सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल व्यवस्था नाकाफी, प्यास बुझाने को जद्दोजहद
मुजफ्फरपुर में भीषण गर्मी के दौरान प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल की व्यवस्था नाकाफी है। बैरिया बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट और सदर अस्पताल में पानी की कमी के चलते लोग बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन की अव्यवस्था के कारण हजारों मुसाफिरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। भीषण गर्मी में भी शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल की व्यवस्था नाकाफी है। ऐसे में आम लोगों को प्यास बुझाने के लिए बोतलबंद पानी का इंतजाम करना पड़ रहा या फिर दर-दर भटकना पड़ रहा है। बैरिया बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, कलेक्ट्रेट, सदर अस्पताल और इमलीचट्टी सरकारी बस स्टैंड में मंगलवार को हिन्दुस्तान टीम की पड़ताल में पानी की कमी और अव्यवस्था सामने आई है। सक्षम लोग तो बोतलबंद पानी खरीदकर अपनी गला तर कर लेते हैं, लेकिन लाचार और मजबूर को दो बूंद पानी के लिए भटकना पड़ता है।तीन नलों के भरोसे हजारों मुसाफिर और बसों के स्टाफबैरिया बस स्टैंड से उत्तर बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा लंबी दूरी की बसें चलती है।
इस कारण यहां प्रतिदिन हजारों मुसाफिरों का आना जाना होता है। यहां पूरे स्टैंड में महज तीन नलों के सहारे हजारों मुसाफिरों और बस स्टाफ की प्यास टिकी है। गंदगी और नाले के बीच लगे इन नलों पर ही लोग नहाने से लेकर पानी भरने तक को मजबूर हैं।मंगलवार की दोपहर बस कर्मी डिब्बे और बोतल लेकर पानी के लिए भागते दिखे। यही पानी पीने के लिए, नहाने के लिए और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इस्तेमाल हो रहा है। जो लोग यह पानी नहीं पीना चाहते, वे बोतलबंद पानी खरीदने को विवश हैं। रोजाना 20 हजार से ज्यादा लोगों की आवाजाही है, फिर भी नगर निगम या जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं।पानी के लिए भटक रहे बस स्टाफ रंजीत शर्मा, शिवशंकर पासवान, सोनू कुमार, दिलीप कुमार ने कहा कि यहां के लोग इसी हाल में जी रहे हैं। इस स्टैंड से प्रदेश के अमूमन सभी शहरों व दूसरे राज्यों के लिए भी बसें चला करती हैं। लिहाजा, रोजाना 20 हजार से अधिक लोगों की यहां आवाजाही रहती है। बहरहाल, बैरिया बस स्टैंड की यह हालत सिर्फ बदइंतजामी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे सिस्टम की नाकामी को दर्शाती है।नाले पर टूटा-फूटा नल, उसके ऊपर प्लास्टिक की टंकीइमलीचट्टी स्थित बस स्टैंड सरकारी होने के बावजूद यहां समुचित पेयजल व्यवस्था नदारद दिखी। बस स्टैंड में नाले पर टूटे-फूटे वाटर स्टैंड पोस्ट के ऊपर प्लास्टिक की टंकी लगी है, जिससे बदबूदार व गर्म पानी टपक रहा था। इस कारण मुसाफिरों को मजबूरी में दुकानों और बोतलबंद पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।वर्षों से बस चलाने वाले सुरसंड (सीतामढ़ी) के नूर मोहम्मद बताते हैं कि यहां पानी को लेकर रोजाना जूझना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि ब्रांडेड पानी के नाम पर डुप्लीकेट बोतलों की खुलेआम बिक्री हो रही है, जिससे पानी की शुद्धता पर भरोसा करना मुश्किल है। नाले के ऊपर एक निजी व्यक्ति द्वारा मिनरल वाटर टैंक लगाकर 5 रुपये प्रति लीटर पानी बेचा जा रहा है। साथ ही, ठेले पर मिलते-जुलते नाम से नकली ब्रांडेड पानी बेचकर कमाई की जा रही है। पूछने पर बताता है कि प्रशासन से उसे लाइसेंस मिला हुआ है। पूरे परिसर में खाली बोतलों का अंबार इस बदहाल व्यवस्था की गवाही देता है।चापाकल खराब, नलका के पास यूरिनल की बदबूकलेक्ट्रेट परिसर में भी पेयजल की व्यवस्था नाकाफी नजर आई। डीएम कार्यालय के पोर्टिको के ठीक सामने लगा हैंडपंप पिछले साल से खराब पड़ा है। हालांकि, इसके बगल में ही वाटर स्टैंड पोस्ट है जहां पेयजल के नल लगे हैं मगर उधर यूरिनल की गंदगी व बदबू से लोग पानी पीने जाने की जहमत नहीं उठाते हैं। लोग बताते हैं कि कलेक्ट्रेट में जहां वाटर कूलर लगे भी हैं वहां तक आम आदमी की पहुंच नहीं है। जहां से जिले की व्यवस्था संचालित होती है, वहीं भीषण गर्मी में पेयजलापूर्ति की ऐसी बदइंतजामी आश्चर्यजनक है। यहां सुदूरवर्ती गांवों से लेकर पूरे जिले से प्रतिदनि हजारों लोगों की आवाजाही होती है। अपनी समस्याओं को लेकर लोग फरियाद लगाने आते हैं और उनकी अर्जी पर सुनवाई के लिए घंटों इस कैंपस में इंतजार में गुजारना पड़ता है। मगर, पानी के दो घूंट के लिए दर-बदर भटकने की मजबूरी है। इससे लोगों की परेशानी है।चापाकल खराब, वाटर कूलर में लगा जंगसदर अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को पर्याप्त स्वच्छ पानी नहीं मिल पा रहा है। यहां कैंपस में तमाम चापाकल खराब पड़े हैं। अस्पताल गेट पर ही मारवाड़ी युवा मंच की ओर से वाटर स्टैंड पोस्ट लगा है जो गंदगी से बजबजा रहा है। उसमें का एकाध नल खराब है और एक टूटा हुआ है, जिसके चलते पानी सड़क पर बहकर बर्बाद हो रहा है। अस्पताल परिसर में ही सत्तू बेचने वाली रेखा देवी बताती हैं कि वहां का चापाकल लगभग 10 साल से खराब पड़ा है। चापाकल देखकर लोग पानी पीने को आते हैं, लेकिन निराश लौटता देख वह अपनी बाल्टी से पानी निकालकर उन लोगों को पिलाती हैं। इसी के आसपास लगा दूसरा चापाकल भी वर्षों से खराब है। वाटर कूलर जंग खाकर बर्बाद हो चले हैं।प्लेटफॉर्म पर राहत, सर्कुलेटिंग एरिया में पानी के लिए मशक्कतरेलवे स्टेशन पर पानी की सुविधा मौजूद है, लेकिन भीड़ के कारण लंबी कतारें लग रही हैं। कई वाटर कूलर काम नहीं कर रहे। रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में पेयजल के लिए लोग इधर-उधर भटकते दिखाई पड़े। सर्कुलेटिंग एरिया अभी नए सिरे से विकसित हो रहा है मगर इसी में एक जगह गंदगी से बजबजाते नाले के पास टूटा-फूटा एक नल दिखाई पड़ा, जिसपर यात्री लाइन लगाकर पानी भरते दिखे। दरअसल, जिन यात्रियों के पास प्लेटफार्म टिकट या यात्रा टिकट था, उन्हें तो किसी तरह पानी मिल जा रहा था, लेकिन अपने परिजनों को छोड़ने या लेने आने वालों के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं दिखा।परिजनों को छोड़ने आए करजा के अभिषेक प्यास से बेहाल होकर उसी नल से हाथ से पानी पीने को मजबूर दिखे। मंगराही बाजार की रीमा देवी और लक्ष्मी देवी ने आरोप लगाया कि आसपास के होटल वाले बिना कुछ खरीदे पानी नहीं देते। फुटपाथी दुकानदार अनिल गुप्ता ने बताया कि स्टेशन रोड के वाटर पोस्ट का नल पिछले साल से खराब पड़ा है।
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