बिहार में मशरूम उगाने वाले किसानों को बड़ी राहत, सस्ती बिजली का प्लान, नई दर जान लें
एक अप्रैल से मशरूम उत्पादन करने वाले किसानों को मौजूदा दर की तुलना में कई गुना सस्ती बिजली मिलेगी। इसका लाभ किसानों को होगा। मशरूम उत्पादन करने को लेकर किसानों में आकर्षण बढ़ेगा और उनकी आय में सुधार होगा।

बिहार में मशरूम की खेती करने वाले किसानों को सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। मशरूम उत्पादक किसानों को अब तक व्यवसायिक दर पर बिजली मिल रही है। कंपनी ने मशरूम की खेती करने वालों को सामान्य किसानों की तरह ही सस्ती बिजली देने का निर्णय लिया है। कंपनी ने बिहार विद्युत विनियामक आयोग को यह प्रस्ताव दिया है। आयोग की मुहर लगी तो एक अप्रैल से मशरूम उत्पादक किसानों को सस्ती बिजली मिलने लगेगी। कंपनी के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार अभी मशरूम उत्पादक किसानों को व्यवसायिक (गैर घरेलू) श्रेणी में माना जाता है।
इसके अनुसार ग्रामीण व शहरी इलाके की बिजली दर अलग-अलग है। ग्रामीण इलाकों में मशरूम उत्पादक किसानों को एक से सौ यूनिट तक खपत करने पर 3.35 रुपए प्रति यूनिट तो 100 यूनिट से अधिक खपत होने पर 4.21 रुपए प्रति यूनिट की अनुदानित दर से बिजली का भुगतान करना पड़ता है, जबकि शहरी इलाके में पांच किलोवाट तक के मशरूम उत्पादक किसानों को 5.67 रुपए प्रति यूनिट की अनुदानित दर से बिजली बिल का भुगतान करना होता है।
पांच से 70 किलोवाट तक के कनेक्शन में किसानों को 100 यूनिट तक 5.67 रुपए जबकि इससे अधिक खपत होने पर 6.44 रुपए प्रति यूनिट की अनुदानित दर के हिसाब से बिजली बिल देना होता है। वहीं, कंपनी के प्रस्ताव के अनुसार मशरूम की खेती करने वाले किसानों को सामान्य किसानों की तरह ही मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट के हिसाब से ही बिजली बिल देना होगा।
यानी आगामी एक अप्रैल से मशरूम उत्पादन करने वाले किसानों को मौजूदा दर की तुलना में कई गुना सस्ती बिजली मिलेगी। इसका लाभ किसानों को होगा। मशरूम उत्पादन करने को लेकर किसानों में आकर्षण बढ़ेगा और उनकी आय में सुधार होगा।
देश में अग्रणी उत्पादक राज्य है बिहार
बिहार में मशरूम की खेती की स्थिति अच्छी है। राज्य अब देश का अग्रणी उत्पादक बन गया है। देश में हो रहे उत्पादन में 11 फीसदी का योगदान बिहार का है। बिहार ने ओडिशा को पछाड़कर पहला स्थान प्राप्त किया है। राज्य सरकार पहले ही अन्य मदों में मशरूम की खेती करने वाले किसानों को 90 फीसदी तक सब्सिडी देती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। गया जी, भोजपुर जैसे जिले मशरूम उत्पादन में प्रमुख केंद्र बन गए हैं।
2021-22 में 28,000 टन से बढ़कर 2023-24 में 41,310 टन तक मशरूम का उत्पादन पहुंच गया है। 60-70 हजार लोगों को इस क्षेत्र में रोजगार मिला हुआ है। गरीब-मध्यम वर्ग के लिए आय का एक अच्छा स्रोत बन रहा है। बिहार से दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों में मशरूम की आपूर्ति होती है। बिहार में बटन, ऑयस्टर और दूधिया मशरूम का उत्पादन अधिक होता है।




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