राबड़ी आवास पर लगे ठुमके, पुराने रंग में दिखे लालू यादव; तेजस्वी ने भी देखा लौंडा नाच
लंबे समय के बाद पटना में राबड़ी देवी के आवास पर चैता और लौंडा नाच का आयोजन किया गया जिसमें लालू यादव के साथ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी शरीक हुए।

Launda Dance at Lalu Rabri Residence: होली बीत गई और चैत महीने में चैतावर(चैत माह में आयोजित होने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम) का समय चल रहा है। एक जमाना था जब बिहार के सीएम रहे लालू प्रसाद यादव के आवास पर चैता और उसके साथ लौंडा नाच का आयोजन किया जाता था। ठेठ गंवई अंदाज में लालू प्रसाद अपने समर्थकों के साथ बिहार की लोक संस्कृति लौंडा डांस का खुलकर आनंद लेते थे। काफी समय बार एक बार फिर राबड़ी आवास पर चैता और नाच का आयोजन किया गया जिसमें लालू यादव के साथ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी शरीक हुए। राजद के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल समेत बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और नेता मौजूद थे।
रविवार की रात पूर्व सीएम राबड़ी देवी का आवास बिहार के पारंपरिक नृत्य लौंडा डांस से गुलजार हुआ। हम बिहार के बैनर तले चैता कार्यक्रम काआयोजन किया गया। लालू यादव और तेजस्वी यादव देर तक इस कार्यक्रम में मौजूद रहे। स्थानीय कलाकारों ने बिहार की मिट्टी की सुगंध से लबरेज एक से एक चैता के गाने सुनाए। स्थानीय वाद्ययंत्रों ढोलक, झाल, करताल, हारमोनियम की धुन और लोक संगीत की तान पर कई कलाकार ने नृत्य का ऐसा समा बांधा कि वहां मौजूद लोग झूम उठे। अगली कतार में शादी अंदाज में बैठे लालू यादव भी काफी खुश दिखे।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी पोस्ट किया। इसके साथ उन्होंने लिखा कि चैत मास में आयोजित होने वाले पारंपरिक लोक संस्कृति एवं लोक संगीत के कार्यक्रम चैता का आज आवास पर श्रद्धा और धूमधाम से आयोजन किया गया। सनातन धर्म में चैत मास को मधुमास भी कहा जाता है। किसान भाई लोग खुशहाली के लिए गायन-वादन संग हिंदू नववर्ष का उल्लास मनाने के अलावा राम नवमी के आसपास चैता का आयोजन कर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्म की भी खुशियां मनाते हैं। इस आयोजन में लोग प्रेम रस, वीर रस और भगवान राम की लीलाओं से भरे आनंदमय गीतों का गायन व श्रवण करते हैं। चैता और फगुआ के आयोजन सामुदायिक सद्भाव, आपसी सहयोग, अपनापन, परस्पर विश्वास व प्रेम का संचार कर लोक संस्कृति और भरोसे को बढ़ावा देते हैं।
लौंडा नाच क्या है
लौंडा नाच बिहार और उत्तर प्रदेश का एक पारंपरिक लोक नृत्य है। जिसमें पुरुष कलाकार साड़ी और गहने पहनकर महिलाओं का रूप धारण करके नाचते-गाते हैं। मुख्य रूप से विवाह और खुशी के मौकों पर इसका आयोजन हास्य-मनोरंजन के रूप में किया जाता है। भिखारी ठाकुर काल में इस कला को काफी प्रसिद्धि मिली। यह कला मुख्य रूप से बिहार के भोजपुर, सारण, और वैशाली सहित अन्य भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में ज्यादा प्रचलित है। कमोबेस पूरे बिहार में लौंडा डांस का आयोजन किया जाता है। ग्रामीण बिहार में दुर्गा पूजा के दौरान नाटक व अन्य आयोजनों में लौंडा डांसर को बुलाया जाता है। लौंडा डांस में अक्सर एक जोकर होता है जो लोगों को हंसाता है। इसमें ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कथा, कहानी, नाटक का मंचन भी होता है। जो पुरुष साड़ी पहनकर डांस करते हैं उन्हें लौंडा कहते हैं। इसमें मुख्य रूप से हारमोनियम, ढोलक, नगारा, झाल, बैंजू जैसे वाद्ययंत्रो को बजाया जाता है।




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