राज्यसभा भेजना था तो भाजपा से भेज देते; हरिवंश के मनोनयन पर कांग्रेस ने उठाया कलाकारों का सवाल
कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया पैनलिस्ट सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा भेजना था तो भाजपा से भेज देते। राष्ट्रपति के जरिए मनोनयन कर किसी विशिष्ट कलाकार की सीट क्यों खा गए।

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह के राष्ट्रपति द्वारा सांसद बनाए जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की पार्टी का कहना है कि अगर उन्हें राज्यसभा भेजना ही था तो भारतीय जनता पार्टी से भेज देते, हरिवंश के नाम पर किसी कलाकार की सीट क्यों खा ली। दरअसल, हरिवंश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बतौर राज्यसभा का सदस्य मनोनित किया है। वह तीसरी बार संसद के उच्च सदन के सदस्य बनाए गए हैं। इससे पहले दो बार वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) से दो बार राज्यसभा सांसद बने थे। इस बार जेडीयू से उनकी जगह नीतीश खुद सांसद बने हैं।
कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया पेनलिस्ट सुरेंद्र राजपूत ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि शायद ऐसा पहली बार हो रहा है कि कोई व्यक्ति पहले किसी राजनीतिक दल से सांसद हुआ और उसे दोबारा राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया गया हो। उन्होंने कहा कि हरिवंश सिंह के केस में हुआ है। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि क्या यह कला और संस्कृति विभूतियों के प्रति अन्याय नहीं है? उनके नाम पर किसी कलाकार की राज्यसभा सीट खा गए। उन्हें राज्यसभा भेजना था तो भाजपा से भेज देते। यह बहुत पीड़ादायक है।
रंजन गोगोई की सीट से नॉमिनेट हुए हरिवंश
हरिवंश नारायण सिंह को राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की सीट से मनोनित किया है। रंजन गोगोई के रिटायर होने के बाद यह सीट खाली हुई थी। हरिवंश का कार्यकाल 2032 तक रहेगा।
राष्ट्रपति के जरिए 12 सांसद होते हैं मनोनित
राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं। अभी 245 सदस्य हैं। इनमें से 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनित किया जाता है। कला, साहित्य, विज्ञान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वालों को राष्ट्रपति द्वारा सांसद बनाया जाता है।
पत्रकार रह चुके हैं हरिवंश
हरिवंश नारायण सिंह राजनेता बनने से पहले लंबे समय तक पत्रकार रहे। वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले हैं। 3 दशक से ज्यादा समय तक उन्होंने पत्रकारिता की। प्रभात खबर के संपादक रहे। इसके अलावा, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त मीडिया सलाहकार भी रहे।
2014 में जेडीयू ने उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजा था। 2018 में वे राज्यसभा के उपसभापति चुने गए थे। 2020 में फिर से जेडीयू से राज्यसभा गए और उपसभापति के पद पर दोबारा निर्वाचित हुए। 9 अप्रैल को उनका दूसरा कार्यकाल समाप्त हो गया। 10 अप्रैल को राष्ट्रपति ने उनके राज्यसभा सदस्य के रूप में मनोनयन पर मुहर लगाई। दोपहर में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णनन ने उन्हें सांसद की शपथ भी दिला दी। उनके फिर से राज्यसभा का उपसभापति बनने की चर्चा है।




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