वार्ड-17 में नाले नहीं, सड़कें भी जर्जर भू-जलस्तर गिरने से पेयजल संकट
मधुबनी नगर निगम के वार्ड-17 में बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि सड़क, नाला और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद निगम के अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे लोगों में निराशा और गुस्सा बढ़ गया है।

मधुबनी । मधुबनी नगर निगम के वार्ड-17 में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल हालत को स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है। वर्षों से उपेक्षित इस वार्ड में रहने वाले लोग आज भी सड़क, नाला और सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक उनकी समस्याओं का समाधान निगम के अधिकारी नहीं कर पाए हैं। इससे लोगों का प्रशासन के साथ निगम पर से भरोसा कम होता जा रहा है। स्थानीय निवासी अनु करण, रानी, जीतन सहित कई लोगों ने बताया कि वार्ड में अब तक न तो नाले का निर्माण कराया गया है और न ही सड़कों की मरम्मत कराई गई, जिससे हल्की बारिश में ही कीचड़ और जलजमाव हो जाता है।
बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं, जब पूरा इलाका पानी में डूब जाता है और सड़कों पर चलना तक मुश्किल हो जाता है।मोहल्ले की महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति और भी ज्यादा कष्टदायक हो जाती है। पिंकी देवी, अनु और राम अवतार साहू ने बताया कि बारिश के दौरान सड़कों पर इतना पानी भर जाता है कि लोगों का घर से निकलना लगभग असंभव हो जाता है। पुरुष किसी तरह पानी के बीच से गुजरकर अपने काम पर चले जाते हैं, लेकिन महिलाएं और बच्चे कई-कई दिनों तक घरों में ही कैद होकर रह जाते हैं। इससे उनके दैनिक जीवन पर गंभीर असर पड़ता है।स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि गली-मोहल्लों में जल निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। नालियों के अभाव में बारिश का पानी सड़कों और घरों के आसपास जमा हो जाता है, जिससे बदबू फैलती है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। इसके कारण डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है।वार्ड के लोगों ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस योजना का लाभ अधिकांश जरूरतमंद परिवारों तक नहीं पहुंच पाया है। कई लोग आज भी कच्चे या जर्जर घरों में रहने को मजबूर हैं, जबकि योजना का लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित रह गया है। इससे लोगों में असंतोष और बढ़ गया है।निवासियों का आरोप है कि जब भी वे अपनी समस्याओं को लेकर नगर निगम के अधिकारियों के पास जाते हैं, तो उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता। बार-बार आवेदन और गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, जिससे लोगों में निराशा और गुस्सा दोनों बढ़ रहा है।स्थानीय लोगों ने मांग की है कि वार्ड में जल्द से जल्द सड़क और नाला निर्माण कराया जाए, ताकि जलजमाव की समस्या से राहत मिल सके। इसके साथ ही जर्जर सड़कों की मरम्मत और पक्कीकरण किया जाए, ताकि आवागमन सुगम हो सके। उन्होंने यह भी मांग की कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वास्तविक जरूरतमंदों की पहचान कर उन्हें लाभ दिया जाए। कुल मिलाकर, वार्ड 17 के लोग बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। यदि जल्द ही प्रशासन द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो लोगों का आक्रोश और बढ़ सकता है। अब देखना यह है कि नगर निगम प्रशासन इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक वार्ड 17 के लोगों को राहत मिल पाती है।भूजल स्तर गिरने से बढ़ी परेशानी: गर्मी के मौसम में इस: मोहल्ले की स्थिति और विकराल हो जाती है। मधुबनी शहर का भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है, जिससे वार्ड 17 के अधिकतर घरों में लगे चापाकल पूरी तरह सूख जाते हैं। परिणामस्वरूप लोगों को महीनों तक पीने के पानी की गंभीर समस्या से जूझना पड़ता है। नल-जल योजना की बात करें तो पानी की टंकी तो लगी है लेकिन वार्ड में पाइप का कहीं कुछ पता नहीं है। लोगों का कहना है कि जब पंचायत से नगर निगम में शामिल किया गया तो लगा कि अब वार्डों का विकास होगा लेकिन नगर निगम के चुनाव का एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद वार्डों की स्थिति जस की तस है। लोगों ने बताया कि वार्ड की समस्याओं के बारे में कई बार पार्षद से लेकर निगम के अधिकारी तक शिकायत की लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।मोहल्ले में स्ट्रीट लाइट नहीं होने से शाम में छा जाता अंधेरावार्ड 17 में सफाई व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। सड़कों और गलियों में कूड़ा-कचरा इधर-उधर बिखरा रहता है। कचरे के ढेरों से उठती बदबू और गंदगी के कारण लोगों का रहना मुहाल हो गया है। लोगों का कहना है कि नगर निगम द्वारा नियमित रूप से सफाई कर्मियों की नियुक्ति नहीं की जाती है। कई दिनों तक कचरा उठाने कोई नहीं आता। इससे न केवल वातावरण दूषित हो रहा है, बल्कि मच्छरों और बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। लोगों का यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। गंदगी के कारण राहगीरों को भी परेशानी होती है, खासकर बरसात के मौसम में, जब यह कचरा नालियों में बहकर जलजमाव की स्थिति को और भी गंभीर बना देता है। इस दिशा में पहल करने की अत्यंत जरूरत है। वार्ड में स्ट्रीट लाइट की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण शाम होते ही पूरा इलाका अंधेरे की चपेट में आ जाता है। सूर्यास्त के बाद सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से लोगों को आवागमन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह स्थिति और भी चिंताजनक हो जाती है। अंधेरे के कारण ठोकर लगने, गिरने या दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।इसके अलावा, अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा की भावना कमजोर होती है। कई बार चोरी, छिनतई जैसी घटनाएं भी सामने आती हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल बना रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग को इस समस्या की जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।वार्ड में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिल सके। इसके लिए खराब लाइटों की मरम्मत, नई स्ट्रीट लाइट लगाना और नियमित रूप से उनकी देखरेख करना जरूरी है।
बोले जिम्मेदार- वार्ड 17 की समस्याओं की जानकारी मिली है। निगम क्षेत्र के कई वार्डों में सड़क और नाला निर्माण कार्य शुरू किया गया है। जल्द ही इस वार्ड में कार्य शुरू किया जाएगा। शहर में साफ-सफाई के लिए सफाईकर्मियों की नियुक्ति की गई है। अधिकारी को साफ-सफाई से संबंधित समस्याओं को लेकर निर्देश दिए गए हैं।-उमेश कुमार भारती, नगर आयुक्त, मधुबनी
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