निशांत बोले- पिता की तरह जीतूंगा बिहार वालों का दिल, पैतृक गांव में नीतीश के बेटे का जोरदार स्वागत
राजनीति में कदम रखने के बाद पहली बार पैतृक गांव कल्याण बिगहा पहुंचे नीतीश कुमार के बेटे निशांत का जोरदार स्वागत हुआ। निशांत ने कहा कि वह अपने पिता की तरह बिहार वासियों का दिल जीतेंगे।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार जदयू की औपचारिक सदस्यता ग्रहण करने के बाद गुरुवार को पहली बार नालंदा जिले के हरनौत स्थित अपने पैतृक गांव कल्याण बिगहा पहुंचे। राजनीति में कदम रखने के बाद अपने गांव की इस पहली यात्रा को लेकर ग्रामीणों और पार्टी कार्यकर्ताओं में गजब का उत्साह देखा गया। अपने युवा नेता की महज एक झलक पाने के लिए लोग लंबी कतारों में खड़े रहे।
गांव पहुंचने पर निशांत कुमार ने सबसे पहले देवी स्थान मंदिर जाकर पूरे विधि विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे सीधे कविराज रामलखन सिंह स्मृति वाटिका पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी माता स्व. मंजु देवी, दादा कविराज रामलखन सिंह और दादी स्व. परमेश्वरी देवी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किया। इससे पहले उन्होंने गांव में बने शूटिंग रेंज का भी मुआयना किया और वहां की व्यवस्था देखी। इस दौरान ‘लक्ष्य ’भेदने को ‘निशाना’ भी लगाया।
भावुक अपील कर मांगा ग्रामीणों का साथ:
स्मृति वाटिका में नमन करने के बाद निशांत अपने पैतृक आवास पर गए। इस दौरान उनके साथ इस्लामपुर के विधायक रोहेल रंजन और चेतन आनंद समेत सैकड़ों की संख्या में जदयू के समर्थक व ग्रामीण मौजूद रहे। निशांत ने गांव की महिलाओं और बड़े-बुजुर्गों से मिलकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। ग्रामीणों से बात करते हुए उन्होंने भावुक अपील की और कहा कि आप सभी लोग मेरा साथ दें ताकि मैं अपने पिता के देखे गए सपनों और उनके अधूरे कामों को पूरा कर सकूं।
निशांत के समर्थन में नारेबाजी
इस दौरान उत्साहित समर्थकों ने ‘बिहार का मुख्यमंत्री ने कैसा हो, निशांत कुमार जैसा हो...’ और ‘युवा नेता निशांत कुमार जिंदाबाद...’ के जमकर नारे लगाए। इससे पूरे गांव का माहौल ऊर्जामय हो गया।
पिता की तरह जीतूंगा बिहार वालों का दिल:
दौरे के बीच पत्रकारों से बातचीत करते हुए निशांत कुमार ने अपने भविष्य के राजनीतिक दूरदर्शी विजन को स्पष्ट किया। कहा कि उनके पिता नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में बिहार के विकास के लिए जो भी ऐतिहासिक काम किए हैं। वे उस विकास यात्रा को और आगे बढ़ाएंगे। निशांत ने दृढ़ता से कहा कि उनकी पूरी कोशिश होगी कि जिस तरह उनके पिता ने जीवन भर जनता की निस्वार्थ सेवा की उसी तरह वे भी बिहार के लोगों के लिए काम कर उनका दिल जीत सकें।
अभिवादन पाकर दिखे गदगद:
गांव के हर वर्ग के लोगों से मिलते हुए निशांत काफी खुश और सहज नजर आए। उन्होंने बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों से हाथ मिलाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। ग्रामीणों के अपार स्नेह पर खुशी जताते हुए उन्होंने कहा कि आज मैं यहां अपने लोगों का आशीर्वाद लेने आया हूं और मुझे सभी का भरपूर प्यार व आशीर्वाद मिल रहा है जो मेरे लिए बहुत बड़े सौभाग्य की बात है।
इस दौरान विधायक रोहेल रंजन, जदयू के राष्ट्रीय महासचिव ईं. सुनील कुमार, जिलाध्यक्ष मो. अरशद, प्रदुम्न कुमार, रंजीत कुमार, शैलेन्द्र सिंह, अवधेश कुमार सिंह, राजकिशोर सिंह कक्कू, रामप्रवेश, प्रखंड अध्यक्ष रविकान्त कुमार, पैक्स अध्यक्ष श्री राम, जदयू जिला उपाध्यक्ष अनिल कुमार, प्रखंड अनुसूचित जाति अध्यक्ष सतेंद्र पासवान, वीरेंद्र पासवान, रजनीश कुमार, चंदन सिंह, प्रशांत कुमार, सुजीत कुमार, पप्पू सिंह, विजय सिंह, शंभु पांडे, शंभू सिंह, प्रोफेसर धनंजय कुमार, सुधांशु सिंह, रोशन कुमार सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
निशांत ने चाची के पैर छुए
अपने पैतृक आवास पर निशांत ने करीब 20 मिनट का समय बिताया। यहां उन्होंने अपनी चाची के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। वहां मौजूद ग्रामीणों का दिल जीत लिया। चाची ने भी अपने भतीजे के सिर पर हाथ रखकर उसे उज्ज्वल भविष्य का आशीष दिया। उन्होंने एक परिपक्व राजनेता की तरह विजन साझा करते हुए कहा ‘मेरा उद्देश्य केवल पद नहीं, बल्कि सेवा है। पिताजी ने पिछले 20 वर्षों में बिहार के विकास का जो खाका खींचा है और राज्य को अंधेरे से निकालकर जो रोशनी दी है, उस विरासत को सहेजना और नई ऊंचाइयों तक ले जाना हम युवाओं की जिम्मेदारी है।’
ननिहाल पक्ष के लोगों ने अपने लाडले भांजे का तिलक लगाकर और फूलों की मालाओं से भव्य स्वागत किया। बुजुर्गों ने उन्हें दुआएं दीं, तो वहीं युवाओं में उनके साथ सेल्फी लेने की होड़ मची रही। हालांकि, सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी भीड़ के कारण कई स्थानीय लोग निशांत कुमार से सीधे नहीं मिल सके। इससे कुछ प्रशंसकों में थोड़ी निराशा भी देखी गई।
(रिपोर्ट- निज संवाददाता, हरनौत)




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