मखाना, चावल फंसा, खाद और रिफाइन पर संकट; ईरान-इजरायल युद्ध का बिहार पर कितना असर?
मध्य-पूर्व एशिया में चल रहे युद्ध के कारण दुबई आदि देशों में जाने वाला 300 करोड़ रुपये का मखाना कारोबार प्रभावित हुआ है। दुबई में मखाना की पुन:पैकिंग के बाद अमेरिका व यूरोप के कई देशों में सप्लाई होती थी। युद्ध में यह सप्लाई चेन भी टूटने लगी है।

मध्य-पूर्व एशिया में जारी युद्ध से बिहार के कारोबारी और किसान तक परेशान हैं। मध्य पूर्व के देशों में चावल से लेकर मखाना तक के निर्यात और खाद से लेकर मछली पालन के लिए जरूरी सामग्री से लेकर उपकरणों तक का आयात प्रभावित हुआ है। जहाजों की कमी से रिफाइन तेल का आयात भी कम हो रहा है।
बिहार राज्य मत्स्यजीवी सहकारी संघ (कॉफ्फेड) के प्रबंध निदेशक ऋषिकेश कश्यप बताते हैं कि मध्य-पूर्व एशिया में चल रहे युद्ध के कारण दुबई आदि देशों में जाने वाला 300 करोड़ रुपये का मखाना कारोबार प्रभावित हुआ है। दुबई में मखाना की पुन:पैकिंग के बाद अमेरिका व यूरोप के कई देशों में सप्लाई होती थी। युद्ध में यह सप्लाई चेन भी टूटने लगी है। बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनांस से जुड़े अर्थशास्त्री सुधांशु कुमार कहते हैं कि युद्ध बिहार के निर्यातकों के लिए विनाशकारी साबित होगा। यहां से बासमती चावल और मखाना का निर्यात रुक गया है। लीची और आम की फसल पर भी इस युद्ध का बुरा प्रभाव पड़ना तय है।
खाद की भी किल्लत होगी
बिहार में प्रत्येक वर्ष 40 लाख टन खाद की खपत है। बिस्कोमान के मुख्य फर्टिलाइजर अधिकारी वाईपी सिंह बताते हैं कि बिहार में खपत होने वाली खाद में 30 लख टन केवल यूरिया है। युद्ध के कारण खाद का सप्लाई चेन बिखर गया है। विदेशों से आने वाला खाद व इसके निर्माण की कच्ची सामग्री भी मिलने में परेशानी हो रही है। गैस की किल्लत के बीच खाद निर्माण के लिए जरूरी गैस सप्लाई में 40 प्रतिशत तक की कटौती की गई है।
अभी से होने लगा है भंडारण
युद्ध के कारण खाद की कमी की आशंका से बाजार में अभी से बिचौलिए हावी हो गए है। अभी खेतों में खाद की आवश्यकता नहीं है। लेकिन बाजार से बड़े पैमाने पर यूरिया और डीएपी की खरीदारी की जा रही है। बिहार में खाद की बढ़ती जरूरत के कारण इसका बाजार अभी से चढ़ने लगा है। 265 रुपये में मिलने वाला खाद पटना में 300 से 350 रुपये और कटिहार में 500 रुपये बोरी तक मिल रही है। बिहार में खाद की जरूरत जून-जुलाई में ज्यादा होती है।
ईरान ने की जवाबी कार्रवाई
इजरायल द्वारा पार्स गैस फील्ड को निशाना बनाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गुरुवार को कतर, सऊदी अरब, कुवैत, इजरायल और यूएई की सबसे बड़ी रिफाइनरियों और गैस संयंत्रों पर मिसाइलों और ड्रोनों की बरसात कर दी। इससे कच्चे तेल की कीमतें 116 डॉलर के पार निकल गई।
कतर ने बताया कि हमले में कई एलएनजी संयंत्रों को आग और धमाके से नुकसान हुआ है लेकिन नुकसान का सटीक आकलन नहीं हो सका है। फिलहाल ऊर्जा का उत्पादन रोक दिया गया है और आग पर काबू पा लिया गया है। कतर के रास लाफान औद्योगिक शहर से दुनिया को 20 फीसदी गैस आपूर्ति होती है।
रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला
वहीं, सऊदी अरब की समरेफ रिफाइनरी पर भी ड्रोन से हमला हुआ। ईरान ने कुवैत कर मिना अब्दुल्ला रिफाइनरी और मिना अल अहमदी रिफाइनरी पर भी ड्रोन गिराए, जिससे संयंत्र में आग लग गई। मिना अल अहमदी रिफाइनरी मध्यपूर्व की सबसे बड़ी रिफाइनरी है। इससे रोजाना 7.30 लाख बैरल पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन होता है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दक्षिणी रियाद में भी ईरान ने एक रिफाइनरी को मिसाइल से निशाना बनाया।




साइन इन