बिहार में चल रही बिजली की सभी परियोजनाओं की होगी जांच, खराब उपकरण मिलने के बाद फैसला
उत्तर बिहार में मिली इस गड़बड़ी के बाद होल्डिंग कंपनी ने पूरे बिहार में बिजली की सभी परियोजनाओं की जांच का निर्णय लिया। तत्कालीन सीएमडी पंकज कुमार पाल के निर्देश पर मुख्य अभियंता मुर्तजा हेलाल की ओर से नॉर्थ व साउथ बिहार के एमडी को पत्र जारी किया गया।

बिहार के लोगों को गुणवत्तापूर्ण चौबीसो घंटे बिजली देने की योजना में खराब उपकरण लग रहे हैं। स्थानीय इंजीनियरों की लापरवाही के कारण मोतिहारी में पुनरोत्थान वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत हो रहे कामों में गुणवत्ता खराब होने का मामला उजागर हुआ है। इसके मद्देनजर बिजली कंपनी ने राज्य में चल रही सभी परियोजनाओं की गहनता से जांच कराने का निर्णय लिया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अप्रैल में आरडीएसएस के तहत हो रहे कार्यों की गुणवत्ता की जांच त्रि-स्तरीय कमेटी ने की थी। 11 से 13 अप्रैल तक हुई जांच में मोतिहारी अंचल में ट्रांसफॉर्मर व एरियल बंच केबल की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए। तब नॉर्थ बिहार कंपनी के तत्कालीन एमडी निलेश रामचंद्र देवरे ने ट्रांसफॉर्मर और केबल की जांच सेंट्रल पावर रिसर्च इंस्टीट्यूट भोपाल से जांच कराने का निर्णय लिया। सभी अंचलों को निर्देश दिया कि वे आरडीएसएस के तहत हो रहे कार्यों की जांच कराएं। इसके लिए एमडी ने अंचलवार सीलिंग कमेटी गठित की।
खराब उपकरण लगाने वाली एजेंसी डाली जाएगी काली सूची में:
उत्तर बिहार में मिली इस गड़बड़ी के बाद होल्डिंग कंपनी ने पूरे बिहार में बिजली की सभी परियोजनाओं की जांच का निर्णय लिया। तत्कालीन सीएमडी पंकज कुमार पाल के निर्देश पर मुख्य अभियंता मुर्तजा हेलाल की ओर से नॉर्थ व साउथ बिहार के एमडी को पत्र जारी किया गया। पत्र में कहा गया कि केंद्रीय, राज्य व बाह्य संपोषित योजनाओं की पूरी जांच कराई जाए।उपकरणों की जांच के लिए कंपनी ने एक मानक तय किए और उसी के अनुसार उसकी जांच कराने को कहा गया है।
खराब उपकरण बदलने के लिए कहा गया
कंपनी ने सभी तरह के पोल, पावर ट्रांसफॉर्मर, मीटर, वितरण ट्रांसफॉर्मर, सर्किट ब्रेकर्स, एबी केबल, ओवरहेड कंडक्टर, इंसुलेटर की जांच कराने को कहा है। दूसरा के फेल होने पर सभी उपकरण को बदलने को कहा गया है। कंपनी ने साफ कहा है कि अगर कोई उपकरण लग गए हैं और उसकी गुणवत्ता में संदेह है तो उसे हटाकर जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट के बाद खराब उपकरण लगाने वाली एजेंसी को पांच साल तक ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा। साथ ही उपकरणों के लाने व ले जाने का खर्च एजेंसियों से ही वसूला जाएगा।




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