हिमाचल-उत्तराखंड में लैंड स्लाइड से तबाही के नाम पर बिहार में साइबर ठगी, खाते से उड़ा रहे पैसे
प्राकृतिक आपदा जहां होती है, उसके दूसरे दिन से ही साइबर ठग सक्रिय हो जा रहे हैं। वेबसाइट को संबंधित आपदा वाली जगह से जोड़ते हैं। उसमें उसी तरह से फोटो लगाते हैं। कुछ पीड़ित का वीडियो भी डालते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति ऑनलाइन पैसे भेजता है, कुछ ही देर में उसके खाते से सारे पैसे निकल जाते हैं।

आपदा और चैरिटी के नाम पर फर्जी एप और वेबसाइट बनाकर आम लोगों से बड़े पैमाने पर साइबर ठगी हो रही है। पिछले एक माह में राज्य के 20 हजार 547 लोगों के बैंक खातों से लाखों रुपए निकाल लिये गए। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में बादल फटने और भूस्खलन से हुई तबाही के नाम पर लोगों को शिकार बनाया गया। इसके अलावा बिहार के कुछ जिलों में आई बाढ़ के नाम पर भी चैरिटी एप और वेबसाइट बना कर ठगी की गई।
इस बाबत दूरसंचार विभाग ने लोगों से सतर्क रहने के लिए दिशा-निर्देश जारी किया है। एक-डेढ़ माह में 15 से 20 फर्जी संगठन बना साइबर ठगी की जा रही है। लोगों से सोशल मीडिया, मोबाइल मैसेज, ईमेल या फिर कॉल करके आपदा के नाम पर साहानुभूति लेकर ठगी हो रही है।
घटना के दूसरे दिन से हो जाते हैं सक्रिय
प्राकृतिक आपदा जहां होती है, उसके दूसरे दिन से ही साइबर ठग सक्रिय हो जा रहे हैं। वेबसाइट को संबंधित आपदा वाली जगह से जोड़ते हैं। उसमें उसी तरह से फोटो लगाते हैं। कुछ पीड़ित का वीडियो भी डालते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति ऑनलाइन पैसे भेजता है, कुछ ही देर में उसके खाते से सारे पैसे निकल जाते हैं। आपदा के नाम पर पांच हजार से एक लाख तक की ठगी हुई है। ठग महिलाओं को अधिक निशाना बना रहे हैं। ठगे जाने वाले 20 हजार में 12 हजार 675 महिलाएं हैं। महिलाओं से दस लाख की ठगी हुई है।
सरकारी अधिकारी और व्यवसायी अधिक शिकार
सरकारी महिला अधिकारी और व्यवसायी इसके सबसे ज्यादा शिकार हुए हैं। पटना सचिवालय, बिजली विभाग, समाहरणालय में काम कर रही महिला अधिकारियों के मोबाइल पर व्हाट्सअप के माध्यम से मैसेज भेजे गये। इससे वह यह समझे कि जान-पहचान वाले मैसेज भेज रहे हैं। इससे वो आसानी से साइबर ठग की चपेट में आ गयीं।




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