कमाई का ठिकाना न इलाज की गारंटी जेब से जख्म भर रहे डिलीवरी राइडर्स
ऑनलाइन सामान पहुंचाने वाले बाइक राइडरों को सुरक्षा बीमा और कमीशन में कमी का सामना करना पड़ रहा है। कई राइडर दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं और कंपनी से कोई मदद नहीं मिली। समय पर डिलीवरी का दबाव और ट्रैफिक की समस्याएं भी उनके काम को कठिन बना देती हैं। उचित कमीशन और सुरक्षा की जरूरत है।

मौसम की मार झेलकर घर घर ऑनलाइन सामान पहुंचाने वाले बाइक राइडरों की कम्पनी अनदेखी करती है। सुरक्षा बीमा के साथ उन्हें कमीशन भी कम दिया जाता है। जिससे उनके परिवार का पालन-पोषण भी ठीक से नहीं होता है। दिन रात सड़कों पर संघर्ष करते हैं। निर्धारित समय पर ही सामान पहुंचाना पड़ता है। देरी होने पर उपभोक्ताओं से विवाद भी होता है। अजय कुमार का कहना है कि कई ऐसे बाइक राइडर हैं जो आज दिव्यांग हो चुके हैं। ऑनलाइन सामान जल्दी पहुंचाने की होड़ में दुघर्टनाग्रस्त हो गये। अपने खर्च से इलाज कराये उसके बावजूद सड़क पर संघर्ष करने लायक नहीं बचे हैं।
उन्हें कम्पनी की ओर से कोई सहायता नहीं मिली। राइडर विकास कुमार का कहना है कि जानपुल चौक पर व एक मार्ट के बगल में ईरिक्शा की चपेट में बाइक राइडर आकर दुघर्टना का शिकार हुआ। कम्पनी की ओर से उसका कोई सुरक्षा बीमा नहीं था। इस घटना के बाद कुछ सहयोग करना चाहिए तो कम्पनी वाले उसका आईडी भी रद्द कर दिया। उसका पैर टूट गया था। छोटन कुमार का कहना है कि बाइक राइडर के लिए कम्पनी की ओर से उचित कमीशन और सुरक्षा बीमा की व्यवस्था करनी होगी। ताकि वे अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें व किसी तरह की घटना के बाद बीमा राशि का लाभ ले सकें। अमन कुमार का कहना है कि ऑर्डर मिलने पर दुकान से एक मिनट के अंदर सामान का उठाव करना होता है। पांच किमी की दूरी तक मात्र तीस मिनट में ही सामान पहुंचा देना होता है। डिलेवरी में देरी होने पर उपभोक्ता से विवाद होता है और उनकी शिकायत पर कमीशन की राशि भी काट ली जाती है।नीतेश कुमार का कहना है कि शहर में विभिन्न कम्पनियों की एक हजार से अधिक बाइक राइडर काम करता है। जल्दी सामान पहुंचाने की होड़ में सड़कों पर उनकी रफ्तार काफी तेज रहती है। जोखिम भरे इस काम में कोई सुरक्षा नहीं है। कोई घटना होने पर परिजनों को काफी परेशानी होती है। रजनीश कुमार का कहना है कि कमीशन की राशि कम्पनी की ओर से मनमाने ढंग से घटाव किया जाता है। जब ऑर्डर अधिक मिल जाता है तो कमीशन की राशि को कम कर देता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। काम अधिक होने पर रुपये भी अधिक मिलना चाहिए। विशाल कुमार का कहना है कि बाइक अपनी होनी चाहिए। उसमें पेट्रोल भी अपने जेब की राशि से डालना पड़ता है। दस रुपये प्रति किलोमीटर की दर से कमीशन की राशि का भुगतान किया जाता है। यह काफी कम है। कम्पनी की ओर से कमीशन की राशि में बढ़ोतरी की जानी चाहिए। पप्पु कुमार का कहना है कि डिलेवरी के समय कोई उपभोक्ता सामान को कैंसिल कर देता है तो उसका कमीशन बाइक राइडर को नहीं मिलता है। बाइक राइडर का श्रम भी लगा और पेट्रोल का खर्च भी हुआ। कमीशन नहीं मिला। इसमें कम्पनी को सुधार करने की जरुरत है। बाइक राइडर का समय तो बर्बाद हुआ। राहुल पटेल का कहना है कि उन लोगों के सामने ट्रैफिक की समस्या है। समय पर सामान डिलेवरी करना है उसमें ट्रैफिक समस्या के कारण वे लोग जाम में फंस जाते हैं। जिसके कारण कई बार समय पर सामान की डिलेवरी नहीं हो पाती है। इसको लेकर उपभोक्तओें से कहासुनी भी हो जाती है। प्रदीप कुमार का कहना है कि समय पर सामान डिलेवरी का इतना दबाव रहता है कि उनलोगों को खाना खाने की जगह व समय नहीं मिल पाता है।
प्रस्तुति : राकेश रंजन/विनीत कुमार
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