प्रशासनिक गतिविधियों के केंद्र में सुविधाओं का अभाव, रोज 20 हजार लोग होते परेशान
मुजफ्फरपुर कलेक्ट्रेट परिसर में सार्वजनिक शौचालय, पेयजल और पार्किंग की गंभीर कमी है। यहां आने वाले हजारों लोग सुविधाओं के लिए समस्याओं का सामना कर रहे हैं। अधिकारियों ने जल्द ही सुधार करने का आश्वासन दिया है, लेकिन वास्तविकता जुदा है।
मुजफ्फरपुर। जिले का सबसे महत्वपूर्ण इलाका कलेक्ट्रेट परिसर। इस परिसर में हर दिन हजारों लोग विभिन्न कामों के सिलसिले में आते हैं। किसी को जमीन की रजिस्ट्री करानी होती है तो कोई ड्राइविंग लाइसेंस व वाहन पंजीकरण करने पहुंचता है। न्यायिक मामलों की तारीख लेने से लेकर विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए जिले के कोने-कोने से लोग इस परिसर में पहुंचते हैं। लेकिन, जिले के इस सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र में कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यहां आने वाले लोगों के लिए पर्याप्त सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध नहीं हैं। पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था भी नाकाफी है। परिणामस्वरूप, लोगों को शौचालय और पानी की तलाश में भटकना पड़ता है। गर्मी के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। यह स्थिति तब है जब इसी परिसर में जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय मौजूद हैं।
मुजफ्फरपुर कलेक्ट्रेट परिसर पूरे जिले की प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र है। इस परिसर में जिलाधिकारी, जिला विकास आयुक्त के अलावा, डीआईजी, सिटी एसपी, डीटीओ, रजिस्ट्री ऑफिस, दो एसडीओ कोर्ट सहित जिले के तमाम वरीय अधिकारियों के कार्यालय हैं। इसके बगल में प्रमंडलीय आयुक्त का कार्यालय भी है। यहां रोजाना 15 से 20 हजार लोग जरूरी कामों के लिए पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें सबसे बुनियादी सुविधाओं के लिए भटकना पड़ता है। इस परिसर में सार्वजनिक शौचालय और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। यहां काम के सिलसिले में आने वाले लोगों का कहना है कि वर्षों से समस्याएं बनी हुई हैं, लेकिन समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल होती नहीं दिखती। गाड़ी लेकर आने पर पार्किंग के नाम पर सड़क ही मिलती है।
शौचालय और पानी की कमी
अधिवक्ता कृपाशंकर सर्राफ कहते है कि हर दिन 100 से अधिक लोग परिसर में शौचालय के बारे में पूछते हैं। इसका उनके पास कोई जवाब नहीं होता है। कलेक्ट्रेट के कार्यालयों के अंदर जो शौचालय हैं उनका इस्तेमाल सिर्फ कर्मचारी करते हैं। बाहर वाले उसमें नहीं जा सकते। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों व बीमार लोगों को होती है। काम के लिए सिलसिले में कलेक्ट्रेट स्थित डीआईजी कार्यालय पहुंची स्मृति सिंह ने बताया कि परिसर में कहीं शौचालय की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में फरियादी महिलाओं को कई तरह की परेशानी होती है। वे कुछ बोल नहीं पातीं और शर्मसार होती हैं। यही नहीं, कलेक्ट्रेट परिसर में लोगों के बैठने के लिए शेड तक नहीं है। पेड़ के नीचे बैठकर अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ता है।
पेयजल बूथ की स्थिति
कलेक्ट्रेट परिसर में एक सार्वजनिक पेयजल बूथ की व्यवस्था है। लेकिन, वह सिर्फ खानापूर्ति भर है। इसके नलका से पानी बूंदों में टपकता है। अधिवक्ता अनुज निराला कहते हैं कि ज्यादातर चापाकल सूख चुके है। गर्मी में में लोगों को पेयजल बूथ से एक बोतल पानी भरने में 20 मिनट लग जाता है। यही नहीं, वाटर बूथ के आसपास गंदगी का अंबार लगा है। राहुल खन्ना का कहना है कि इस परिसर में आने वाले अधिकांश लोगों के हाथ में पानी की बोतल मिलती है। सरकारी परिसर में ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं है। लोगों को दुकान से 20 रुपये में पानी की बोतल खरीदनी पड़ती है। अंदर कोई सुविधा नहीं। बाहर से खरीद कर पानी पियो या प्यासे रहो।
फुटपाथी दुकानों की भरमार
कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी कैंटीन नहीं है। नतीजा परिसर में फुटपाथी दुकानों और ठेला-खोमचा की भरमार है। समोसा, चाय, पानी बेचने वाले ठेला लगा लेते हैं। पिंटू कुमार जो 10 साल से दुकान चला रहे हैं कहते हैं कि ऑफिस वाले भी यहीं चाय पीते हैं। कहा कि कलेक्ट्रेट आने वाले लोगों के लिए अधिकृत पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। गाड़ियां कलेक्ट्रेट परिसर की सड़कों पर लगाई जाती हैं। इससे अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है। जाम के कारण अधिकारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।
पार्किंग की समस्या
शिव शंकर प्रसाद उर्फ बबलू काम के सिलसिले में रोज कलेक्ट्रेट आते है। निजी एजेंसी के संचालक है। कहते हैं कि सुबह नौ बजे आओ तो पार्किंग के लिए जगह मिल जाएगी। 10 बजे के बाद सड़क किनारे भी पार्किंग नहीं मिलती है। कलेक्ट्रेट की सड़क के दोनों तरफ गाड़ियां खड़ी की जाती हैं। बीच में से एक गाड़ी निकल जाए तो गनीमत। संतोष कुमार, जो रजिस्ट्री ऑफिस आए थे, सुबह में 10 मिनट से अधिक समय तक जाम में फंसे रहे। सिटी एसपी ऑफिस के सामने भी अवैध पार्किंग है। निबंधन कार्यालय के पास भी पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। दो पहिया वाहन सड़क किनारे खड़े होते हैं।
ज्ञापन और आश्वासन
रमण कुमार बताते हैं कि परिसर स्थित निबंधन कार्यालय के पास कई अवैध दुकानें हैं। नगर थाना की पुलिस कई बार छापेमारी कर प्रतिबंधित सामग्री भी जब्त कर चुकी है। पुलिस छापा मारती है तो दो दिनों तक ये दुकानें बंद रहती हैं। इसके बाद फिर शुरू हो जाती हैं। सामाजिक संगठन से जुड़े कुमार सिद्धार्थ व आशीष अग्रवाल बताते हैं कि वर्ष 2025 में उन्होंने शौचालय, पार्किंग व पानी की पर्याप्त व्यवस्था करने के लिए डीएम व आयुक्त को ज्ञापन दिया था। आश्वासन मिला था कि टेंडर हो रहा है। पार्किंग भी बनेगी और शौचालय का भी निर्माण होगा। एक लंबा समय बीतने के बाद भी इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।
जिम्मेदार की प्रतिक्रिया
कलेक्ट्रेट परिसर में बहुत जल्द फरियादियों के लिए कैंटीन की व्यवस्था की जाएगी। इस दिशा में जिला प्रशासन की ओर से कार्य किया जा रहा है। अगले महीने में जीविका की ओर से दीदी की रसोई खुल सकती है। पार्किंग, शेड, शौचालय और पेयजल की व्यवस्था को दुरुस्त कराया जाएगा।
-तुषार कुमार, एसडीओ पूर्वी
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