दुबई से अमेरिका व यूरोप का सप्लाई चेन बाधित, 20 करोड़ का मखाना कारोबार प्रभावित
दुबई से अमेरिका व यूरोप का सप्लाई चेन बाधित, 20 करोड़ का मखाना कारोबार प्रभावित दुबई से अमेरिका व यूरोप का सप्लाई चेन बाधित, 20 करोड़ का मखाना कारोबार

नीरज कुमार, निज प्रतिनिधि। मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका व इजरायल के बीच युद्ध के कारण तनाव की स्थिति बनी हुई है। मखाना कारोबार पर भी इसका व्यापक असर हुआ है। डाक विभाग के डाक निर्यात केंद्र से मखाना, रेडिमेड गार्मेंटस व सौंदर्य प्रसाधन के सामान की मिड्ल ईस्ट के देशों सहित अमेरिका व यूरोप के लिए बुकिंग लगभग ठप है। हलांकि डाक विभाग द्वारा इसको लेकर किसी तरह का दिशा निर्देश जारी नहीं किया गया है लेकिन डिमांड में कमी और भय के कारण भी लोग अपना सामान नहीं भेज रहे हैं। डाक निर्यात केंद्र से मखाना भेजने के लिए 14 लोग निबंधित हैं।
पांच, सात व 10 किलो के पैकेट में ही मखाना भेजे जाने की सुविधा है। हालांकि डाक के माध्यम से औसतन पांच से आठ क्विंटल मखाना ही सालभर में भेजा जाता है। ऑनलाइन डिमांड के आधार पर मखाना भेजा जाता है। रेडिमेड गार्मेंटस व सौंदर्य प्रसाधन दूसरे देशों तक भेजने के लिए 12 लोग निबंधित हैं। हालांकि रेडिमेड गार्मेंटस व सौंदर्य प्रसाधन सामग्री बहुत कम भेजी जाती है। वहीं सामान्य रूप से जिले से करीब 20 करोड़ का मखाना हर वर्ष अमेरिका, ओमान, यूएई, आस्ट्रेलिया, मलेशिया सहित अन्य यूरोपीय देशों को भेजा जाता है।मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति के कारण अमेरिका व यूरोप वाया दुबई सप्लाई चेन बाधित होने के कारण मखाना का 20 करोड़ का मखाना व्यवसाय पूरी तरह ठप है। कम मात्रा में मखाना कनाडा व आस्ट्रेलिया जरूर भेजा जा रहा है। विदेशों तक निर्यात नहीं हो पाने के कारण या तो मखाना व्यापारियों के गोदामों में डंप है या बंदरगाह पर फंसा हुआ है। डिमांड में कमी आने से मखाना का भाव भी 200 रूपये प्रति किलो तक गिर गया है। देश से विदेशों तक निर्यात होने वाले मखाना में जिले का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत तक है। स्थानीय स्तर पर उत्पादित मखाना की मांग भी अधिक है। अमेरिका द्वारा भारत पर टैरिफ लगाने के बाद व्यापारियों द्वारा एक्सपोर्टर के माध्यम से मखाना दुबई भेजा जाता था। वहां रि पैकिंग कर अमेरिका तक निर्यात होता था। दुबई पर भी ईरान के हमले के बाद यह सप्लाई चेन भी फिलहाल बंद है।क्या कहते हैं मखाना के कारोबारीमखाना कारोबारी मो. गुल्फराज ने बताया कि अमेरिका सहित खाड़ी देशों तक मखाना भेजते थे। सप्लाई चेन टूटने के कारण मखाना अमेरिका, ओमान, यूएई सहित अन्य देशों तक मखाना नहीं पहुंच पा रहा है। डिमांड कम होने से मखाना का भाव 750 से 650 रूपया प्रति किलो तक पहुंच गया है। डाक निर्यात केंद्र से बहुत कम मात्रा में ऑनलाइन डिमांड के आधार पर ही मखाना भेजा जाता है। सबसे अधिक मात्रा में एक्सपोर्टर के माध्यम से व्यापारी मखाना दूसरे देशों में भेजते हैं। अभी कनाडा व आस्ट्रेलिया ही मखाना भेजा जा रहा है।विपुल मिश्रा ने बताया कि युद्ध के कारण मखाना का भाव भी गिरा है। स्थानीय स्तर पर मखाना की अच्छी पैदावार व गुणवत्ता होने के बाद भी जी आई टैग नहीं मिल पाया है। तनाव की यही स्थिति बनी रही तो कारोबारियों को इतना नुकसान होगा कि वे उबर नहीं पाएंगे।कारोबारी रंजीत तिवारी ने बताया कि मिड्ल ईस्ट में तनाव के कारण डिमांड घटने से पिछले एक दशक में मखाना का भाव सबसे अधिक गिरा है। जैसे ही सप्लाय चेन खुलेगा तो फिर मांग भी बढ़ने लगेगी।वर्जनईरान, अमेरिका युद्ध के कारण डाक निर्यात केंद्र से मखाना सहित अन्य सामान का पार्सल खाड़ी के देशों सहित अमेरिका में नहीं हो पा रहा है। पिछले करीब एक माह से बुकिंग भी नहीं हो पा रही है। कुछ आवश्यक पार्सल को वाया मुंबई गंतव्य तक भेजा गया था। डाक निर्यात केंद्र से हर वर्ष करीब पांच से आठ क्विंटल तक मखाना भेजा जाता है।प्रसून कुमार, डाक अधीक्षक
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