संस्कृति विवि के प्राध्यापकों को डेढ़ साल से वेतन का इंतजार, छलका दर्द
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों को पिछले डेढ़ साल से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति गंभीर हो गई है। शिक्षकों ने कई बार प्रशासन से मदद मांगी है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं हुआ। वे

कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के नवनियुक्त सहायक प्राध्यापक पिछले करीब डेढ़ साल से वेतन नहीं मिलने के कारण गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। लंबे समय से वेतन भुगतान नहीं होने के कारण इन शिक्षकों के सामने न केवल परिवार चलाने की समस्या खड़ी हो गई है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और दैनिक जरूरतों को पूरा करना भी कठिन होता जा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से वेतन भुगतान की गुहार लगाने के बावजूद अब तक केवल आश्वासन ही मिला है, जबकि वास्तविकता यह है कि भुगतान शुरू नहीं हो सका है।
दरअसल विश्वविद्यालय सेवा आयोग से चयनित इन सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच विभिन्न संबद्ध कॉलेजों में हुई थी। नियुक्ति के बाद सभी शिक्षकों ने अपने-अपने कॉलेजों में नियमित रूप से योगदान भी दे दिया और तब से लगातार शैक्षणिक कार्यों में लगे हुए हैं। लेकिन नियुक्ति के बाद से अब तक उन्हें एक बार भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। हिंदुस्तान अखबार के “बोले दरभंगा” अभियान के तहत अपनी समस्या साझा करते हुए कई नवनियुक्त शिक्षकों ने कहा कि वेतन नहीं मिलने के कारण अब उनके सामने भुखमरी जैसी स्थिति पैदा होने लगी है। उन्होंने बताया कि लगातार डेढ़ साल तक बिना वेतन काम करना किसी भी शिक्षक के लिए बेहद कठिन स्थिति है। नवनियुक्त शिक्षक डॉ. संजीव कुमार, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. राहुल कुमार, डॉ. सचिंद्र कुमार, डॉ. घनश्याम कुमार, डॉ. गोपाल कुमार झा और डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा कि नियुक्ति के बाद उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ शिक्षण कार्य शुरू किया। कॉलेजों में नियमित कक्षाएं ली जा रही हैं और विद्यार्थियों की पढ़ाई में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जा रही है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें वेतन नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों से मिलकर अपनी समस्या रखी है। हर बार उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया जाता है कि जल्द ही वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इसी तरह डॉ. सुबोध कुमार, डॉ. भरत मंडल, डॉ. नीरज कुमार, डॉ. सूरज कुमार, डॉ. संजीत कुमार, डॉ. राजेश्वर पासवान और डॉ. जयराम शर्मा ने भी अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वेतन की मांग करते-करते अब वे लोग थक चुके हैं। बार-बार आवेदन देने और अधिकारियों से मिलने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। शिक्षकों ने बताया कि करीब एक से डेढ़ साल तक वेतन बंद रहने से घर की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कई शिक्षकों को अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। कुछ शिक्षकों ने तो अपने बचत के पैसे खत्म होने के बाद रिश्तेदारों से भी मदद लेनी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना भी अब मुश्किल होता जा रहा है। आर्थिक संकट के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ रहा:कई शिक्षकों के बच्चों की स्कूल फीस समय पर जमा नहीं हो पा रही है। इसके अलावा किराया, इलाज, राशन और अन्य दैनिक खर्च भी किसी तरह पूरा किया जा रहा है। शिक्षकों ने यह भी बताया कि आर्थिक संकट के कारण मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है। लगातार वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। एक तरफ उन्हें परिवार की जिम्मेदारियां निभानी पड़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बिना वेतन के नियमित रूप से कॉलेज जाकर पढ़ाना भी उनकी मजबूरी बन गया है। कुछ शिक्षकों ने बताया कि कई बार उन्हें कॉलेज आने-जाने के लिए भी पैसे की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है। बावजूद इसके वे किसी तरह अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। शिक्षकों का कहना है कि इस पूरी स्थिति का असर अब शिक्षण व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। जब शिक्षक खुद आर्थिक और मानसिक तनाव से गुजर रहे हों तो उसका प्रभाव स्वाभाविक रूप से उनके काम पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि वे पूरी कोशिश करते हैं कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, लेकिन लंबे समय तक इस तरह की स्थिति बने रहना शिक्षा व्यवस्था के लिए भी ठीक नहीं है। कुछ शिक्षकों ने यह भी दावा किया कि ऐसा नहीं है कि विश्वविद्यालय के पास वेतन भुगतान के लिए राशि उपलब्ध नहीं है। उनके अनुसार सरकार की ओर से हर महीने वेतन मद की राशि विश्वविद्यालय को भेजी जा रही है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय स्तर पर प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण वेतन का भुगतान लंबित पड़ा हुआ है। शिक्षकों ने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। शिकायतें:1. नवनियुक्त शिक्षकों को एक से डेढ़ साल का वेतन नहीं मिला है। इस वजह से उनकी परेशानी काफी बढ़ गयी है। 2. वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों का परिवार चलाना मुश्किल हो रहा। अब दुकानदार भी उधार देने से मना कर रहे हैं। 3. शिक्षकों के परिवारों में खासकर बच्चों की शिक्षा-दीक्षा समेत इलाज आदि पर गंभीर असर पड़ने लगा है।4. शिक्षकों को राशि के अभाव में मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है। कई बार गुहार लगाने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ। सुझाव:1. विश्वविद्यालय प्रशासन को शिक्षकों को वेतन का भुगतान जल्द से जल्द करने की आवश्यकता है। तभी परेशानी दूर होगी।2. विश्वविद्यालय के कुलपति एवं कुलसचिव को शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया को प्राथमिकता देनी चाहिए।3. सरकार की ओर से विश्वविद्यालय को भेजी गई राशि का उपयोग शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए किया जाए।4. विश्वविद्यालय प्रशासन को शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित करनी चाहिए।
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