शहर की सड़कों पर मवेशियों का डेरा, राहगीरों की जान जोखिम में
मोतिहारी नगर निगम क्षेत्र में आवारा पशुओं का आतंक बढ़ता जा रहा है। लोग सड़कों पर घूमते गाय, सांड, और कुत्तों से परेशान हैं। कई बार ये पशु आक्रामक हो जाते हैं, जिससे राहगीरों को चोटें आती हैं। माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने में डर रहे हैं। प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की जा रही है।

मोतिहारी नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत शहर के विभिन्न मोहल्लों में इन दिनों आवारा पशुओं का आतंक तेजी से बढ़ता जा रहा है। मुख्य सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक गाय, सांड, कुत्ते, सूअर और अन्य पशु खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अब घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस करने लगे हैं। शहर के राज रंजन कुमार, शिवानी कुमारी, साक्षी दुबे, मुस्कान कुमार, अमन कुमार राज ने कहा कि शहर के व्यस्त इलाकों जैसे - मीना बाजार, बलुआ, छतौनी चौक, जानपुल समेत कई प्रमुख स्थानों पर सुबह और शाम के समय सड़कों पर पशुओं का जमावड़ा लग जाता है।
कई बार ये पशु सड़कों के बीचों-बीच बैठ जाते हैं, जिससे लंबा जाम लग जाता है और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। खासकर सब्जी बाजार और गंदगी वाले इलाकों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जहां कचरे के कारण पशु अधिक संख्या में जुटते हैं।दिव्या कुमारी, गोल्डी पांडेय, माधव सिंह, मनिष कौशल, मुस्कान कुमारी आदि ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये आवारा पशु अब आक्रामक भी होने लगे हैं। कई इलाकों में सांडों द्वारा राहगीरों पर हमला करने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसमें लोग घायल भी हुए हैं। अचानक हमले के कारण लोग संभल नहीं पाते और गंभीर चोट का शिकार हो जाते हैं। इस वजह से खासकर स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह समस्या बेहद गंभीर बन गई है। शहर की अधिकतर सड़कों पर कीचड़ होने की वजह से लोगों को तेजी से भागने का भी रास्ता नहीं मिल पाता है।अभिभावकों की चिंता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। कई माता-पिता अपने बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर रहे हैं। बच्चों में भी डर का माहौल है और वे सड़कों पर निकलने से कतराने लगे हैं। इस कारण अभिभावकों को अपने बच्चों को पहुंचाने मुख्य सड़क तक जाना पड़ता है। वहीं बुजुर्गों व महिलाओं के लिए सुबह-शाम टहलना भी मुश्किल हो गया है।अमन राज, आस्था गिरि, रोहित कुमार, ब्रजमोहन कुमार, दिव्या कुमारी आदि ने कहा कि रात के समय यह समस्या और भी भयावह हो जाती है। अंधेरे में सड़कों पर बैठे पशु दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। कई बार बाइक सवार और साइकिल चालक अचानक पशुओं से टकरा जाते हैं, जिससे गंभीर हादसे हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार इस संबंध में प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर प्रशासन इस गंभीर समस्या को नजरअंदाज कर रहा है। कागजों पर योजनाएं बनती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा। आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए न तो नियमित अभियान चलाया जा रहा है और न ही पशु मालिकों पर कोई सख्ती की जा रही है। लोगों ने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग की है। नगर निगम द्वारा आवारा पशुओं को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही शहर में गोशालाओं की संख्या बढ़ाई जाए और वहां उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि पकड़े गए पशुओं को सुरक्षित रखा जा सके।
प्रस्तुति : पराशर प्रभात/विजय कुमार सिंह
बोले जिम्मेदार
शहर में आवारा पशुओं से बढ़ती समस्या को देखते हुए जल्द ठोस कदम उठाए जाएंगे। नगर निगम द्वारा विशेष अभियान चलाकर सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़ने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए अलग से टीम गठित की गई है, जो नियमित रूप से विभिन्न मोहल्लों और मुख्य सड़कों पर अभियान चलाएगी। पकड़े गए पशुओं को नजदीकी गोशालाओं में भेजा जाएगा और वहां उनकी देखभाल की उचित व्यवस्था रहेगी।
- डॉ.लालबाबू प्रसाद, उप महापौर, नगर निगम
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