32 हजार आबादी की परेशानी, बारिश होते घरों में घुस जाता है नाले का पानी
मुजफ्फरपुर के वार्ड संख्या 38 और 41 की 32 हजार से अधिक आबादी वर्षों से जलनिकासी की गंभीर समस्या का सामना कर रही है। हल्की बारिश में भी नालियों का गंदा पानी घरों में घुस जाता है।

मुजफ्फरपुर। नगर निगम के वार्ड संख्या 38 और 41 की करीब 32 हजार आबादी वर्षों से जलनिकासी की समस्या झेल रही है। हल्की बारिश में भी नालियों का गंदा पानी दोनों वार्ड के विभिन्न मोहल्लों के घरों में घुस जाता है। टूटी सड़कें और हमेशा रहने वाला जलजमाव लोगों के लिए रोजाना परेशानी का कारण बन रहे हैं। इन मोहल्लों की दर्जनभर से अधिक गलियों में साल में छह से आठ माह तक नाले का गंदा पानी जमा रहता है। शहर के इन इलाकों में आज भी न तो जलनिकासी के लिए नाला का निर्माण हो सका है न ही सड़कों को दुरुस्त किया जा सका है। नतीजतन जलजमाव, गंदगी और मच्छरों के प्रकोप से लोग बीमार पड़ रहे हैं, जबकि बच्चे पानी से भरी गलियों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था
वार्ड 38 और 41 के अंतर्गत आने वाले नकुलवा चौक, रामबाग, तिनपोखारिया, कालीबाड़ी, चतुर्भुज स्थान व आसपास के मोहल्लों के लोग वर्षों से जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था का दंश झेल रही है। इन मोहल्लों की धोबिया गली, जनार्दन प्रसाद-महेंद्र चौधरी गली, माई स्थान गली, रामबाग कालाजर अस्पताल रोड, चौधरी कंपाउंड, झुन्नी साह लेन, महावीर स्थान, नुनफर, कालीबाड़ी और विमल बाबा लेन की तंग गलियों में रहने वाले करीब दो हजार परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हैं।
जलजमाव की चिंता
सड़क और पेयजल की कमी से जूझ रहे इस मोहल्ले को लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता जलजमाव की है। साल में छह से आठ माह तक इन गलियों में पानी जमा रहता है। बरसात में स्थिति और भयावह हो जाती है। नाले का गंदा पानी लोगों के घर-आंगन तक पहुंच जाता है। इससे आने वाली बदबू व मच्छर के प्रकोप ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। लोगों ने इन समस्याओं के समाधान की मांग कई बार स्थानीय वार्ड पार्षद से लेकर अन्य जनप्रतिनिधियों तक से की। जिला प्रशासन से लेकर नगर निगम तक में आवेदन दिया। इसके बावजूद उनकी समस्या का समाधान अब तक नहीं हो सका।
हर बारिश लेकर आती है नई मुसीबत
रामबाग के धोबिया मोहल्ले की तंग गलियों में प्रवेश करते ही विकास के दावों और जमीनी हकीकत का अंतर साफ दिखाई देता है। यहां 100 से अधिक परिवार ऐसे हैं जिनके लिए हर बारिश नई मुसीबत लेकर आती है। हल्की बारिश होते ही नालियों का गंदा पानी घरों में घुस जाता है और चार से पांच दिनों तक जलभराव, दुर्गंध और गंदगी के बीच रहने की मजबूरी बनी रहती है। अमर कुमार बताते है कि बिना बारिश के भी यहां की नालियां उफनती रहती हैं। जगह-जगह टूटी सड़कें, बजबजाती नालियां और जलनिकासी के अभाव में जमा गंदा पानी मोहल्ले की पहचान बन चुके हैं। स्थानीय मो. शाहनवाज हुसैन उर्फ नौशाद व मो. डब्बू करते हैं कि हल्की बारिश में भी नालियों का पानी घर में भर जाता है। कई दिनों तक बदबू और गंदगी के बीच रहना पड़ता है। कहा कि जलकल विभाग द्वारा पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कें को खोदा गया, लेकिन बाद में उनका पुनर्निर्माण नहीं कराया गया। इससे परेशानी और बढ़ गई है।
गंदे पानी व बदबू के बीच रहना मजबूरी
रंजीत कुमार, संजय कुमार शुक्ला, संजय कुमार, पिंटू कुमार, मणि शरण शर्मा कहते हैं कि प्री-मानसून की बारिश ने दस्तक दे दी है। जल्द ही मानसून भी आना वाला है। ऐसे में रामबाग, नकुलवा चौक, माइस्थान गली, रामबाग कालाजार गली, पंचमुखी चौक, कालीबाड़ी रोड, चकबासू, विमल बाबा लेन के लोगों की नजरें अब नगर निगम पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस बार बारिश से पहले उनकी पीड़ा का कोई स्थायी समाधान निकल पाएगा या फिर सैकड़ों लोग एक बार फिर गंदे पानी व बदबू के बीच जिंदगी बिताने को मजबूर होंगे।
प्रशासन के दावे
प्रमोद चंद्रवंशी, राकेश कुमार और रत्न कुमार बताते हैं कि जनार्दन प्रसाद-महेंद्र चौधरी लेन का नाला पांच साल से बन रहा है। अभी तक निर्माण पूरा नहीं हुआ। इससे बारिश और जलभराव के दौरान नाला का पानी सड़क होते हुए घरों में घुसता जाता है। इन मोहल्लों के अधिकतर हिस्सों में सड़क जर्जर है। कहा कि ये मोहल्ले अब भी उपेक्षा के शिकार हैं। यहां के 50 से अधिक परिवार वर्षों से इस समस्या का सामना कर रहे हैं।
जलनिकासी में बाधाएं
स्थानीय रंजीत कुमार, संजय कुमार शुक्ला ने कहा कि इन इलाकों की नालियों की सही से सफाई नहीं होती है। इससे जलनिकासी बाधित रहती है। गाद और सिल्ट नाला के पानी के बहाव को रोकता है। बीते दिनों अधिकारियों ने निरीक्षण किया तो उनको नालों में गंदगी दिखी। प्लास्टिक और अन्य सामान नाले में फंसा था। इस दौरान उनसे क्षतिग्रस्त व जर्जर सड़कों की पुन: मरम्मत की मांग की गई। अब तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा सका है।
बिजली के पोलों का खतरा
मो. डब्बू, रवि कुमार, संजय कुमार, पिंटू कुमार ने कहा कि मोहल्ला में लगातार जलभराव से पुराने बिजली के पोल झुक गए हैं। इससे उनके गिरने व बड़े हादसे का खतरा बना रहता है। अगर इनको जल्द दुरुस्त नहीं किया गया तो अधिक बारिश और जलभराव में ये गिर भी सकते हैं।
खतरे का आभास
मो. डब्बू, रवि कुमार, संजय कुमार, पिंटू कुमार ने कहा कि मोहल्ला में लगातार जलभराव से पुराने बिजली के पोल झुक गये है। क्षतिग्रस्त होने के कगार पर है। इनका कहना है कि इन्हें बिजली विभाग दुरुस्त कर दें तो बड़ा हादसा टल सकता है। अन्यथा भारी बारिश और जलभराव होने पर पोल सड़क पर गिर सकता है। इससे आमजन को बड़ा नुकसान हो सकता है। वहीं, स्थानीय बसंत कुमार, विनोद राम और रवि कुमार का कहना है कि वे वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई जगह जलापूर्ति पाइपलाइन और नालियां बेहद करीब हैं। इससे पेयजल के दूषित होने का खतरा बना रहता है। उनका कहना है कि बारिश के दिनों में नाली और पाइपलाइन के पानी में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। लोगों का आरोप है कि मजबूरी में उन्हें जोखिम उठाकर वही पानी पीना पड़ता है। उनका कहना है कि नगर निगम से कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करता दिख रहा है।
जिम्मेदारों के बयान
वार्ड के कई मोहल्लों में जलजमाव की स्थिति है। चौधरी कंपाउंड में पूरे साल पानी जमा रहता है। मुख्य नाले की सफाई नहीं होने से यह स्थिति बनी रहती है। इससे विधायक को अवगत कराई हूं। तीन कल्वर्ट के निर्माण के बाद जलजमाव की समस्या दूर हो जाएगी।
-सीमा झा, पार्षद, वार्ड-41
शहर के वार्डों का सर्वे किया जा रहा है। खुद भी नियमित निरीक्षण कर विकास की योजना तैयार कर रहा हूं। जल्द ही रिपोर्ट सीएम को भेजी जाएगी। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री कोष से राशि निर्गत होने वाली है। इससे शहर की गली-गली का विकास होगा।
-रंजन कुमार, विधायक
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