Shivajinagar Faces Water Crisis and Incomplete Infrastructure in Darbhanga शिवाजीनगर में खराब चापाकल व गिरते जलस्तर से संकट गहराया, Darbhanga Hindi News - Hindustan
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शिवाजीनगर में खराब चापाकल व गिरते जलस्तर से संकट गहराया

दरभंगा नगर निगम के वार्ड 22 के शिवाजीनगर में लोग पेयजल संकट, अधूरी सड़कें और जल निकासी की समस्याओं का सामना कर रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम टैक्स तो वसूलता है, लेकिन सुविधाओं का अभाव है।

Thu, 19 March 2026 10:06 PMNewswrap हिन्दुस्तान, दरभंगा
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शिवाजीनगर में खराब चापाकल व गिरते जलस्तर से संकट गहराया

दरभंगा नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 22 स्थित शिवाजीनगर के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। घनी आबादी वाले इस इलाके में पेयजल संकट, अधूरी सड़कें और लंबे समय से अटके नाला निर्माण ने लोगों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम नियमित रूप से टैक्स तो वसूल करता है, लेकिन सुविधाओं के मामले में क्षेत्र पूरी तरह उपेक्षित है। शिवाजीनगर की गलियों में रहने वाले लोगों का कहना है कि वर्षों से वे मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।

क्षेत्र में न तो पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था है और न ही जल निकासी की समुचित व्यवस्था। इसके कारण गर्मी के मौसम में पानी की समस्या गंभीर हो जाती है, जबकि बारिश के दिनों में जलजमाव और गंदगी लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती है। स्थानीय लोगों के अनुसार शिवाजीनगर में पेयजल संकट लंबे समय से बना हुआ है। मोहल्ले में लगे कई सरकारी चापाकल खराब पड़े हैं और जो चल भी रहे हैं, उनसे पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की किल्लत और बढ़ जाती है, जिससे लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। मोहल्ले के कई परिवारों को दूर-दूर से पानी लाकर अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करनी पड़ती हैं। महिलाओं और बच्चों को सुबह से ही पानी की व्यवस्था में लगना पड़ता है। कई बार तो लोगों को निजी बोरिंग या टैंकर का सहारा लेना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते यहां जलापूर्ति की स्थायी व्यवस्था कर दी जाती, तो आज यह समस्या इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने बताया कि पहले इस क्षेत्र में जलमीनार निर्माण का प्रस्ताव था, लेकिन स्थानीय राजनीतिक खींचतान के कारण वह योजना दूसरे वार्ड में स्थानांतरित कर दी गई। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि जलमीनार का निर्माण अगर शिवाजीनगर में ही हुआ होता तो आज पूरे इलाके में पेयजल की समस्या काफी हद तक समाप्त हो चुकी होती। लेकिन वर्चस्व की लड़ाई और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण इस योजना को दूसरे वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस फैसले का खामियाजा आज पूरे इलाके के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन और जनप्रतिनिधि गंभीरता दिखाते तो यह समस्या वर्षों पहले ही समाप्त हो सकती थी। हस्तक्षेप करने की मांग:लोगों का कहना है कि नगर निगम को इस मामले में तत्काल पहल करते हुए स्थगित जलापूर्ति योजना को दोबारा लागू करना चाहिए। यदि मोहल्ले में पाइपलाइन के माध्यम से नियमित जलापूर्ति शुरू हो जाए तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती है। वहीं, दूसरी ओर यहां आवारा पशु और बंदर के आतंक से भी लोग परेशान है। इस समस्या को भी दूर करने की जरूरत है। यहां के लोगों की सुविधा के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी बनना चाहिए।अधूरा नाला निर्माण लोगों के लिए बना मुसीबत:पेयजल संकट के अलावा शिवाजीनगर के लोगों के सामने जलनिकासी की समस्या भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। मोहल्ले में बड़े नाले का निर्माण कार्य महीनों से चल रहा है, लेकिन इसकी रफ्तार बेहद धीमी है। नाला निर्माण के कारण कई जगह सड़कें खोद दी गई हैं, लेकिन काम पूरा नहीं होने से लोगों को आवाजाही में काफी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में सुस्ती के कारण समस्या और बढ़ गई है। अधूरे नाले की वजह से गंदा पानी कई जगह जमा हो जाता है, जिससे बदबू और मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। लोगों को डर है कि यदि जल्द ही नाला निर्माण पूरा नहीं हुआ तो बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। शिवाजीनगर की कई गलियों की सड़कें भी जर्जर अवस्था में हैं। कहीं सड़क टूटी हुई है तो कहीं निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है। कई जगहों पर सड़क और नाला निर्माण एक साथ शुरू किया गया, लेकिन समय पर पूरा नहीं होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के समय सड़कें कीचड़ और जलजमाव से भर जाती हैं, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को विशेष रूप से परेशानी होती है। मोहल्ले के कई हिस्सों में जलजमाव के कारण गंदगी फैल जाती है, जिससे बीमारियों का खतरा भी बना रहता है।शिकायतें:1. मोहल्ले के लोगों को पीने के पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत करने पर भी कार्रवाई नबीं हो रही है।2. मोहल्ले में अधूरा सड़क और नाला निर्माण कार्य से आवाजाही में कठिनाई हो रही है। जलजमाव की भी समस्या है।3. मोहल्ले में आवारा पशुओं और बंदरों के आतंक से लोगों को परेशानी हो रही है। इसे नियंत्रित नहीं किया जा रहा है।4. मोहल्ले में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने से लोगों को मामूली उपचार के लिए भी डीएमसीएच पर निर्भर रहना पड़ता है।सुझाव:1. पेयजल आपूर्ति बहाल करने के लिए जलमीनार का निर्माण कराया जाएं और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।2. सड़क और नाला निर्माण का काम पूरा किया जाए, जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना न करना पड़े।3. आवारा पशुओं और बंदरों पर नियंत्रण के लिए नगर निगम ठोस कदम उठाए। कारगर रणनीति बनाकर काम हो। 4. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना हो ताकि लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिले और डीएमसीएच से छुटकारा मिले।

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