आनंदबाग : साल के आठ महीने जलजमाव, बरसात में आवागमन को चलानी पड़ती नाव
मुजफ्फरपुर के आनंदबाग मोहल्ले में जलजमाव की समस्या से लोग परेशान हैं। Eight महीने तक पानी जमा रहने से लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं और हादसों का सामना कर रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और निकासी प्रबंधन की कमी से स्थिति और बिगड़ रही है।
मुजफ्फरपुर। नाम आनंदबाग, लेकिन मोहल्लेवासियों के जीवन में परेशानियां बेशुमार। जलजमाव की स्थायी समस्या से जीना दुश्वार। वार्ड 45 के इस मोहल्ले में साल के बारह महीनों में से आठ महीने जलजमाव की समस्या से जूझना लोगों की मजबूरी बन चुकी है। स्थिति दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है। यहां के लोगों में नगर निगम के साथ ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर नगर विधायक के प्रति भी काफी नाराजगी है। इनका कहना है कि बरसात सिर पर है, लेकिन पानी निकासी का ठोस प्रबंध नहीं हो पाया है। यही स्थिति रही तो इस बरसात भी नाव से ही मुख्य सड़क तक आवागमन करना पड़ेगा。
मोहल्ले का विकास
आनंदबाग मोहल्ले में दो दशक पहले तक करीब 50 के आसपास कच्चे-पक्के मकान बने थे, लेकिन आबादी के बढ़ते दबाव और शहरों में लोगों की रहने की ललक के साथ ही यहां मकानों की शृंखला खड़ी होती चली आ रही है। वर्तमान में करीब तीन सौ से अधिक मकान इस इलाके में बन चुके हैं। इनमें मिली-जुली सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान वाले लोग बसे हुए हैं। अधिकतर लोग सामान्य मध्यम परिवार से आते हैं। कहने के लिए नगर निगम का हिस्सा बन चुका यह मोहल्ला आज भी बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर है। सड़क और पेयजल की कमी से जूझ रहे इस मोहल्ले को लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता साल के आठ महीने जमा रहनेवाला पानी है। यह लोगों को न केवल जलजनित बीमारी से ग्रसित कर रहा है, बल्कि इसमें गिरकर लोग चोटिल हो रहे हैं। पिछले एक साल में आधा दर्जन लोग अपनी कमर या हाथ-पैर तुड़वा चुके हैं। बच्चों और बूढ़ों के साथ अक्सर हादसे होते रहते हैं।
स्थानीय लोगों की आवाज
आनंदबाग के राजन कुमार कहते हैं कि जब उनके मोहल्ले को नगर निगम में शामिल किया गया तो लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था। उममीद थी कि इलाके में शहरी सुविधाओं का विस्तार होगा। स्थितियां और बेहतर होंगी, लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। मोहल्ले की फूल कुमारी देवी, पानो देवी और उषा देवी ने बताया कि बेहतर होने की जगह यहां की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है। पिछले एक दशक से जलजमाव की समस्या मोहल्ले की स्थाई पहचान बन चुकी है। निचली भूमि होने के कारण हल्की बारिश होने पर भी जलजमाव हो जाता है। मानसून के समय तो पांच महीने पूरी तरह नाव ही मुख्य शहर से जुड़े रहने का सहारा बन जाता है। निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने के कारण पानी महीनों तक सड़ता रहता है, जिसके कारण दुर्गंध आती रहती है। जलजमाव के कारण सांप-बिच्छू का डर बना रहता है। मच्छरों की संख्या में वृद्धि से डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारी की आशंका बनी रहती है।
स्वास्थ्य और परिवहन की समस्याएं
घरों तक एंबुलेंस का पहुंचना मुश्किल
मोहल्ले में एक तो पक्की सड़क का अभाव है। जो कच्चा रास्ता है, उसमें भी हमेशा घुटने तक पानी जमा रहता है। इस कारण किसी भी वाहन का मोहल्ले मे आना संभव नहीं हो पाता है। मंजू देवी, वीणा देवी, शीला देवी व आकाश ने कहा कि किसी की तबीयत बिगड़ने पर उसे कंधे पर लादकर सौ से दौ मीटर की दूरी तय कर एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ता है। किसी की मृत्यु हो जाने पर शव को लादकर मुख्य मार्ग तक जाना पड़ता है। लोगों ने कहा कि हम अपनी मजबूरियों की जानकारी नगर आयुक्त से लेकर स्थानीय विधायक तक को लिखित में दे चुके हैं। कई बार मोहल्ले की दयनीय स्थिति का वीडियो बनाकर भी साझा किया गया है, लेकिन सभी जिम्मेवार जल्द हालात बदलने का आश्वासन देकर चले जाते हैं। खुद नगर आयुक्त के अलावा नगर निगम प्रशासन से जुड़े कई अधिकारी इलाके का भ्रमण कर जा चुके हैं। लेकिन, उनके स्तर से आज तक कुछ प्रयास होता नहीं दिखा है।
बच्चों की शिक्षा पर प्रभाव
स्कूल जाना हो जाता है बंद
मोहल्ले के मो. चांद, शैल देवी, इंदू देवी और गीता देवी ने बताया कि मानसून में जब पूरे इलाके में जलजमाव हो जाता है, तो सबसे अधिक नुकसान बच्चों की पढ़ाई का होता है। पूरे बरसात के मौसम में बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है। जलजमाव से सर्वाधिक परेशानी महिलाओं को ही उठानी पड़ती है, क्योंकि घर के पुरुष सदस्य तो अपने-अपने काम पर चले जाते हैं, लेकिन बच्चों को स्कूल छोड़ने से लेकर घरेलू जरूरतों के सामान की खरीदारी महिलाओं को ही करनी पड़ती है।
हादसों की कहानियाँ
कांति देवी की टूटी कमर, सालभर से इलाजरत
मोहल्ले की 70 वर्षीया कांति देवी ने बताया कि एक साल पहले वह अपने पोते को छोड़ने के लिए स्कूल जा रही थी। जलजमाव के कारण हुई फिसलन की वजह से उनका पैर फिसल गया। इसमें उनकी कमर की हड्डी दो जगहों से टूट गई। पिछले एक साल से वह इलाज करा रही हैं। बताया कि हड्डी टूटने के बाद अब पहले वाली ताकत नहीं रह गई है। अब भी अपने सामान्य कार्य को करने के लिए उनको घर के दूसरे सदस्य की मदद लेनी पड़ रही है। बताया कि उनके पति ने करीब 40 साल पहले शहर में जमीन का एक टुकड़ा खरीदा था। सोचा था कि शहर में सुकून से रहेंगे, लेकिन वर्तमान में जो हालात हैं, उससे बेहतर तो गांव ही था।
आउटलेट नहीं होने से नाला हो गया है जाम :
वार्ड-45 के पार्षद शिवशंकर महतो ने कहा कि जलजमाव से निजात के लिए दो साल पहले नाला बनवाया गया था, लेकिन उसका आउटलेट नहीं होने से नाला जाम हो गया है। पहले खाली जमीन रहने पर नाले का पानी चला जाता था, लेकिन अब काफी घर बन जाने से पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है। निगम प्रशासन को जानकारी देते हुए समाधान करने का आग्रह किया गया है।
नालों की सफाई का युद्धस्तर पर होगा काम :
मेयर निर्मला देवी ने बताया कि बरसात के मद्देनजर अधिकारियों को जलजमाव से निपटने के लिए नालों की सफाई का काम युद्धस्तर पर पूरा करने को कहा गया है। इससे संबंधित प्रगति रिपोर्ट को लेकर उप नगर आयुक्त को निर्देश दिया गया है। स्वच्छता कार्य से जुड़े निविदा पर भी जल्द से जल्द अंतिम निर्णय कर काम शुरू कराने का निर्देश दिया गया है।
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