मौसम : मई में तापमान के सामान्य से नीचे रहने का 22 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
मुजफ्फरपुर में बारिश के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव जारी है। मई के पहले पखवाड़े में तापमान सामान्य से नीचे रहने का नया रिकॉर्ड बना है। अधिकतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस तक कम हो गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति किसानों के लिए समस्या बन सकती है।

मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। लगातार हो रही बारिश से जिले के तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर गुरुवार को भी जारी रहा। इस बीच अधिकतम के साथ न्यूनतम तापमान लगातार सामान्य से नीचे दर्ज होता रहा है। इस क्रम में मई के पहले पखवाड़े में तापमान के सामान्य से नीचे रहने का पिछले दो दशक का नया कीर्तिमान बन गया। इसके पहले वर्ष 2004 में मई में अधिकतम व न्यूनतम तापमान 10 दिनों तक सामान्य से नीचे बना रहा था। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष मई में अभी तक अधिकतम तापमान सामान्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस से लेकर 8 डिग्री सेल्सियस तक नीचे दर्ज किया जा चुका है। एक मई को अधिकतम तापमान सामान्य से 8 डिग्री नीचे दर्ज किया गया। 12 मई को अधिकतम तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस सामान्य से कम रहा, जो सामान्य से कम मामले में सबसे कम रहा। इसी तरह न्यूनतम तापमान भी 0.7 डिग्री सेल्सियस से लेकर 6.8 डिग्री के बीच सामान्य से नीचे झूलता रहा। 7 मई को यह सामान्य से सबसे कम 6.8 डिग्री सेल्सियस नीचे रहा। 12 मई को यह सामान्य से 0.7 डिग्री सेल्सियस कम था।
तापमान की स्थिति
इस बीच गुरुवार को सुबह से ही धूप खिली रही। बावजूद इसके अधिकतम तापमान के साथ ही न्यूनतम तापमान में कमी आई। अधिकतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस गिरकर सामान्य से 4.4 डिग्री नीचे 32.5 डिग्री सेल्सियस रहा। न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस कम होकर 19 डिग्री पर जा पहुंचा, जो सामान्य से 5.9 डिग्री सेल्सियस कम रहा।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
तापमान की ऐसी स्थिति को मौसम वैज्ञानिक जिले के बदले जलवायु परिवर्तन के तौर पर देख रहे हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में जिले के गिरते भूगर्भ जल के रिचार्ज होने में यह मददगार साबित हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक ऐसी स्थिति बने रहने का सर्वाधिक नुकसान किसानों को उठाना पड़ सकता है। इससे पूरा फसल चक्र प्रभावित हो सकता है। पूसा स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के वरीय वैज्ञानिक डॉ. ए. सत्तार ने इस साल हुई बारिश की स्थिति के कारण खरीफ फसल की बुआई प्रभावित होने की आशंका जताई।
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