fight between Kushwanshi and yaduvanshi nda want to stop rjd and win jagdishpur assembly seat जगदीशपुर विधानसभा: कुशवंशी और यदुवंशी के बीच मुकाबला, RJD के विजय रथ को रोकने के लिए NDA बेकरार, Bihar Hindi News - Hindustan
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जगदीशपुर विधानसभा: कुशवंशी और यदुवंशी के बीच मुकाबला, RJD के विजय रथ को रोकने के लिए NDA बेकरार

बिहार चुनाव: राजद ने 2015 में अपना सीटिंग प्रत्याशी बदला, फिर भी जीत मिलती रही है। 2020 में तो एनडीए के प्रत्याशी को श्रीभगवान सिंह ने तीसरे स्थान पर खिसका दिया और जदयू के टिकट से वंचित होने पर लोजपा के सिंबल पर लड़कर भी मुख्य मुकाबले में रहे थे।

Sun, 28 Sep 2025 06:00 AMNishant Nandan हिन्दुस्तान टीम
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जगदीशपुर विधानसभा: कुशवंशी और यदुवंशी के बीच मुकाबला, RJD के विजय रथ को रोकने के लिए NDA बेकरार

बिहार चुनाव: देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति के अमर योद्धा वीरबांकुड़ा बाबू कुंवर सिंह की धरती जगदीशपुर का राजनीतिक और सामाजिक समीकरण प्रारंभ से ही जुदा रहा है। पिछले तीन चुनावों में राजद यहां जीत की हैट्रिक लगा चुका है और इस बार चौका लगाने में जुटा है। वहीं एनडीए की ओर से जदयू राजद का विजयी रथ रोकने की हरसंभव कोशिश कर रहा है।

चुनाव के पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस साल यहां दो बार सरकारी कार्यक्रमों में आ चुके हैं। महागठबंधन से राजद के कोटे में एक बार फिर यह सीट रहने की उम्मीद है, जबकि एनडीए में यह सीट अभी जदयू के खाते में है। इस बार जनसुराज भी सक्रिय है। बता दें कि भोजपुर के जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र में जिले के पश्चिम और दक्षिण इलाके के गांवों और नगर निकाय को समेटे हुए है। नये परिसीमन में यह विधानसभा क्षेत्र जगदीशपुर प्रखंड और नगर समेत पीरो की 16 पंचायतों को मिलाकर बना है।

कुशवंशी और यदुवंशी के बीच होता रहा है मुकाबला, रघुवंशी निर्णायक

कुछेक अपवादों को छोड़ दें तो आम तौर पर यहां कुशवंशी और यदुवंशी के बीच मुकाबला होता रहा है। रघुवंशी जीत-हार में अहम भूमिका निभाते रहे हैं तो कुछ बार ताज हासिल करने में भी कामयाब रहे हैं। रघुवंशी निर्दलीय भी जीतने में सफल रहे हैं। वैसे कांग्रेस के शासनकाल और जनता पार्टी की लहर के समय में भी यहां से निर्दलीय जीत का झंडा बुलंद करते रहे। 1985 में लोकदल के टिकट पर पूर्व मंत्री रहे हरिनारायण सिंह को जीत मिली। वहीं 1990 में पहली बार मैदान में उतरी आईपीएफ ( अब भाकपा माले ) के प्रत्याशी के तौर पर श्रीभगवान कुशवाहा ने जीत का परचम लहराया था।

इसके बाद से यहां जातीय समीकरण हावी होता गया और जनता दल की लहर में हरिनारायण सिंह ने 1995 के चुनाव में जीत दर्ज की। तब तक श्रीभगवान कुशवाहा माले छोड़ नीतीश कुमार के साथ जा चुके थे और साल 2000 के चुनाव में समता पार्टी के टिकट पर उन्हें जीत भी मिली। इसके बाद भाजपा और जदयू का गठबंधन होने पर श्रीभगवान कुशवाहा ने जीत का सिलसिला जारी रखा और 2005 के दोनों ही चुनावों में उन्हें जीत मिली।

एनडीए की सरकार में लव-कुश समीकरण का ध्यान रखते हुए उन्हें मंत्री भी बनाया गया। हालांकि 2008 में नया परिसीमन बनने के बाद से यहां राजद ने अपनी मजबूत पकड़ बनाई। 2010 के बाद से तो जातीय समीकरण का लाभ लेते हुए राजद जीत की हैट्रिक लगा चुका है। रामविशुन सिंह लोहिया को राजद ने दो बार मौका दिया और वे दोनों ही चुनाव जीतने में सफल रहे। नये गठबंधन में 2015 में जदयू का साथ मिला तो 2020 में माले के साथ मिलकर लड़े राजद को और मजबूती मिली। माले का यहां अपना जनाधार रहा है।

श्रीभगवान सिंह कुशवाहा जगदीशपुर में लगातार तीन जीत के साथ चार बार चुनावों में विजयी रहे हैं। पहली बार आईपीएफ तो बाद के तीन चुनाव नीतीश कुमार के साथ रहकर जीते। हालांकि 2008 में नया परिसीमन बनने के बाद से उन्हें एक बार भी जीत नहीं मिली है। तब से तीनों चुनावों में राजद जीत दर्ज करता रहा है। राजद ने 2015 में अपना सीटिंग प्रत्याशी बदला, फिर भी जीत मिलती रही है। 2020 में तो एनडीए के प्रत्याशी को श्रीभगवान सिंह ने तीसरे स्थान पर खिसका दिया और जदयू के टिकट से वंचित होने पर लोजपा के सिंबल पर लड़कर भी मुख्य मुकाबले में रहे थे।

जगदीशपुर इलाके से निर्वाचित पहली विधायक सुमित्रा देवी को बिहार की पहली महिला कैबिनेट मंत्री बनने का गौरव हासिल है। हालांकि 1962 में मंत्री बनने के दौरान वह आरा से चुनी गई थीं। वे अलग-अलग जगहों से छह बार विधायक चुनी गयीं। बाद में पहली महिला लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार की सास बनीं। 1985 और 1995 में क्रमश : लोक दल व जनता दल से चुने गये हरि नारायण सिंह मंत्री बने। वहीं चार बार विधायक चुने गये श्रीभगवान सिंह भी मंत्री बने।

विधायक रामविशुन सिंह लोहिया ने कहा कि जगदीशपुर विधानसभा क्षेत्र में विकास के कई कार्य हुए। इस दौरान जगदीशपुर का सर्वांगीण विकास हुआ। बिजली और सड़क से लेकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई कार्य हुए। सिंचाई के लिए नहरों की सफाई करा पानी अंतिम छोर तक पहुंचाने का काम हुआ। नगर के सात तालाबों का विकास हुआ। क्षेत्र में विकास किए हैं और आगे और करेंगे। जगदीशपुर के विकास के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं l

साल- प्रत्याशी एवं पार्टी

1952- सुमित्रा देवी (कांग्रेस)

1957- सुमित्रा देवी (कांग्रेस)

1962- सूकर राम (प्रसोपा)

1967- शिवपूजन राय (कांग्रेस)

1969 -सत्यनारायण सिंह (निर्दलीय)

1972- शिवपूजन वर्मा (कांग्रेस )

1977- सत्यनारायण सिंह (निर्दलीय)

1980- वीर बहादुर सिंह (निर्दलीय)

1985- हरिनारायण सिंह (लोक दल)

1990 श्रीभगवान सिंह (आईपीएफ)

1995- हरिनारायण सिंह (जनता दल)

2000- श्रीभगवान सिंह (समता पार्टी)

2005- (फरवरी) श्रीभगवान सिंह (जदयू)

2005(अक्टूबर) श्रीभगवान सिंह (जदयू)

2010 दिनेश कुमार सिंह (राजद)

2015ृ- रामविशुन सिंह (राजद)

2020- रामविशुन सिंह (राजद)

वादे जो पूरे हुए

1. ककिला में राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज का निर्माण और संचालन शुरू

2. हरिगांव में मोहित सरोवर और दावां, ककिला, धर्मपीपरा, उतरदाहां, अरैला, जमुआंव में कई विकास कार्य हुए

3. बिहिया-पीरो स्टेट हाईवे का जीर्णोद्धार

4. हेतमपुर, डोमन डीहरा, कटरिया, दुल्हिनगंज, कौंरा बरांव व हरिगांव सुंदरा में पावर सब स्टेशन का निर्माण

प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशी श्रीभगवान सिंह कुशवाहा ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए विधायक को जो राशि मिली है, उसका भी सही से सदुपयोग नहीं हो पाया है। जब से हम एमएलसी बने, तब से विशेष आग्रह कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दो बार क्षेत्र में बुलाकर यहां विकास की लकीर खींचवाने की कोशिश की है। मौजूदा विधायक राज्य सरकार की ओर से किये गये विकास को अपना विकास बता रहे हैं। वर्तमान विधायक ने क्षेत्र में विकास का कोई काम नहीं किया है। -

काम जो नहीं हो सके

1. जगदीशपुर में बाबू वीर कुंवर सिंह के किले को पर्यटन स्थल का दर्जा नहीं मिला।

2. जगदीशपुर में सरकारी और प्राइवेट बस पड़ाव का निर्माण नहीं हो सका।

3. जगदीशपुर में अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय का निर्माण नहीं हो सका।

4. सिंचाई के लिए बंद पड़े कई सरकारी नलकूपों को चालू नहीं कराया जा सका।

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