Bihar Teacher: सरकारी गुरुजी के लिए खुशखबरी, तबादले का रास्ता साफ; इस माह में होगा मास ट्रांसफर
बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले भी शिक्षक स्थानांतरण नियमावली कैबिनेट में भेजी गई थी, लेकिन तब इसे लौटा दिया गया था।नई संशोधित नियमावली के आधार पर जून में बड़े पैमाने पर शिक्षकों के तबादले होंगे।

बिहार में सभी कोटि के स्कूल शिक्षकों के स्थानांतरण की नई नियमावली अप्रैल से लागू होगी। शिक्षा विभाग विभिन्न कोटि के शिक्षकों के तबादले के लिए पहले से बनी नियमावली को संशोधित कर रहा है। माना जा रहा है कि मार्च में इस नियमावली को अंतिम रूप से संशोधित कर लिया जाएगा। इसके बाद राज्य कैबिनेट से मंजूरी लेकर इसे लागू किया जाएगा। नई संशोधित नियमावली के आधार पर जून में बड़े पैमाने पर शिक्षकों के तबादले होंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ माह पहले भी शिक्षक स्थानांतरण नियमावली कैबिनेट में भेजी गई थी, लेकिन तब इसे लौटा दिया गया था। क्योंकि इसमें कई संशोधन की दरकार थी। अगस्त-सितंबर में तैयार प्रारूप में नियुक्ति की तिथि से अगले पांच साल तक दूसरे स्कूलों में तबादला नहीं करने का प्रावधान था। शिक्षक संघों ने इसका विरोध किया था। अब इसे तीन वर्ष किये जाने की तैयारी है। नई नीति में असाध्य और गंभीर बीमारी के साथ ही विशेष परिस्थिति में तीन साल के पहले भी तबादला हो सकेगा। इसके दायरे में राज्य के लगभग छह लाख शिक्षक होंगे।
नई नीति के प्रारूप के अनुसार जिलास्तरीय शिक्षकों के तबादले के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय कमेटी होगी। इसमें उप विकास आयुक्त, एडीएम स्तर के एक अधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी शामिल रहेंगे। वहीं, प्रधानाध्यापक सहित प्रमंडल स्तर के शिक्षकों के तबादले के लिए प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में छह सदस्यीय कमेटी होगी। इसमें क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (आरडीडीई) सहित प्रमंडल स्तर के अधिकारी होंगे। इन कमेटियों की अनुशंसा के आधार पर शिक्षकों का तबादला होगा।
बिहार में तीन लाख से अधिक नए शिक्षकों की बहाली के बाद से सुविधाजनक तबादले की चर्चा चल रही है। नियोजित शिक्षकों को बीपीएसएसी एग्जाम के माध्यम से स्थाई शिक्षक बनाया गया। उन्हें दूसरे जिलो या आवास से दूरी वाले स्कूलों में पदस्थापित किया गया। सरकार ने विधानसभा चुनाव से पहले तबादले का आश्वासन दिया था। बड़ी संख्या में हेडमास्टर और हेड टीचर भी तबादले के इंतजार में हैं। सरकार सबको एक साथ राहत देने वाली है। लंबे समय से विभिन्न शिक्षक संगठनों कीऔर से इसकी मांग सरकार से की जा रही है। खासकर जब से ऑनलाइन हाजिरी का सिस्टम लागू हो गया है तब से टांस्फर की मांग और तेज हो गई थी। दूरदराज इलाकों में रहने वाले शिक्षकों के लिए समय से स्कूल पहुंचकर हाजिरी बनाना मुश्किल हो गया। जल्दबाजी में कई शिक्षक गंभीर हादसों के शिकार हुए। कई शिक्षकों की मौत हो गई वहीं कई गंभीर तौर पर विकलांग हो गए।




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