तेजस्वी दिल्ली गए; सोमवार या मंगलवार तक RJD में शामिल होंगे सूरजभान सिंह; मोकामा से बीवी लड़ेंगी
मोकामा के बाहुबली और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह का राजद में शामिल होना सोमवार या मंगलवार तक टल गया है। तेजस्वी के दिल्ली जाने के कारण इसमें देरी हो रही है। सूरजभान के परिवार में पत्नी और भाई कुल तीन पूर्व सांसद हैं।

मोकामा के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह का राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) में शामिल होना सोमवार या मंगलवार तक के लिए टल गया है। सूरजभान समेत उनके परिवार के तीनों पूर्व सांसद शनिवार को राजद में शामिल होने वाले थे, लेकिन महागठबंधन के सीट बंटवारे में उलझे तेजस्वी ने इसे दिल्ली से लौटने के बाद तक के लिए टाल दिया है। तेजस्वी यादव अपने पिता लालू यादव और मां राबड़ी देवी के साथ रविवार को दिल्ली चले गए। दिल्ली में नौकरी के बदले जमीन केस में 13 अक्टूबर, सोमवार को सबकी पेशी है। अब तेजस्वी सोमवार की शाम तक पटना लौटेंगे तो उसी दिन शाम या अगले दिन सूरजभान का परिवार राजद का दामन थाम सकता है। चर्चा है कि सूरजभान सिंह की पत्नी वीणा देवी मोकामा विधानसभा से अनंत सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं। वीणा मुंगेर से एक बार लोजपा की सांसद रही हैं।
सूरजभान के साथ उनकी पत्नी वीणा देवी और भाई चंदन सिंह समेत अन्य नेता भी राजद में जा रहे हैं। सूरजभान राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (आरएलजेपी) के संसदीय बोर्ड अध्यक्ष हैं। सूत्रों के मुताबिक लालू यादव ने रालोजपा के अध्यक्ष पशुपति पारस को अपनी पार्टी का विलय करने का प्रस्ताव दिया है। सूत्रों का कहना है कि विलय हो या ना हो, सूरजभान का परिवार दोनों सूरत में राजद की सीधी सदस्यता लेगा। पशुपति पारस कुछ और सीटों के साथ-साथ अलौली सीट से बेटे के लिए गठबंधन के तहत टिकट मांग रहे हैं। ऐसा करने के लिए तेजस्वी को रामवृक्ष सदा का टिकट काटना होगा जो अलौली से राजद के मौजूदा विधायक हैं।
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मोकामा से पांच बार के विधायक अनंत सिंह के खिलाफ सूरजभान की पत्नी वीणा देवी के लड़ने की चर्चा है। सूरजभान जेल में रहकर साल 2000 में अनंत सिंह के बड़े भाई दिलीप सिंह को बड़े मार्जिन से हराकर मोकामा से निर्दलीय विधायक बने थे। दिलीप सिंह तब 10 साल से मोकामा में जीत रहे थे और राजद सरकार में कद्दावर मंत्री थे।
आरजेडी के वोट बैंक को मुस्लिम-यादव से आगे ले जाते दिख रहे तेजस्वी ने लोकसभा चुनाव में कुशवाहा वोट में काफी सेंधमारी की थी, जिस कारण शाहाबाद और मगध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ज्यादातर सीटें हार गई थी। तेजस्वी तब से राजद को ए टू जेड की पार्टी बता रहे हैं। 2020 में तेजस्वी ने राजद के 144 कैंडिडेट में सिर्फ एक भूमिहार को टिकट दिया था, वो अनंत सिंह थे। इस चुनाव में कई भूमिहार नेताओं को राजद से लड़ाने की संभावना है। भूमिहार जाति के कई नेता राजद में शामिल हो रहे हैं। सूरजभान खुद और पूर्व सांसद पत्नी और भाई की लोकसभा सीट का फैलाव सात जिलों में है, जहां भूमिहार बड़ी संख्या में हैं।
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साल 2000 में मोकामा से निर्दलीय विधायक बने सूरजभान बाद में रामविलास पासवान के साथ हो गए और एक समय लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के ताकतवर नेता थे। 2004 में बेगूसराय जिले की बलिया लोकसभा सीट से लोजपा के टिकट पर सूरजभान सांसद बने। सजायाफ्ता होने के बाद जब खुद नहीं लड़ सके तो 2014 में पत्नी वीणा देवी को लोजपा के टिकट पर मुंगेर सीट से लड़ाया और सांसद बनाया। 2019 में उनके भाई चंदन सिंह नवादा लोकसभा सीट से लोजपा के टिकट पर सांसद बने। इस तरह उनके परिवार में कुल तीन पूर्व सांसद हैं।
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रामविलास पासवान के निधन के बाद जब पारस ने पार्टी तोड़ी तो सूरजभान और चंदन ने चिराग पासवान का साथ नहीं दिया। 2024 के लोकसभा चुनाव में जब भाजपा ने पारस को किनारे लगा दिया तो पारस के साथ सूरजभान परिवार पर भी राजनीतिक संकट छा गया। सूरजभान सिंह के सामने रालोजपा में रहकर घर बैठने या राजद के साथ जाकर मैदान में बने रहने का विकल्प था। सूरजभान ने तेजस्वी को चुना और कल से वो राजद की राजनीति करेंगे। राजद के शासनकाल पर बाहुबलियों की समानांतर सरकार के कारण ‘जंगलराज’ का आरोप लगता है।
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