गांधी मैदान: देखरेख के अभाव में जिम के उपकरण बेकार, टूट रहे झूले व ग्रील
गांधी मैदान में बच्चों के स्वास्थ्य के लिए लगाये गए झूले टूट रहे हैं और ओपेन जिम सिस्टम भी खराब हो रहा है। धूप और बारिश से बचने के लिए कोई शेड नहीं है। असामाजिक तत्व बेंच और खेलकूद उपकरणों को तोड़ रहे हैं, जबकि प्रशासन को इसकी ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।

शहर के गांधी मैदान में बच्चों के स्वास्थ्य लाभ के लिये लगाये गये झूले टूट रहे हैं। ओपेन जिम सिस्टम भी एक-एककर खराब हो रहा है। धूप व बरसात से बचने के लिये कोई शेड नहीं बनाया गया है। गांधी मैदान के किनारे जितने भी बेंच बने हैं उसे असामाजिक तत्व तोड़ रहे हैं। कोई राेकेन व टोकने वाला है। जबकि गांधी मैदान के चारों ओर बीआईपी आवास है। सभी आवास के गेट पर संतरी ड्यूटी लगी रहती है। सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है लेकिन, रोकने वाला कोई नहीं है। सिद्धिरा सिंह का कहना है कि रविवार व अन्य छुट्टी के दिन वह अपने अभिभावक के साथ गांधी मैदान में आती है।
गांधी मैदान में बच्चों के लिये लगाये गये झूले टूट रहे हैं। कोई खराब हो गया है। किसी की मरम्मत नहीं की जाती है। प्रशासन को भी इस पर ध्यान देना चहिए। बच्चे यहां खेलने आते हैं और निराश होकर लौट जाते है। समीक्षा कुमारी का कहना है कि यहां के जितने भी खेलकूद व्यायाम के साधन लगाये गये है सभी बेकार व पुराने हो गये हैं। इसकी मरम्मत व नये उपकरण लगाने की जरुरत है। छुट्टी के दिने काफी संख्या में यहां बच्चे आते हैं। जिनके स्वास्थ्य लाभ का साधन लुप्त होते जा रहा है। ऑफ का दिन भी बेकार हो जाता है। सुशांत सिंह का कहना है कि गांधी मैदान में बच्चों को सबसे अधिक खतरा ट्रैक व फिल्ड में बाइक सवारों से होती है। इतनी तेजी से बाइक चलाते हैं हादसा होने का खतरा बराबर बना रहता है। नगर पुलिस को वैसे बाइक सवारों पर कार्रवाई करनी चाहिए। फिल्ड में सुबह व शाम बाइकों के प्रवेश पर राेक लगा देना चाहिए। गेट पर जो गार्ड रहते हैं उन्हें ही रोकना चाहिए। लेकिन वे ऐसा नहीं करते हैं। अभिनव कुमार का कहना है कि गेट पर जो गार्ड तैनात रहते हैं उन्हें यह जवाबदेही देनी चाहिए कि जो बड़े लोग झूला का दुरुपयोग करते है उन्हें मना करें। झूला पर चौदह साल से अधिक उम्र के लोग नहीं झूल सकते ऐसा निर्देश का बोर्ड लगाया गया है। इसका अनुपालन नहीं होता। काफी मोटे व बड़े लोग झूलने लगते हैं जिससे झूला खराब हो रहा है। नीरज कुमार का कहना है कि धूप व बरसात से बचाव के लिये एक भी शेड गांधी मैदान में नहीं बनाया गया है जहां कोई राहगीर छिप सके। हल्की बारिश होने पर ही गांधी मैदान में स्वास्थ्य लाभ के लिये आने वाले लोगों में भगदड़ मच जाती है। अंतत: सभी लोग बरसात में भींग जाते हैं। यहां किनारे में शेड बनना जरुरी है। नगर निगम प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। कुंदन पटेल का कहना है कि सुबह चार बजे से दस बजे दिन व शाम चार बजे से सात बजे तक लोग नियमित रूप से टहलते हैं। ओपेन जिम सिस्टम का लाभ उठाते थे। वह भी धीरे- धीरे खराब हो रहा है। मरम्मत नहीं की जाती है। रवि रौशन का कहना है कि यहां बच्चों के लिये झूला लगाया गया है। उस पर नियमत: 14 साल के उम्र तक बच्चे झूल सकते हैं। ऐसा नहीं होता है। व्यस्क लोग झूला पर झूलते रहते हैं। उसका टूटना व खराब होना लाजिमी है। गौतम सिंह का कहना है कि असामाजिक तत्व चहारदीवारी पर लगे ग्रील को उखाड़ते हैं। वहीं जिम उपकरण से कई औजार को खोलकर कबाड़ में बेच देते हैं। जबकि वहां गार्ड की तैनाती रहती है। राजेश कुमार का कहना है कि बाइक व चार पहिये वाहनों का गांधी मैदान में प्रवेश वर्जित करना चाहिए।
प्रस्तुति : राकेश रंजन / विजय कुमार सिंह
बोले जिम्मेदार
गांधी मैदान में बच्चों के लिए लगायी गयी विभिन्न तरह की खेलकूद सामग्री व ओपेन जिम सिस्टम टूटने और कुछ के खराब होने की जानकारी मिली है। इसकी मरम्मत की दिशा में कारगर कदम उठाये जाएंगे। गांधी मैदान में दो पहिये व चार पहिये वाहनों के प्रवेश पर भी रोक लगायी जायेगी। वाहनों के बेरोकटोक प्रवेश होने से मॉर्निंग वाक करने वाले लोगों को परेशानी हो रही है। नगर आयुक्त से बात कर सुरक्षा के प्रबंध किये जाएंगे।
-डॉ लालबाबू प्रसाद, उपमेयर, नगर निगम
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