Deepak prakash will not countinue as minister nda not make him candidate in mlc election upendra kushwaha दीपक प्रकाश का मंत्री बने रहना भी मुश्किल, NDA में नहीं मिली सीट; रालोमो की राह में क्या बना रोड़ा, Bihar Hindi News - Hindustan
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दीपक प्रकाश का मंत्री बने रहना भी मुश्किल, NDA में नहीं मिली सीट; रालोमो की राह में क्या बना रोड़ा

विधानसभा कोटे से हो रहे इस चुनाव में कम संख्या बल रालोमो के लिए राह का रोड़ा बन गई है। सीट की दावेदारी और जीत का गणित भी उसके पक्ष में नहीं है। 9 सीटों पर हो रहे चुनाव में एक प्रत्याशी को जीत के लिए 25 विधायकों का समर्थन चाहिए।

Sun, 7 June 2026 01:40 PMNishant Nandan हिन्दुस्तान ब्यूरो, पटना
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दीपक प्रकाश का मंत्री बने रहना भी मुश्किल, NDA में नहीं मिली सीट; रालोमो की राह में क्या बना रोड़ा

बिहार पंचायती राज मंत्री व उपेन्द्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश के मंत्री बने रहने पर संशय उत्पन्न हो गया है। विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए ने अपने सभी नौ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा कर दी है। इसमें दीपक प्रकाश को जगह नहीं मिली है। इसके बाद बिना किसी सदन की सदस्यता के मंत्री बने दीपक के पास पद छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखता है। निकट भविष्य में भी विधानपरिषद का कोई चुनाव नहीं होना है। राज्यपाल के मनोनयन वाली सीटों पर अगले साल चुनाव है। जबकि, नितिन नवीन के इस्तीफे से रिक्त हुई बांकीपुर विधानसभा भाजपा की पारंपरिक सीट है। यहां से भी रालोमो के लिए गुंजाइश नहीं है।

बिहार विधानसभा कोटे से विप की दस सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। इनमें नौ सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव है, जबकि एक उप चुनाव की सीट पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफा से रिक्त हुई है। विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार इन दस सीटों में नौ सीटों पर एनडीए की जीत पक्की है जबकि एक सीट महागठबंधन के खाते में जाएगी। एनडीए के नौ उम्मीदवारों के चयन के बाद अब एनडीए में किसी और के लिए कोई स्थान शेष नहीं रह गया है। एनडीए के सभी घोषित प्रत्याशी शीर्ष नेताओं की मौजूदगी में सोमवार को नामांकन करेंगे।

छह माह के अंदर सदन सदस्य बनना अनिवार्य

नियमानुसार कोई व्यक्ति बगैर किसी सदन का सदस्य रहे मंत्री तो बन सकता है, लेकिन उसे छह माह के अंदर किसी न किसी सदन का सदस्य बनना होता है। दीपक प्रकाश पहली बार नीतीश सरकार में मंत्री बने लेकिन वह सरकार भंग हो गई। फिर, सम्राट सरकार में दीपक प्रकाश रालोमो कोटे से 7 मई 2026 को मंत्री बने। उस समय वे किसी सदन के सदस्य नहीं थे। माना जा रहा था कि उन्हें विप के लिए होने वाले उपचुनाव में एनडीए की एक सीट मिल ही जाएगी।

एनडीए ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की और लोजपारा ने एक प्रत्याशी उतार दिया। संसदीय मामलों के विशेषज्ञ वशिष्ठदेव तिवारी कहते हैं कि मंत्री दीपक प्रकाश को इस्तीफा देना ही होगा। वे किसी सदन का सदस्य रहे बगैर मंत्री नहीं रह सकते। मंत्रिपरिषद में बने रहने के लिए छह माह अर्थात 7 नवम्बर के पहले उन्हें किसी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति में यह संभव नहीं दिखता।

उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा, अभी प्रतीक्षा कीजिए

शनिवार को लोजपा (रा) द्वारा अपने उम्मीदवार की घोषणा के बाद भी रालोमो ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। पत्रकारों के दीपक प्रकाश की उममीदवारी से जुड़े सवाल पर पार्टी सुप्रीमो उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा है कि वे एनडीए नेताओं के संपर्क में हैं। अभी नामांकन में दो दिन का समय है। प्रतीक्षा कीजिए।

विस में संख्या बल रालोमो की राह में रोड़ा

विधानसभा कोटे से हो रहे इस चुनाव में कम संख्या बल रालोमो के लिए राह का रोड़ा बन गई है। सीट की दावेदारी और जीत का गणित भी उसके पक्ष में नहीं है। 9 सीटों पर हो रहे चुनाव में एक प्रत्याशी को जीत के लिए 25 विधायकों का समर्थन चाहिए। एनडीए के पास अभी 201 विधायक हैं। अर्थात उसके 8 प्रत्याशी आसानी से जीत जाएंगे जबकि 9वें प्रत्याशी के लिए महज एक वोट बचेगा, जबकि विपक्ष को एक सीट पर जीत के लिए पर्याप्त समर्थन है। वैसे भी रालोमो के पास 4, हम के पास 5 जबकि लोजपारा के 19 विधायक हैं। ऐसे में लोजपा (रा) की अनदेखी कर एनडीए हम या रालोमो को सीट नहीं दे सकता था।

राजद प्रत्याशी भी सोमवार को नामांकन करेंगे। हालांकि शनिवार देर शाम तक महागठबंधन की ओर से प्रत्याशी की घोषणा नहीं की गई। राजद सुप्रीमो शनिवार रात तक सिंगापुर से वापस आ जाएंगे। उसके बाद ही प्रत्याशी के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी अपने बड़े बेटे तेजप्रताप यादव को मनाने में जुटी हैं। शनिवार को मुलाकात के दौरान भी उन्होंने प्रयास किया। अभी तक तेजप्रताप अपनी पार्टी जनशक्ति जनता दल के टिकट पर लड़ने पर अड़े हुए हैं। इनके अलावा सुनील सिंह और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम भी प्रमुख दावेदारों में से हैं।

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