उपेंद्र कुशवाहा के घर पहुंचे RSS के इंद्रेश कुमार, RLM के तीन विधायकों की बगावत सुलझा देगी BJP?
बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाने के बाद से रालोमो के चार में तीन विधायकों की एकजुट बगावत झेल रहे उपेंद्र कुशवाहा से मिलने आरएसएस के बड़े नेता इंद्रेश कुमार उनके घर गए थे। चर्चा है कि बीजेपी इस बगावत को सुलझा सकती है।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के तीन विधायकों माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह की एकजुट बगावत बगावत झेल रहे रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा से मिलने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बड़े नेता इंद्रेश कुमार पटना में उनके आवास गए थे। बेटे दीपक प्रकाश को नीतीश कुमार की सरकार में आरएलएम कोटे से मंत्री बनाने के बाद से विधायक उपेंद्र कुशवाहा को विधायक पत्नी स्नेहलता को छोड़कर पार्टी के बाकी तीन विधायकों ने पर्याप्त तनाव दे रखा है। कुशवाहा ने विधायकों की नाराजगी भरी खुली बयानबाजी के बाद मधुबनी विधायक माधव आनंद को पार्टी के विधायक दल का नेता बना तो दिया, लेकिन पार्टी के भविष्य को लेकर अटकलबाजी थम नहीं रही।
रालोमो के चार में तीन विधायकों के विद्रोही तेवर के बीच 13 जनवरी को इंद्रेश कुमार के उपेंद्र कुशवाहा के घर जाने को एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। यह भी रोचक है कि मुलाकात की फोटो ना तो उपेंद्र कुशवाहा ने छापी है और ना दीपक प्रकाश ने, बल्कि तस्वीरों को उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा और बहू साक्षी मिश्रा ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस मुलाकात के बाद से चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) उनके तीन विधायकों को समझाकर रालोमो के संकट को सुलझा सकती है। कुशवाहा की पार्टी पर टूट ही नहीं, पार्टी ही उनके हाथ से निकल जाने का खतरा है। 4 विधायकों में 3 एक साथ पार्टी के ऊपर दावा ठोक सकते हैं। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने जिस तरह से उद्धव ठाकरे के हाथ से शिवसेना छीन ली, उसी तरह के खतरे से कुशवाहा परिवार जूझ रहा है।
उपेंद्र कुशवाहा और रालोमो पर छाए संकट को लेकर भाजपा क्या स्टैंड लेती है, यह महत्वपूर्ण हो गया है। पटना के राजनीतिक गलियारों में कभी माधव आनंद के नेतृत्व में तीन विधायकों द्वारा दल को तोड़ने की चर्चा होती है, तो तभी यह कहा जाता है कि तीनों विधायक भाजपा में शामिल होकर विधानसभा में स्नेहलता को अकेले छोड़ देंगे। तीसरी चर्चा तीनों विधायकों द्वारा रालोमो पर कब्जा करने की भी चल रही है।
रालोमो में ऐसी तोड़-फोड़ नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के साथ जाने के लिए भी हो सकती है। जेडीयू के पास बिहार विधानसभा में बीजेपी के 89 विधायकों के मुकाबले 4 कम 85 एमएलए हैं। कांग्रेस के छह विधायकों में कुछ के जेडीयू के संपर्क में होने की बातें भी चल ही रही हैं। माना जा रहा है कि जेडीयू अपने झंडे के तले विधायकों की संख्या कम से कम भाजपा से आगे ले जाना चाहती है।
मकर संक्रांति तक शांत पड़ी बिहार की राजनीति में आने वाले दिनों में कैबिनेट विस्तार और फिर आगे राज्यसभा और विधान परिषद की सीटों के उप-चुनाव को लेकर हलचल तेज होने वाली है। कुशवाहा के सामने दल बचाने का जो संकट है, उससे राहत दिलाकर बीजेपी उनसे नए तरीके से मोल-भाव कर सकती है। ऐसी स्थिति बनी तो कुशवाहा को राज्यसभा या मंत्री बेटे दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद में से एक सीट चुनने भी कहा जा सकता है।
लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा से जुड़े रहे भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह के काराकाट में लड़ने से उपेंद्र कुशवाहा तीसरे नंबर पर चले गए थे। उस चुनावी माहौल की वजह से शाहाबाद एरिया में एनडीए को कई सीटों पर नुकसान हुआ था। तब से एनडीए में उपेंद्र कुशवाहा का भाव बढ़ा हुआ था। लेकिन पिछले डेढ़ साल में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के उभार ने कोइरी वोटरों के लिए उपेंद्र कुशवाहा पर बीजेपी की निर्भरता को कम कर दिया है।
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के गृहमंत्री बन जाने के बाद उनकी ताकत और उनके कद में इजाफा से कुशवाहा समाज में उनका रुतबा और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। उपेंद्र कुशवाहा के लिए एक तरफ तीन विधायकों का बवाल सिरदर्द है तो दूसरी तरफ सम्राट चौधरी के मुकाबले खुद को प्रासंगिक रखना चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है। ऐसे माहौल में इंद्रेश का उनके घर जाना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है। इसका असर क्या होगा, ये समय बताएगा।








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