कस्टम कार्यालय खुले तो गुलजार होगी पुरानी मंडी हरिने बाजार
हरिने बाजार, जो मधुबनी में अवस्थित है, का व्यापार सीमावर्ती क्षेत्र में कम हो रहा है। यहाँ कस्टम कार्यालय की अनुपस्थिति के कारण व्यापारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय व्यापारी कस्टम कार्यालय की स्थापना की मांग कर रहे हैं, जिससे व्यापार बढ़ सके और बेरोजगारी कम हो।

मधुबनी । हरिने बाजार इंडो-नेपाल सीमा पर अवस्थित हरलाखी प्रखंड का एक प्रमुख बाजार है। इस बाजार का अतीत काफी समृद्ध था। जब न बाजार में सड़क थी और न यातायात की सुविधा उस समय यहां कारोबार बैल गाड़ी के सहारे किया करते थे। कुछ बुजुर्गों की माने तो नेपाल से बड़ी संख्या में छोटे बड़े व्यापारी बैल गाड़ी से यहां आते थे और अपने कारोबार के लिए सामग्री खरीद कर ले जाते थे। सीमा रेखा तो थी लेकिन लोग सहन रूप से एक-दूसरे जगह आते जाते थे। कारोबार भी बेहतर चलता था। लेकिन सीमा की सुरक्षा व अवैध कारोबार पर रोक के उद्देश्य से जब इंडो-नेपाल सीमा पर भारत सरकार द्वारा एसएसबी की प्रतिनियुक्ति की गई तो अचानक सीमावर्ती क्षेत्र के कारोबार पर इसका असर दिखने लगा।
इसके कारण यहां के बाजारों की रौनक घटने लगी। हरिने बाजार में बड़ी संख्या में बासोपट्टी के व्यापारी थे, जो कारोबार प्रभावित होते देख यहां से दूसरे जगह चले गये। अब जो कारोबारी है उनलोगों को कस्टम कार्यालय के अभाव में काफी असुविधाएं होती है, ये नेपाल के व्यापारियों के हाथ अपनी सामग्री नहीं बेच पाते है। इंडो-नेपाल सीमा पर हरलाखी प्रखंड का जो हरिने बाजार है वहां सीमा के इस पार या उस पार कहीं कस्टम कार्यालय नहीं है।एक छोटा कार्यालय जटही-पिपरौन में है जहां से सामग्री बेचना कठिन है। बतादें कि हरिने बाजार की अलग पहचान है, यहां भी छोटी बड़ी करीब 500 दुकानें है, कुछ बड़े कारोबारी भी है, जो सरकार को टैक्स भरते है, लेकिन व्यापार में लगी लागत के हिसाब से उनलोगों की आय नहीं हो पाती है। यहां कारोबार प्रभावित होता है। हालांकि सीमावती क्षेत्र होने के कारण कुछ लोग अवैध रूप से भी व्यापार करते है, लेकिन जब इस तरह के कारोबारियों के सामान अवैध रूप से नेपाल भेजने के क्रम में पकड़े जाते है तो उन्हें बड़ी क्षति उठानी पड़ती है। यदि यहां कस्टम कार्यालय की स्थापना कर दी जाय तो निश्चित रूप से इस प्रकार के अवैध कारोबार पर अंकुश लगेगा और सरकारी राजस्व को भी लाभ पहुंचेगा। बतादें कि हरलाखी प्रखंड के अधीन 17 पंचायत और 66 राजस्व ग्राम है। इसके अलावे सीमा से लगी कई छोटे छोटे बाजार भी है। यहां के व्यापारियों द्वारा एसएसबी की प्रतिनियुक्ति के बाद ही कस्टम कार्यालय की स्थापना करने की मांग की जाती रही है। यहां के व्यापारियों ने पुल के निकट इसकी स्थापना करने की मांग की। सभी ने मधुबनी के सांसद से भी इस दिशा में पहल करने का अनुरोध किया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई साकारात्मक निर्णय नहीं हो सका है। आज के बदलते परिवेश में व्यापार की महत्ता काफी बढ़ गई है खासकर युवा वर्ग बढ़ते बेरोजगारी को देख पढ़ाई-लिखाई कर अपना ध्यान व्यापार के तरफ अधिक लगाने लगे हैं, लेकिन जब तक इसे समर्थन नहीं मिलेगा तब तक उनका उत्साह नहीं बढ़ेगा। अब स्थानीय व आस पड़ोस के व्यापारियों की एक मात्र यही मांग है कि हरिने बाजार को आगे बढ़ाने के लिए यहां कस्टम कार्यालय की स्थापना जरूरी है। सभी ने सांसद व विधायक से भी इस दिशा में साकारात्मक कदम उठाने की मांग की है।व्यापारिक प्रगति के लिए कस्टम कार्यालय जरूरी: सीमावर्ती क्षेत्र के बाजारों का विकास हो इसके लिए कस्टम कार्यालय अनिवार्य है। खासकर हरिने बाजार जो काफी पुराना है, इसका चतुर्दिक विकास नहीं हो पा रहा है। यदि कस्टम नेपाल सीमा पर अवस्थित हरिने बाजार में कस्टम कार्यालय नहीं होने के कारण बाजार में अपेक्षित कारोबार नहीं हो रहा है।कार्यालय की स्थापना हो जाय तो निश्चित रूप से न केवल हरिने बाजार का बल्कि आस पड़ोस के बाजार का भी विकास होना तय है। कस्टम की स्थापना से बेरोजगारी भी दूर होगी। व्यापारिक गतिविधि बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेगा। इस क्षेत्र के सड़कों का विकास होगा। यातायात की व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी। भारतीय क्षेत्र के व्यापारी सहजता व सुलभता के साथ पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र से व्यापारिक सम्बंध स्थापित कर पाएगें। इससे सरकारी कोष को भी लाभ मिलेगा। जहां कहीं से अवैध रूप से कारोबार हो रहा है, उसपर भी विराम लगेगा। भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित मधवापुर बाजार में भी दशकों से कस्टम कार्यालय खोलने की मांग की जा रही है। यह मधुबनी जिले के अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र के महत्वपूर्ण बाजार है। यहां बाजार के बीचोबीच सीमा स्तंभ खड़े हैं और सीमा स्तंभों से सटे दोनों देशों के नो-मेंस लेंड में बाजार फैले हुए हैं। यहां सदियों से दोनों देशों के कारोबारियों के बीच भाईचारा बना हुआ है। देश के अंतरराष्ट्रीय नियमों पर यहां के कारोबारियों के बीच आपसी समन्वय भारी है। लेकिन कुछ सालों में मधवापुर बाजार में व्यापार कमजोर हुआ है। इसका मुख्य कारण है कि यहां कस्टम कार्यालय नहीं है। कारोबारियों को काम के लिए पहले जयनगर कस्टम कार्यालय जाना होता था। अब पिपरौन में कस्टम कार्यालय हैं। लेकिन वहां भी किराये के मकान में कस्टम कार्यालय चल रहे हैं। बहरहाल अब मधवापुर बॉर्डर पर जल्द एक कस्टम कार्यालय खुल जाए। कारोबारियों को इसका बेसब्री से इंतजार है।
-बोले जिम्मेदार- हरिने बाजार के करीब कस्टम कार्यालय हो, इसके लिए लगातार प्रयासरत हूं। यह केन्द्र सरकार के अधीन का मामला है। पहले नेपाल से इसका अधिक कारोबार होता था। पहले की अपेक्षा अब कारोबार यहां कम हो गया है। सीमावर्ती क्षेत्र से लगे नेपाल के व्यापारी को भी यहां से सामान खरीदने में असुविधा होती है। कस्टम कार्यालय होने से निश्चित रूप से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इस इलाके का भी विकास होगा।-सुधांशु शेखर, विधायक, हरलाखी विधानसभा
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