा

वक्फ बिल के संसद से पारित होने के बाद बिहार की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में मचे घमासान पर पार्टी ने संशय दूर किया है। जेडीयू के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने कहा कि वक्फ बिल पर नीतीश के पांच सुझाव माने गए, तब जाकर पार्टी ने इस पर अपना समर्थन दिया। जेडीयू के मुस्लिम नेताओं ने शनिवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी में बगावत को लेकर चल रहीं सभी अटकलों को दूर कर दिया। इस पीसी में एमएलसी गुलाम गौस और पूर्व सांसद अहमद अशफाक करीम जैसे नेता भी मौजूद रहे, जिन्होंने पिछले दिनों वक्फ बिल का खुलकर विरोध किया था। हालांकि, उन्होंने पीसी में कुछ नहीं बोला।

जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी और प्रवक्ता अंजुम आरा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुस्लिम समाज के उत्थान के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। नीतीश के रहते अल्पसंख्यक समाज के हितों की रक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं कर सकता है। दोनों नेताओं ने कहा कि वक्फ संशोधन बिल को लेकर हमारी पार्टी ने पांच सुझाव दिए थे, सभी मान लिए गए।

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शनिवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेडीयू के तीन एमएलसी एवं दो पूर्व सांसद भी मौजूद रहे। मगर किसी ने अपना विचार नहीं रखा। प्रेस कांफ्रेंस के बीच में ही वह सभी उठकर चले गए। इनमें एमएलसी अफाक अहमद खान, गुलाम गौस के अलावा पूर्व सांसद अहमद अशफाक करीम, परवीन साहिबा समेत अन्य नेता मौजूद रहे।

जेडीयू ने दिए थे ये 5 सुझाव

पहला सुझाव था कि जमीन राज्य का मामला है, इस पर कोई छेड़छाड़ न की जाए। दूसरा यह कि वक्फ बिल को पूर्व प्रभावी तरीके से यानी पिछली डेट में लागू नहीं किया जाए। तीसरा, वक्फ की गैर-पंजीकृत संपत्ति जिस पर कोई दरगाह, ईदगाह, कब्रिस्तान या कोई अन्य धार्मिक भवन बना हुआ है, उससे कोई छेड़छाड़ न की जाए। चौथा, वक्फ संपत्ति से जुड़े विवादों के निराकरण के लिए डीएम से ऊपर के अधिकारी को अधिकृत किया जाए। पांचवां, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा को 6 महीने से बढ़ाया जाए।

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