जज के अलावा किसी पर भरोसा नहीं, नीट छात्रा मर्डर की सीबीआई जांच से संतुष्ट नहीं परिवार
पटना के हॉस्टल में जहानाबाद की नीट छात्रा की मौत मामले की जांच सरकार ने सीबीआई को सौंपने का फैसला लिया है। हालांकि, छात्रा के परिवार वाले इससे संतुष्ट नहीं हैं। परिजन का कहना है कि उन्हें किसी पर भरोसा नहीं है।

बिहार की राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की पढ़ाई कर रही छात्रा की हत्या के मामले की जांच अब सीबीआई करेगी। नीतीश सरकार ने यह केस केंद्रीय जांच एजेंसी को ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। हालांकि, जहानाबाद की छात्रा के परिजन इससे संतुष्ट नहीं हैं। परिवार वालों का कहना है कि उन्हें किसी पर भरोसा नहीं है। परिजन के अनुसार, उन्होंने सीबीआई जांच की मांग नहीं की थी। बल्कि वह सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज की निगरानी में एक निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
छात्रा के परिवार के एक सदस्य ने शनिवार को एएनआई से बातचीत में मौत के पीछे प्रशासन की मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "हम संतुष्ट नहीं हैं। इसमें प्रशासन, हॉस्टल और अस्पताल की मिलीभगत है। सरकार मामले को दबाने की कोशिश कर रही है।बल्कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की थी। DGP ने कहा कि हमारी बेटी ने आत्महत्या की है। हमें किसी पर भरोसा नहीं है। बिहार पुलिस सरकार के दबाव में है।"
पुलिस जांच से परिवार संतुष्ट नहीं, इसलिए CBI को ट्रांसफर हुआ केस : सरकार
नीतीश सरकार में गृह मंत्री एवं डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि नीट छात्रा की हत्या के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आग्रह किया गया है। इस घटना का पारदर्शी तरीके से खुलासा होना चाहिए। वहीं, डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार की मंशा साफ है। हमने ईमानदारी से जांच करने की कोशिश की। पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं था, इसलिए मामले को CBI को सौंपने का फैसला लिया गया।
क्या है मामला?
पटना के हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर ही जहानाबाद की छात्रा बीते 6 जनवरी को शंभू गर्ल्स हॉस्टल स्थित अपने कमरे में अचेत पाई गई थी। 11 जनवरी को उसकी निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस इसे पहले सुसाइड बता रही थी। मगर परिजन ने रेप और हत्या की आशंका जताई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जब यौन उत्पीड़न की बात सामने आई तो मामले ने तूल पकड़ लिया।
विरोध बढ़ने पर बिहार पुलिस ने इस केस की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जांच का दायरा बढ़ा तो छात्रा के कपड़े से स्पर्म पाया गया। इसकी डीएनए जांच के लिए परिजन समेत कई लोगों के डीएनए सैंपल लिए गए। परिजन का आरोप है कि मामले को दबाने के लिए छात्रा के कमरे से सबूत मिटा दिए गए। एसआईटी इस मामले का जल्द खुलासे का दावा कर ही रही थी कि केस सीबीआई को सौंप दिया गया।
(एजेंसी इनपुट के साथ)




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