Dipankar Bhattacharya cautions Congress to bite it could chew says fight lesser seats than 2020 to win more like 2015 औकात से ज्यादा सीट ना मांगें; कांग्रेस को CPI-ML के दीपांकर की दो टूक नसीहत- लड़ो कम, जीतो ज्यादा, Bihar Hindi News - Hindustan
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औकात से ज्यादा सीट ना मांगें; कांग्रेस को CPI-ML के दीपांकर की दो टूक नसीहत- लड़ो कम, जीतो ज्यादा

बिहार चुनाव से पहले दोनों बड़े गठबंधन में सीट बंटवारा दो-दो बड़े दलों के बीच फंसा हुआ है। विपक्षी महागठबंधन में सीपीआई-एमएल ने 2015 और 2020 के नतीजों की याद दिलाकर कांग्रेस को नसीहत दी है कि वो औकात से ज्यादा सीटें ना मांगे।

Fri, 19 Sep 2025 03:56 PMRitesh Verma लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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औकात से ज्यादा सीट ना मांगें; कांग्रेस को CPI-ML के दीपांकर की दो टूक नसीहत- लड़ो कम, जीतो ज्यादा

बिहार चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन (MGB) दोनों में सबसे बड़े दोनों दलों के बीच ही सीट बंटवारे पर बात नहीं बन पा रही है, इसलिए सहयोगी दल भी परेशान हैं। एनडीए की सीट शेयरिंग पर सहमति बनाने की कोशिश में गुरुवार को पटना में गृह मंत्री अमित शाह और सीएम नीतीश कुमार के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बड़े नेताओं की मौजूदगी में चर्चा हुई। इस बीच महागठबंधन के सबसे बड़े वामंपथी दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी लेनिनिवादी (CPI-ML) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस को नसीहत दी है कि वो औकात से ज्यादा सीट ना मांगे और इसकी चिंता करे कि भले सीटें कम लड़नी पड़े, लेकिन कैसे ज्यादा जीती जाए।

भाकपा-माले के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस द्वारा 2020 की तरह फिर 70 सीटों की मांग को लेकर चल रही चर्चाओं पर कहा- “कुछ कांग्रेस नेताओं द्वारा लगभग 70 सीटों की मांग की खबरें मैंने देखी हैं। लेकिन पिछली बार वो 70 सीटों पर लड़े और जीत सिर्फ सीट 19 ही पाए। 2015 में कांग्रेस 40 सीट लड़ी और 27 जीती थी। वो अच्छा स्ट्राइक रेट था। लेकिन 2020 में वो 70 सीट लड़ी… जो उनकी औकात (लड़ने की क्षमता) से ज्यादा थी। इसलिए मुझे लगता है कि इन सबके बीच संतुलन होना चाहिए।”

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दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि कम सीटें लड़कर बेहतर प्रदर्शन करना और ज्यादा सीटें जीतना विपक्षी गठबंधन के हित में हैं। उन्होंने कहा- “शायद पिछली बार से कम सीटें लड़ना लेकिन ज्यादा सीटें जीतना, बेहतर प्रदर्शन करना… कांग्रेस के हित में होगा और निश्चित रूप से इंडिया गठबंधन के फायदे में होगा।”

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याद दिला दें कि 2020 के चुनाव में मात्र 12 सीटों के अंतर से तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनने से चूक गए थे। राजद के कई नेता इसके लिए कांग्रेस को जिम्मेवार मानते हैं जो 70 सीटों पर लड़ी लेकिन सिर्फ 19 जीतकर आई। सीपीआई-माले मात्र 19 सीट लड़ी और 12 जीत गई। राजद ने 144 लड़कर 75 सीट निकाली थी। उस चुनाव में कांग्रेस का स्ट्राइक रेट 27 फीसदी रहा, जबकि राजद का 52 परसेंट, सीपीआई-माले का 63 परसेंट, सीपीएम का 50 परसेंट और सीपीआई का 33 फीसदी रहा था।

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कांग्रेस के नेता 2020 में ज्यादा सीटें लड़कर भी बहुत कम जीतने का बचाव इस तर्क से करते हैं कि राजद ने उन्हें ज्यादातर वो सीटें दे दीं, जो निकालने के लिहाज से खराब थी और अच्छी सीटें खुद के पास रख ली। राजद चाहती है कि इस बार खेल खराब ना हो, इसके लिए कांग्रेस उतनी और वही सीटें ले, जो उसे लगता है कि वो ठीक से लड़ सकती है, निकाल सकती है।

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