khesari lal yadav vs choti kumari in chapra election rjd nda bihar election Chapra Chunav: खेसारी और छोटी के बीच दंगल में तीसरे के प्रदर्शन से होगा फैसला, छपरा में दिलचस्प फाइट, Bihar Hindi News - Hindustan
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Chapra Chunav: खेसारी और छोटी के बीच दंगल में तीसरे के प्रदर्शन से होगा फैसला, छपरा में दिलचस्प फाइट

Chapra Chunav: सेलिब्रिटी होने के कारण लोगों की जुबान पर खेसारी लाल यादव का नाम है। वहीं छोटी कुमारी के साथ एनडीए सरकार के विकास कार्य का साथ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नेतृत्व उन्हें सबल प्रदान कर रहा है।

Tue, 4 Nov 2025 07:06 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान, ब्रजेश, छपरा
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Chapra Chunav: खेसारी और छोटी के बीच दंगल में तीसरे के प्रदर्शन से होगा फैसला, छपरा में दिलचस्प फाइट

Chapra Chunav: लोकनायक जयप्रकाश नारायण और भोजपुरी के शेक्सपियर भिखारी ठाकुर की धरती सारण के 10 विधानसभा क्षेत्रों में एक है छपरा। राजनीतिक दल यहां अपने-अपने मोहरे फेंक चुके हैं। अब जनता अपना फैसला सुनाने को तैयार है। आमने-सामने की यहां की लड़ाई में जीत का फैसला तीसरा खेमा करेगा। तीसरे खेमे को मिले वोट परिणाम को प्रभावित करेगा।

सरयू नदी और गंगा नदी के संगम के समीप बसे इस ऐतिहासिक विधानसभा क्षेत्र में महागठबंधन से राजद के खेसारी लाल यादव और एनडीए से भाजपा की छोटी कुमारी मैदान में हैं। दोनों उम्मीदवार पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। खेसारी भोजपुरी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और गायक हैं।

सेलिब्रिटी होने के कारण लोगों की जुबान पर उनका नाम है। वहीं छोटी कुमारी के साथ एनडीए सरकार के विकास कार्य का साथ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नेतृत्व उन्हें सबल प्रदान कर रहा है। 30 अक्तूबर को यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनसभा हो चुकी है।

इधर, पूर्व मेयर राखी गुप्ता निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने में जुटी हैं। जनसुराज पार्टी से यहां जेपी सिंह खड़े हैं। हालांकि, पिछले विधानसभा चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि यहां तीसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को अधिक वोट नहीं मिले हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय प्रत्याशी को सिर्फ छह हजार वोट मिले थे। इस संबंध में छपरा कचहरी स्टेशन के सामने की दवा दुकान के मालिक संजीव कहते हैं कि इस बार की परिस्थिति अलग है।

बिजली, सड़क आदि बुनियादी सुविधाओं पर संतोष के साथ यहां के लोगों की सरकार से कई शिकायतें भी हैं। छपरा शहर में स्थित गंगा सिंह कॉलेज से बाहर आती अंशु कुमारी चुनावी मुद्दे पर कहती हैं, सबकुछ ठीक है, लेकिन रोजगार नहीं है। बिहार में फैक्ट्रियां लगनी चाहिए। कंपनियां आनी चाहिए, ताकि पढ़-लिखकर को बिहार में ही नौकरी लगे।

शांति से घर जाते हैं, रास्ता भी साफ-सुथरा

छपरा शहर की सीमा पर नेवाजी टोला चौक पर 65 वर्षीय राजवंशी सिंह अपने लक्ष्मी तेल मिल में बैठे हैं। वह बताते हैं कि आम आदमी का क्या है, हम मेहनत करेंगे तो खाएंगे। कोई देने वाला नहीं है। हां, इतना जरूर है कि शांति से दुकान से हम घर आते-जाते हैं। जब इच्छा होती है, रात में दुकान बंद करते हैं। रास्ता भी साफ-सुथरा है। यह जगह छपरा शहर में है, पर गड़खा (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

इसी तरह सारण जिले के नया गांव जो परसा विधानसभा में आता है, वहां चाय की दुकान चला रहे छोटू राय कहते हैं कि जनता किसे वोट देगी यह कहना मुश्किल है। उनका तर्क है कि लालू प्रसाद ने जिस वर्ष सबसे ज्यादा काम किया, उसके बाद से वह कभी छपरा में चुनाव नहीं जीते हैं। वह यह भी बताते हैं कि अब महिलाएं पुरुष से पूछ कर वोट नहीं देती है। अपना निर्णय लेती हैं। महिलाओं का रुख इस चुनाव में बड़ा महत्व रखेगा।

छपरा विधानसभा के रिविलगंज प्रखंड के अजयबगंज में बालू गिट्टी के कारोबारी रामेश्वर कुमार पुलिस-प्रशासन से नाराज हैं। कहते हैं कि घर बनाने के लिए भी लोग बालू ले जाते हैं तो पुलिस उन्हें परेशान करती है। छपरा शहर से छह किलोमीटर पश्चिम में रिविलगंज है। बताया जाता है कि यहां गौतम ऋषि का आश्रम था।

रिविलगंज के इन्हीं गांव के 70 वर्षीय निवासी लाल बहादुर सिंह, सब्जी की दुकान के बाहर कुर्सी पर बैठे हैं। वे बातचीत में कहते हैं, आज गांव में लड़कों से ज्यादा लड़कियां पढ़ रही हैं। सरकार भी लड़कियों को प्रोत्साहित कर रही है। सरकारी दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार और शराबबंदी कानून को लेकर पुलिस की मनमानी को वे बड़ी समस्या बताते हैं। कहते हैं कि सरकार को इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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